
दिल्ली की केजरीवाल सरकार में वित्त मंत्री आतिशी इन दिनों प्रधान सचिव वित्त से काफी खफा चल रही हैं। उन्हें लगता है कि प्रधान सचिव किसी के इशारे पर जान-बूझकर उनके निर्देशों की अवहेलना कर रहे हैं। सरकार के कामों में न सिर्फ व्यवधान खड़ा कर रहे हैं बल्कि भ्रष्टाचार का भी वह पोषण कर रहे हैं। ऐसा कर वह सरकार की बदनामी भी करा रहे हैं। उनकी इस नाराजगी की पुष्टि प्रधान सचिव को भेजे गए उस नोट से भी होती है, जिसमें उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के 12 कॉलेजों में अब तक स्पेशल ऑडिट शुरू न करने पर उन्हें कड़ी फटकार लगाई है।
सचिव को भेजे अपने नोट में वित्त मंत्री आतिशी ने कहा है कि दो महीने का समय बीत चुका है मगर अभी तक कॉलेजों का ऑडिट शुरू नहीं हुआ है, जबकि इसके लिए बाकायदा निर्देश दिए गए थे। उन्होंने पूछा है कि आखिर इसकी क्या वजह है? क्या वित्त विभाग और कॉलेज के बीच कोई मिलीभगत चल रही है? इतना ही नहीं, मंत्री महोदय की नाराजगी का पारा इतना चढ़ा हुआ है कि ऑडिट शुरू न करने पर उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई तक की चेतावनी दी है।
बता दें कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के 12 कॉलेज पूरी तरह दिल्ली सरकार द्वारा वित्त पोषित हैं। पिछले कई महीनों सरकार ने इनका फण्ड रोक रखा था। सरकार का आरोप था कि इन कॉलेजों में वित्तीय अनियमितताएं पता चली हैं। फण्ड के रुकने से कई महीनों तक कर्मचारियों को वेतन तक नहीं मिल पाए थे। अंततः बीते फ़रवरी महीने में दिल्ली सरकार ने फण्ड जारी किया। लेकिन साथ ही प्रधान सचिव वित्त को इन अनियमितताओं की जांच के लिए स्पेशल ऑडिट का भी निर्देश दिया था। दुर्भाग्य है कि दो महीने से ज़्यादा बीतने के बावजूद इस दिशा में कोई शुरुआत तक नहीं हुई। इससे वित्त मंत्री आतिशी बेतरह उखड़ी हुई हैं।
नाराज वित्त मंत्री आतिशी ने प्रधान सचिव वित्त को लिखे पत्र में ऑडिट शुरू न करने पर फटकार तो लगाई ही है, कड़े शब्दों में इसे तुरंत चालू करने का भी निर्देश दिया है। बता दें कि इस मामले में वित्त विभाग द्वारा उच्च शिक्षा निदेशालय से स्पेशल ऑडिट पर अलग से प्रस्ताव भेजने को कहना भी मंत्री को नागवार गुज़रा है। उन्होंने इस कदम को स्पेशल ऑडिट में देरी करने की रणनीति का एक हिस्सा बताया है।




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