
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (UGC) व दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए कॉलेजों/संस्थानों ने यूजी, पीजी पाठ्यक्रमों में शैक्षिक सत्र-2024-25 में एडमिशन प्रक्रिया शुरू करने से पूर्व विद्यार्थियों के लिए कॉलेजों ने अपने-अपने स्तर पर कमेटियाँ बनानी शुरू कर दी हैं। कमेटी में शिक्षकों, छात्रों व कर्मचारियों को प्रतिनिधित्व दिया गया है। इसी कड़ी में अरबिंदो कॉलेज ने यूजीसी द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पालन करते हुए कॉलेज को रैगिंग मुक्त बनाने के लिए उचित कदम उठाए हैं।
अरबिंदो कॉलेज एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्य डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि किसी भी छात्र द्वारा कॉलेज में किसी अन्य छात्र को बोले गए शब्दों या लिखित अथवा किसी अन्य प्रकार से अपने से जूनियर छात्र को परेशान करने के उद्देश्य से उसके साथ अशिष्टता या दुर्व्यवहार करता है, तो वह रैगिंग की श्रेणी में आएगा। कॉलेज में रैगिंग रोकने के लिए कमेटी गठित की गई है और छात्र हित में कई निर्णय लिए गए हैं । इसके अलावा स्टूडेंट्स ग्रीवेंस कमेटी, इंटरनल कम्पलेंड कमेटी तथा स्कॉलरशिप सेल आदि की कमेटियों का बोर्ड सूचनापट्ट पर लगाया गया है ।
उन्होंने आगे बताया कि रैगिंग रोकने के लिए विद्यार्थियों को कॉलेज खुलने के पहले ही दिन ओरिएंटेशन प्रोग्राम के माध्यम से जानकारी दी जाती है, साथ ही एंटी रैगिंग कमेटी द्वारा यूजीसी की गाइडलाइंस को छात्रों में वितरित भी किया जाता है। फिर भी कोई छात्र रैगिंग करता हुआ पकड़ा जाता है तो कॉलेज उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यूजीसी ने डीयू समेत सभी शिक्षण संस्थानों / कॉलेजों को सख्त निर्देश जारी किए हैं जिसमें रैगिंग रोकने के उपायों को आवश्यक रूप से लागू करने पर जोर दिया गया है। इसके लिए कॉलेज में एंटी रैगिंग सेल बनाने, वर्कशाप करने, कैम्प लगाकर कानूनी पहलुओं के विषय में बताने का निर्देश दिया गया है। उनका कहना है कि यूजीसी की गाइडलाइंस में स्पष्ट है कि शिक्षण संस्थानों / कॉलेजों में रैगिंग पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध है। इसका उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही की जाएगी।
बता दें कि रैगिंग को लेकर इस साल यूजीसी ने सख्त कदम उठाए हैं , यूजीसी ने विश्वविद्यालय के कुलसचिव और कॉलेज प्रिंसिपल की भी जवाबदेही तय की है। यदि कार्यवाही में देरी होती है और नियमों के मुताबिक एक्शन नहीं लिया जाता है तो अधिकारियों पर भी कार्यवाही होनी चाहिए। यूजीसी को पिछले साल रैगिंग संबंधी छात्रों की 1240 शिकायतें मिली थीं जिसमें से 1113 का निपटारा किया गया है । यूजीसी का कहना है कि अभी रैगिंग के 127 केस पेंडिंग है जिनकी जांच चल रही है।
शिकायत करने वालों में 82% छात्र और करीब 18% छात्राएं हैं।
गौरतलब है कि यूजीसी व डीयू ने रैगिंग की घटनाओं से प्रभावित विद्यार्थियों के लिए हेल्पलाइन नंबर, विद्यार्थी टोल फ्री नंबर व एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करने की सुविधा दी है। इसमें छात्र अपनी पहचान छिपाकर भी शिकायत कर सकते हैं। 24 घंटे चलने वाले वाले UGC के टोल फ्री नंबर 1800-180-5522 पर छात्र अपनी समस्या बता सकते हैं। इसके अलावा www.antiragging.in पर ऑनलाइन रिपोर्टिंग की जा सकती है। इसके अलावा helpline@antiragging.in पर ईमेल भी किया जा सकता है




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