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Leading Agricultural Innovation in the Era of Climate Crisis: Vellayani Agricultural College’s New Focus

जलवायु संकट के दौर में खेती का नया मॉडल: वेल्लयानी कृषि कॉलेज बना नवाचार का केंद्र

Leading Agricultural Innovation in the Era of Climate Crisis: Vellayani Agricultural College’s New Focus

बदलते मौसम के अनिश्चित पैटर्न और घटते कृषि मुनाफे के इस दौर में, केरल का वेल्लयानी स्थित कृषि कॉलेज खुद को नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है। हाल ही में राज्य के केरल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (KIRF) में कृषि और संबद्ध क्षेत्र में शीर्ष स्थान हासिल करने के बाद, संस्थान अब जलवायु-स्मार्ट और प्रिसिजन एग्रीकल्चर पर अपना फोकस और तेज कर रहा है। यही दो क्षेत्र भविष्य की खेती को दिशा देने वाले माने जा रहे हैं।

केरल कृषि विश्वविद्यालय (KAU) से संबद्ध यह कॉलेज दक्षिण भारत में कृषि शिक्षा का एक मजबूत स्तंभ रहा है। संस्थान के अधिकारियों के मुताबिक, यह उपलब्धि सिर्फ सम्मान नहीं बल्कि किसानों के सामने खड़ी जलवायु चुनौतियों के समाधान के लिए रिसर्च को और मजबूत करने की जिम्मेदारी भी है।

फैकल्टी के डीन जैकब जॉन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन अब कोई दूर की समस्या नहीं, बल्कि किसानों की रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी है। ऐसे में रिसर्च को भी उसी दिशा में विकसित करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि KIRF में मिली यह पहचान वर्षों से फैकल्टी, छात्रों और पूर्व छात्रों के सामूहिक प्रयासों का नतीजा है, जिसमें अकादमिक गुणवत्ता और जमीनी प्रभाव का संतुलन बनाए रखा गया है।

विरासत से नेतृत्व की ओर बढ़ता कदम

केरल के पहले कृषि कॉलेज के रूप में स्थापित यह संस्थान इस समय अपना प्लेटिनम जुबली वर्ष मना रहा है। यह उपलब्धि जहां इसकी मजबूत विरासत को दर्शाती है, वहीं भविष्य के लिए नई दिशा भी तय कर रही है। अब कॉलेज अपने रिसर्च ढांचे में रिमोट सेंसिंग, डेटा आधारित फसल प्रबंधन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सलाहकारी सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल करने की योजना बना रहा है।

प्रिसिजन एग्रीकल्चर, जिसमें डेटा एनालिटिक्स के जरिए पानी, उर्वरक और कीटनाशकों के उपयोग को बेहतर बनाया जाता है, कॉलेज के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में शामिल है। इसका उद्देश्य खेती की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करना है, जो आज के जलवायु संकट के समय में बेहद जरूरी हो गया है।

वैश्विक साझेदारी, स्थानीय समाधान

संस्थान की प्राथमिकताओं में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना भी शामिल है। अधिकारियों के अनुसार, वैश्विक रिसर्च संस्थानों के साथ साझेदारी से ज्ञान का आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाएं और नई तकनीकों तक पहुंच संभव होगी। इससे नवाचार की गति तेज होगी और समाधान स्थानीय जरूरतों के अनुसार ढाले जा सकेंगे।

इसके साथ ही, कॉलेज अपने टेक्नोलॉजी इनक्यूबेशन इकोसिस्टम को भी विस्तार देने की योजना बना रहा है, जिससे एग्री-स्टार्टअप्स को नए समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने का अवसर मिल सके। फोकस खेती के उपकरणों से लेकर जलवायु-लचीली फसल किस्मों के विकास तक रहेगा।

किसान-केंद्रित नवाचार पर जोर

वेल्लयानी कृषि कॉलेज की सबसे बड़ी खासियत इसका किसान-केंद्रित दृष्टिकोण है। यहां रिसर्च सिर्फ प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहती, बल्कि किसानों के साथ मिलकर उसे जमीन पर परखा और बेहतर बनाया जाता है। यही कारण है कि यहां विकसित तकनीकें व्यवहारिक और बड़े स्तर पर लागू करने योग्य होती हैं।

अधिकारियों का मानना है कि KIRF में शीर्ष रैंक इस मॉडल की सफलता का प्रमाण है। यह न केवल अकादमिक उत्कृष्टता को दर्शाता है, बल्कि राज्य में सतत कृषि विकास में संस्थान के योगदान को भी मान्यता देता है।

बदलते जलवायु परिदृश्य में जब पारंपरिक खेती चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वेल्लयानी कृषि कॉलेज नवाचार और अनुभव के मेल के साथ आगे बढ़ने के लिए तैयार नजर आ रहा है—जहां स्थानीय समझ और वैश्विक तकनीक मिलकर खेती का भविष्य तय कर रही हैं।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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