
भारत में उच्च शिक्षा की बढ़ती लागत के बीच डिग्री पर मिलने वाले आर्थिक लाभ (ROI) को लेकर चिंता गहराती जा रही है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवार लोकप्रिय डिग्रियों पर 30 से 40 लाख रुपये तक खर्च कर रहे हैं, लेकिन इसके बदले शुरुआती सैलरी अपेक्षा से काफी कम मिल रही है।
Finance Global Economic Outlook 2026 के तहत जारी इस अध्ययन में बताया गया है कि इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स की औसत शुरुआती सैलरी करीब 4.74 लाख रुपये सालाना है। यानी भारी निवेश के मुकाबले रिटर्न काफी धीमा है।
इंजीनियरिंग डिग्री पर बढ़ा दबाव
रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई के एक मध्यम स्तर के निजी कॉलेज से चार साल की बीटेक डिग्री पर केवल ट्यूशन फीस ही लगभग 17.3 लाख रुपये तक पहुंच जाती है। यदि स्कूल शिक्षा समेत कुल खर्च जोड़ा जाए, तो यह निवेश करीब 34 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
वहीं, सॉफ्टवेयर डेवलपर की औसत शुरुआती सैलरी 4.74 लाख रुपये सालाना आंकी गई है। महंगाई और जीवन-यापन के खर्च को ध्यान में रखें तो इस निवेश की भरपाई करने में 20 साल से ज्यादा समय लग सकता है।
AI और डेटा रोल्स में बेहतर मौके
रिपोर्ट में 950 जॉब पोस्टिंग के विश्लेषण के आधार पर पाया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा से जुड़े पदों पर पारंपरिक आईटी नौकरियों के मुकाबले 20 से 40 प्रतिशत तक अधिक सैलरी मिल रही है। अनुभवी AI पेशेवरों की सालाना आय 35 लाख से 70 लाख रुपये तक पाई गई, जबकि कई पारंपरिक आईटी भूमिकाओं में सैलरी एक स्तर पर जाकर ठहर जाती है।
MBA में सीटें बढ़ीं, नौकरी के मौके नहीं
All India Council for Technical Education (AICTE) से मान्यता प्राप्त MBA संस्थानों की संख्या 2021-22 में 3,095 से बढ़कर 2025-26 में 3,465 हो गई है। लेकिन इसके अनुरूप गुणवत्तापूर्ण नौकरियों की संख्या में उतनी वृद्धि नहीं हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में देश के नौ प्रमुख बिजनेस स्कूलों में से सात में प्लेसमेंट सैलरी में गिरावट दर्ज की गई। Indian Institute of Management Indore में औसत प्लेसमेंट सैलरी में साल-दर-साल करीब 15 प्रतिशत की कमी देखी गई।
बिना नौकरी बाजार में उतर रहे छात्र
Unstop Talent Report 2025 के अनुसार, 46 प्रतिशत बी-स्कूल ग्रेजुएट्स और 83 प्रतिशत इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स बिना नौकरी या इंटर्नशिप के ही नौकरी बाजार में प्रवेश कर रहे हैं। यह आंकड़ा कौशल और उद्योग की जरूरतों के बीच बढ़ते अंतर को दर्शाता है।
प्रोफेशनल कोर्स भी अछूते नहीं
चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) जैसे प्रोफेशनल कोर्स में भी प्रतिस्पर्धा तेज हुई है। 2019 में जहां करीब 6 लाख छात्र इस परीक्षा में शामिल हुए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर 12 लाख हो गई। सेमी-क्वालिफाइड उम्मीदवारों के लिए शुरुआती नौकरियों की सैलरी 3 से 5 लाख रुपये सालाना बताई गई है।
विशेषज्ञों की सलाह
रिपोर्ट में कहा गया है कि छात्रों और अभिभावकों को शिक्षा में निवेश करने से पहले करियर के अवसरों और बाजार की मांग का सही आकलन करना चाहिए। केवल संस्थान के नाम के आधार पर फैसला लेना अब पर्याप्त नहीं है।
कौशल पर फोकस जरूरी
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बढ़ती शिक्षा लागत और धीमी सैलरी वृद्धि के बीच अब ध्यान डिग्री से ज्यादा कौशल और रोजगार क्षमता पर देना होगा। वही छात्र आगे बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे, जो बदलती जरूरतों के अनुसार खुद को तैयार करेंगे।




Add comment