
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Eligibility cum Entrance Test (NEET) को लेकर एक अहम बदलाव सामने आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस परीक्षा में शामिल होने वाली लड़कियों की संख्या लगातार बढ़ी है और अब वे लड़कों से आगे निकल चुकी हैं। यह ट्रेंड सिर्फ आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि मेडिकल क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और बदलती सामाजिक सोच का संकेत भी है।
आंकड़े बताते हैं कि 2019 से 2026 के बीच महिला उम्मीदवारों की संख्या में तेज बढ़ोतरी हुई है। 2019 में जहां करीब 8.38 लाख लड़कियां परीक्षा में शामिल हुई थीं, वहीं 2026 तक यह संख्या बढ़कर लगभग 13.32 लाख तक पहुंच गई। दूसरी ओर, लड़कों की संख्या भी बढ़ी, लेकिन उनकी वृद्धि दर अपेक्षाकृत धीमी रही। इससे साफ है कि डॉक्टर बनने का सपना अब बड़ी संख्या में बेटियां देख रही हैं और उसे हासिल करने के लिए सक्रिय रूप से आगे भी बढ़ रही हैं।
2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 9.46 लाख पुरुष उम्मीदवारों के मुकाबले 13.32 लाख महिला उम्मीदवारों ने आवेदन किया। कुल आवेदकों में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 58 प्रतिशत तक पहुंच गई है। पिछले कुछ वर्षों में यह अंतर लगातार बढ़ता गया है, जो शिक्षा और करियर के चुनाव में हो रहे सामाजिक बदलाव को दर्शाता है।
अगर पिछले वर्षों के ट्रेंड को देखें, तो हर साल लड़कियों की भागीदारी में स्थिर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2020 में यह संख्या करीब 8.8 लाख थी, जो 2022 में 10 लाख से अधिक हो गई। 2024 में यह आंकड़ा 13 लाख के पार पहुंच गया और अब 2026 में यह और मजबूत स्थिति में है। यह संकेत देता है कि मेडिकल शिक्षा अब महिलाओं के लिए प्राथमिक विकल्प बनती जा रही है।
जहां तक अवसरों की बात है, देश में MBBS सीटें जेंडर के आधार पर विभाजित नहीं होतीं। यानी लड़के और लड़कियां समान प्रतिस्पर्धा के आधार पर प्रवेश लेते हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक 86 मेडिकल कॉलेज हैं, जबकि महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्य भी इस मामले में आगे हैं। इससे मेडिकल शिक्षा तक पहुंच का दायरा बढ़ा है, जिसका लाभ बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं को मिल रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि लड़कियों की बढ़ती भागीदारी के पीछे कई कारण हैं। मेडिकल क्षेत्र को अब स्थिर, सम्मानजनक और सेवा से जुड़े करियर के रूप में देखा जाता है। परिवारों का बढ़ता सहयोग, शिक्षा के बेहतर अवसर और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई है। ग्रामीण और छोटे शहरों से आने वाली छात्राएं भी अब बड़े पैमाने पर इस परीक्षा में हिस्सा ले रही हैं।
मेडिकल क्षेत्र की तस्वीर भी तेजी से बदल रही है। आज महिलाएं न सिर्फ मेडिकल पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि डॉक्टर बनकर स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। आने वाले वर्षों में यह भागीदारी और मजबूत होने की संभावना है, जो देश के स्वास्थ्य तंत्र के लिए भी सकारात्मक संकेत है।
कुल मिलाकर, NEET में लड़कियों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि भारत में शिक्षा और करियर के क्षेत्र में लैंगिक संतुलन बेहतर हो रहा है। यह बदलाव न केवल मेडिकल पेशे को समृद्ध करेगा, बल्कि समाज में महिलाओं की भूमिका को भी और मजबूत बनाएगा।




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