
दिल्ली पेरेंट्स एसोसिएशन (DPA) ने शिक्षा विभाग से दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय पर पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की मांग की है, जिसमें उसने फीस वृद्धि को लेकर विभाग के 27 मार्च 2024 के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस सम्बन्ध में अभिभावक संघ ने दिल्ली के उपराजयपाल, मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री को पत्र भी लिखा है।
पत्र में कहा गया है कि दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों द्वारा हर साल बढ़ी हुई मनमानी फीस वसूली जाती है, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर बच्चों की शिक्षा का अतिरिक्त भार पड़ता है। हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा फीस वृद्धि पर लगाई गई रोक के बावजूद स्कूल 40-50 प्रतिशत फीस बढाकर पेरेंट्स से जबरन इसकी वसूली कर रहे हैं। वे दिल्ली उच्च न्यायालय के उस फैसले की गलत आड़ ले रहे हैं, जिसमें उसने दिल्ली सरकार द्वारा जारी 27 मार्च 2024 के आदेश पर रोक लगा दी है।
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में कोई भी मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल, जिसे सरकारी एजेंसियों द्वारा भूमि आवंटित की गई है, आगामी 2024-25 शैक्षणिक सत्र के लिए पूर्व मंजूरी के बिना शुल्क नहीं बढ़ाएगा। इसके बावजूद दिल्ली के ऐसे स्कूल खुलेआम अभिभावकों से वसूली कर रहे हैं।
दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम कहती हैं कि यहाँ लगभग 2000 मान्यता प्राप्त निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल हैं, जिसमें से करीब 394 स्कूल सरकारी ज़मीन पर बने हैं। इन 394 स्कूलों में से भी केवल 350 के आसपास स्कूलों पर लैंड क्लॉज़ लागू है यानी इन स्कूलों का हर वर्ष ऑडिट करने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग पर है। इन 350 स्कूलों में से केवल 230 स्कूल ही अपनी 17(3) की स्टेटमेंट शिक्षा विभाग में फीस बढ़ोतरी के लिए जमा करवाते हैं।
अपराजिता गौतम कहती हैं कि 2000 स्कूलों में से लगभग 1800 स्कूल यानि 90 प्रतिशत स्कूल मनमानी फीस वसूल रहे हैं क्योंकि वो पूर्वानुमति के दायरे में नहीं आते। और, जो आते हैं वो भी मनमानी फीस वसूल रहे हैं। लगातार आदेशों की अवहेलना करते हुए फीस बढ़ा रहे हैं। मामला न्यायालय में भी स्कूल के पक्ष में चला जाता है क्योंकि शिक्षा विभाग की तरफ से दलील पेश करने वाले वकील या तो पूरे दस्तावेज कोर्ट में नहीं पेश करते या फिर हलके तरीके से दलील रखते हैं।
उनका कहना है कि इससे पेरेंट्स में आक्रोश है। फीस वृद्धि पर स्कूलों की मनमानी को देखते हुए ही शिक्षा विभाग के 27 मार्च 2024 के आदेश पर रोक लगाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय पर तुरंत पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की गई है। साथ ही सारे ज़रूरी तथ्य और आंकड़े भी उनसे साझा किये गए हैं ताकि इसकी आवश्यकता समझी जा सके।




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