
देशभर के मेडिकल कॉलेजों के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग यानी National Medical Commission (NMC) ने अहम निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने साफ कहा है कि जिन संस्थानों में एमबीबीएस पाठ्यक्रम संचालित हो रहा है, उन्हें 2026-27 शैक्षणिक सत्र के लिए एनुअल डिस्क्लोजर रिपोर्ट 30 मई 2026 तक अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अगले शैक्षणिक सत्र में एमबीबीएस सीटों के नवीनीकरण पर फैसला लिया जाएगा।
यह जानकारी एनएमसी के स्नातक चिकित्सा शिक्षा बोर्ड Undergraduate Medical Education Board (UGMEB) द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना में दी गई है। आयोग के अनुसार, जिन मेडिकल कॉलेजों के पास वैध लेटर ऑफ परमिशन (LoP) मौजूद है, उन्हें MSMER 2023 नियमों के तहत तय सभी जानकारी आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करनी होगी।
AEBAS पंजीकरण नहीं होने पर पोर्टल एक्सेस नहीं मिलेगा
एनएमसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन मेडिकल कॉलेजों ने अपना AEBAS सिस्टम आयोग के साथ पंजीकृत नहीं कराया है, वे ऑनलाइन पोर्टल का उपयोग नहीं कर सकेंगे। आयोग की ओर से संबंधित संस्थानों के नोडल अधिकारियों को लॉगिन आईडी और पासवर्ड उपलब्ध करा दिए गए हैं। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया समझाने के लिए विस्तृत यूजर मैनुअल भी ऑनलाइन जारी किया गया है।
आयोग ने मेडिकल कॉलेजों को चेतावनी देते हुए कहा है कि पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली सभी जानकारी पूरी तरह सही होनी चाहिए और यह विभिन्न बोर्डों के रिकॉर्ड से मेल खानी चाहिए। एक बार आवेदन जमा होने के बाद किसी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। एनएमसी ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर इन आंकड़ों को सार्वजनिक किया जा सकता है।
आवेदन शुल्क भी ऑनलाइन जमा करना होगा
एनुअल डिस्क्लोजर रिपोर्ट जमा करने के साथ मेडिकल कॉलेजों को 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 3.54 लाख रुपये आवेदन शुल्क भी जमा करना होगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि शुल्क केवल ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के माध्यम से ही स्वीकार किया जाएगा। किसी अन्य तरीके से किया गया भुगतान मान्य नहीं होगा।
एनएमसी ने अंतिम तिथि को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। आयोग के अनुसार, रिपोर्ट और शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख 30 मई 2026 है और इसके बाद किसी प्रकार का समय विस्तार नहीं दिया जाएगा।
क्या होती है एनुअल डिस्क्लोजर रिपोर्ट?
एनुअल डिस्क्लोजर रिपोर्ट मेडिकल कॉलेजों द्वारा हर वर्ष जमा की जाने वाली अनिवार्य रिपोर्ट होती है। इसमें फैकल्टी की उपलब्धता, अस्पताल सुविधाएं, बुनियादी ढांचा, छात्रों की संख्या और शैक्षणिक संसाधनों से जुड़ी जानकारी शामिल रहती है। इसी आधार पर एनएमसी यह मूल्यांकन करता है कि संबंधित मेडिकल कॉलेज आयोग के तय मानकों को पूरा कर रहे हैं या नहीं।
माना जा रहा है कि इस प्रक्रिया के जरिए आयोग मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को और मजबूत करना चाहता है, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक और क्लीनिकल सुविधाएं मिल सकें।




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