
देशभर में मेडिकल प्रवेश और लाइसेंसिंग परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशंस (FAIMA) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मेडिकल कोचिंग सेंटरों में कथित सुरक्षा और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कमियों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
डॉक्टरों के इस संगठन ने विशेष रूप से उन संस्थानों को लेकर चिंता जताई है, जहां NEET-PG, FMGE और INI-CET जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तैयारी कराई जाती है। FAIMA का कहना है कि बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र और युवा डॉक्टर ऐसे व्यावसायिक भवनों में पढ़ाई कर रहे हैं, जहां पर्याप्त वेंटिलेशन, आपातकालीन निकास (फायर एग्जिट) और भवन सुरक्षा से जुड़े आवश्यक मानकों का अभाव है।
लंबे समय तक कोचिंग में रहते हैं छात्र
एसोसिएशन ने अपने पत्र में कहा है कि मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र अक्सर दिन के 10 से 12 घंटे तक कोचिंग संस्थानों में बिताते हैं। इसके बावजूद कई जगहों पर छात्रों को भीड़भाड़ वाले कक्षाओं और सीमित सुविधाओं वाले परिसरों में पढ़ाई करनी पड़ती है।
FAIMA का मानना है कि जब छात्र कोचिंग के लिए भारी फीस का भुगतान कर रहे हैं और लंबे समय तक संस्थानों में रह रहे हैं, तो उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना संस्थानों और प्रशासन दोनों की जिम्मेदारी है।
बेसमेंट और व्यावसायिक इमारतों में चल रहे संस्थानों पर चिंता
संगठन ने खास तौर पर उन कोचिंग संस्थानों पर सख्त निगरानी की मांग की है, जो बेसमेंट या बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों में संचालित हो रहे हैं। FAIMA के अनुसार, ऐसे कई संस्थानों में सुरक्षा मानकों का पर्याप्त पालन नहीं किया जाता, जिससे आपात स्थिति में छात्रों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में शैक्षणिक गतिविधियों के लिए उपयोग किए जा रहे भवनों में आग लगने की घटनाओं ने भी इस चिंता को और बढ़ाया है। ऐसे मामलों ने कोचिंग उद्योग में सुरक्षा मानकों की समीक्षा की आवश्यकता को सामने रखा है।
2024 के कोचिंग सेंटर दिशानिर्देश लागू करने की मांग
FAIMA ने अपने पत्र में शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी “कोचिंग सेंटरों के विनियमन के लिए दिशानिर्देश, 2024” को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग भी की है।
इन दिशानिर्देशों में कक्षाओं के आकार, अग्नि सुरक्षा व्यवस्था, आधारभूत ढांचे की गुणवत्ता, छात्रों के मानसिक और शारीरिक कल्याण तथा संस्थानों के पंजीकरण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
संगठन का कहना है कि यदि इन नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, तो छात्रों के लिए सुरक्षित और बेहतर शिक्षण वातावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
सुरक्षा प्रमाणपत्र और औचक निरीक्षण की मांग
FAIMA ने सरकार से मांग की है कि सभी कोचिंग संस्थानों के लिए अग्नि सुरक्षा प्रमाणपत्र (फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट) अनिवार्य किया जाए। साथ ही संस्थानों को अपनी छात्र क्षमता, भवन की संरचनात्मक स्थिरता और अन्य सुरक्षा संबंधी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।
संगठन ने यह भी सुझाव दिया है कि नगर निकायों, अग्निशमन विभाग और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) के प्रतिनिधियों की संयुक्त टीमों द्वारा समय-समय पर औचक निरीक्षण किए जाएं। इससे नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
कोचिंग उद्योग में जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत
यह मुद्दा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के तेजी से विस्तार कर रहे कोचिंग उद्योग की निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ा है। बढ़ती छात्र संख्या, व्यावसायिक विस्तार और प्रतियोगी परीक्षाओं का दबाव कोचिंग संस्थानों को शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है।
हालांकि छात्र संगठनों और विभिन्न पेशेवर संस्थाओं ने समय-समय पर कोचिंग संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं, फीस संरचना और सुरक्षा मानकों को लेकर अधिक जवाबदेही की मांग उठाई है।
छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील
FAIMA ने केंद्र सरकार से अपील की है कि कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन को केवल प्रशासनिक मुद्दा न मानकर छात्रों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़ा विषय माना जाए। संगठन का कहना है कि सभी कोचिंग संस्थानों को न्यूनतम संचालन और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि लाखों छात्रों को सुरक्षित और बेहतर अध्ययन वातावरण मिल सके।
देश में मेडिकल शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यह मुद्दा आने वाले समय में शिक्षा और छात्र सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों में शामिल रह सकता है।




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