Edinbox Hindi

बिहार में पढ़ा रहीं दूसरे राज्यों की महिला शिक्षकों की जा सकती है नौकरी

बिहार में पिछले महीनों में जिस गति से शिक्षकों की बहालियां हुई थीं, अब उसी तेजी से उनकी नौकरियां भी जा रही हैं। खासकर, दूसरे राज्यों की उन महिला शिक्षिकाओं के लिए स्थिति विकट हो गयी है, जिनके केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी सीटीईटी (CTET) में 60 फीसदी से कम अंक हैं। उन पर अयोग्यता की तलवार लटक गयी है।  कभी भी उन्हें नौकरी से निकला जा सकता है। दूसरे राज्यों की शिक्षिकाओं को बिहार में शिक्षक की नौकरी में बने रहने के लिए सीटीईटी में कम से कम 60 फीसदी अंक अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि बिहार राज्य की महिला शिक्षकों के लिए यह सीमा 55 प्रतिशत है। यही कारण है कि इस निर्णय से 60 फीसदी से कम अंक वाली दूसरे राज्यों से आई महिला शिक्षिकाओं में खलबली मच गई है।

जाहिर है कि बहुत सारी शिक्षिकाओं के हाथ से नौकरी जाने की नौबत आ गई है। और इसकी शुरुआत भी हो गयी है। बिहार लोक सेवा आयोग यानी बीपीएससी (BPSC) की परीक्षा पास कर बहाल हुईं औरंगाबाद जिले की दस महिला शिक्षकों को इसी आधार पर अयोग्य पाया गया है और उनकी नौकरी खतरे में है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना दयाशंकर सिंह ने इन सभी महिला शिक्षकों को पत्र जारी कर दिया है और इनसे तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण मांगा है। 

जारी पत्र में साफ़ कहा गया है कि पटना हाईकोर्ट द्वारा जारी निर्देश के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी किए गए पत्र में स्पष्ट है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा में पांच प्रतिशत की छूट बिहार राज्य के निवासी अभ्यर्थियों को ही दी जाएगी। बिहार से बाहर रहने वाले व्यक्तियों को पात्रता परीक्षा में पांच प्रतिशत की छूट नहीं दी जायेगी। 60 प्रतिशत से कम अंक होने के कारण उक्त शिक्षक की औपबंधिक नियुक्त रद्द कर दी जायेगी। 

औरंगाबाद जिले के विभिन्न स्कूलों में 10 ऐसी महिला शिक्षक हैं, जो दूसरे राज्यों की निवासी हैं और उन्हें सीटीईटी में 60 फीसदी से कम यानी 90 से कम अंक मिले हैं। ऐसी शिक्षिकाएं अन्य ज़िलों में भी नियुक्त हुईं हैं, जिन्होंने पात्रता परीक्षा में महिलाओं को मिलने वाली पांच प्रतिशत की छूट का लाभ लिया था। अब उनको यह छूट नहीं मिलेगी अगर वे बिहार के बाहर की है। यही वजह है कि इस खबर से दूसरे राज्यों की महिला शिक्षिकाओं के होश उड़ गए हैं। 

बता दें कि पटना हाईकोर्ट में एक वाद दायर किया गया था, जिसमें एक अप्रैल को फैसला आया था। वाद की आवेदिका ने कोर्ट के फैसले की प्रति के साथ माध्यमिक शिक्षा निदेशक को आवेदन की थी। सुनवाई के दौरान आवेदिका ने दलील दी थी कि उसे बीपीएससी के विज्ञापन संख्या 27/23 के आलोक में संस्कृत विषय में वर्ग छह से आठ तक के विद्यालय अध्यापक के पद पर सफल घोषित कर अरवल जिला आवंटित किया गया था। सीटीईटी में 60 फीसदी से कम अंक रहने के कारण उसका काउंसलिंग रोक दिया गया था, जबकि उस विज्ञापन के पृष्ठ संख्या 5 पर लिखा था कि सामान्य कोटि की महिलाओं को सीटीईटी में 55 फीसदी अंक होना अनिवार्य है। उसे सीटीईटी में 89 अंक प्राप्त हैं। आवेदिका ने निदेशक से काउंसलिंग कराने के साथ ही नियुक्ति पत्र निर्गत करने का आदेश देने की मांग की थी। 

इसके जवाब में जारी आदेश में माध्यमिक शिक्षा निदेशक कन्हैया प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा है कि बिहार में महिलाओं को शिक्षक नियुक्ति में 50 फीसदी आरक्षण देय है। इसी के तहत राज्य सरकार ने पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और सामान्य कोटि की महिला अभ्यर्थियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा में न्यूनतम 55 फीसदी अंक, जबकि अनुसूचित जाति/जनजाति के साथ निशक्त कोटि के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक निर्धारित किया है।

शिक्षा निदेशक के आदेश में कहा गया कि सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा प्रावधानित है कि राज्य के मूल निवासी ही बिहार में आरक्षण का लाभ प्राप्त कर सकते हैं न कि राज्य के बाहर के निवासी। चूकि आवेदिका राज्य के बाहर की निवासी है और सामान्य श्रेणी के तहत आती हैं,  उन्हें बिहार राज्य के अंतर्गत आरक्षण का लाभ देय नहीं होगा। इस परिपेक्ष्य में ही बिहार राज्य के बाहर के महिला अभ्यर्थियों को शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी सफल होने हेतु पांच प्रतिशत का छूट देय नहीं होगा। यानी आवेदिका बिहार राज्य में पात्रता परीक्षा में उत्तीर्ण नहीं मानी जा सकती है। इस तरह निदेशक ने आवेदिका के दावे को अस्वीकृत कर दिया। 

इसके बाद अब हर जगह दूसरे राज्यों की ऐसी महिला शिक्षकों के अनुबंध समाप्त करने की कार्रवाई शुरू हो रही है। इससे दूसरे राज्यों की उन महिला शिक्षिकाओं के लिए स्थिति विकट हो गयी है, जिनके केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी सीटीईटी (CTET) में 60 फीसदी से कम अंक हैं।   

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed