
नई दिल्ली: NEET पेपर लीक मामले और प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शुक्रवार को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन ने छात्र संगठनों और युवाओं से अपने-अपने जिलों में प्रशासन की अनुमति लेकर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने और छात्रों की मांगों को सार्वजनिक रूप से रखने की अपील की है।
इसी बीच केंद्र सरकार और CJP के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। दोनों पक्षों के बीच शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे बैठक प्रस्तावित है। CJP का प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात करेगा। संगठन के प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, यह बैठक नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में होगी।
CJP ने बातचीत से पहले रखीं थीं दो प्रमुख शर्तें
सरकार से बातचीत के लिए CJP ने पहले ही दो अहम शर्तें रखी थीं। पहली, बैठक किसी केंद्रीय मंत्री के सरकारी आवास पर नहीं बल्कि किसी तटस्थ स्थान पर आयोजित की जाए। दूसरी, सरकार केवल मौखिक आश्वासन न दे बल्कि छात्रों की मांगों को पूरा करने की स्पष्ट समयसीमा भी बताए।
CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने कहा कि सरकार न्यूट्रल स्थान पर बातचीत के लिए सहमत हो गई है। उन्होंने बताया कि प्रतिनिधिमंडल अपनी पुरानी मांगों को दोहराएगा, जिनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, पेपर लीक से प्रभावित परिवारों को मुआवजा, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी मामलों को वापस लेना और कथित पुलिस कार्रवाई की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई शामिल है।
प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो के 17 स्टेशन बंद
देशव्यापी प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सुरक्षा कारणों से शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से 17 मेट्रो स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने का निर्णय लिया है।
हालांकि, राजीव चौक, मंडी हाउस और सेंट्रल सेक्रेटेरिएट स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा सामान्य रूप से उपलब्ध रहेगी, जिससे यात्रियों को लाइन बदलने में दिक्कत नहीं होगी। यात्रियों को यात्रा से पहले DMRC की आधिकारिक एडवाइजरी देखने की सलाह दी गई है।
NEET विवाद के बीच सरकार ने किए कई बड़े ऐलान
NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में बढ़ते छात्र आंदोलन के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में कई घोषणाएं की हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने और संसद के मानसून सत्र में पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून लाने की घोषणा की है।
इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय में प्रशासनिक स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री के बयान पर CJP की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केवल फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा पर्याप्त नहीं है। उनके अनुसार, संगठन की सबसे बड़ी मांग परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की है।
उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक छात्रों का भरोसा पूरी तरह बहाल नहीं हो सकता।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर कायम संगठन
CJP ने स्पष्ट किया है कि वह केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग से पीछे नहीं हटेगा। संगठन का कहना है कि पेपर लीक जैसे गंभीर मामलों में केवल सुधारों की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी तय करना भी जरूरी है।
संगठन ने यह भी संकेत दिया है कि यदि बातचीत में ठोस नतीजे नहीं निकलते हैं, तो आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है। वहीं, सरकार और CJP के बीच होने वाली शुक्रवार की बैठक पर छात्रों और शिक्षा जगत की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि इससे आगे की रणनीति और संभावित समाधान की दिशा तय हो सकती है.




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