
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 से जुड़े पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं के विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दिया। पिछले कई सप्ताह से परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर छात्रों, अभिभावकों और विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। ऐसे माहौल में उनके इस्तीफे को परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम माना जा रहा है।
इस्तीफे से पहले शिक्षा मंत्री पर लगातार नैतिक जिम्मेदारी लेने का दबाव बढ़ रहा था। विभिन्न छात्र संगठनों के साथ-साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) भी शुरुआत से ही उनके इस्तीफे की मांग कर रही थी। सरकार और CJP के बीच प्रस्तावित तीसरे दौर की वार्ता से पहले ही धर्मेंद्र प्रधान ने अपना पद छोड़ दिया।
सोशल मीडिया पर साझा किया इस्तीफा पत्र
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना इस्तीफा पत्र साझा करते हुए लिखा कि वे पिछले चार दशकों से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए कार्य करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही देश के भविष्य की सबसे बड़ी आधारशिला है।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वे देश के युवाओं की आकांक्षाओं और उनकी न्यायसंगत अपेक्षाओं का सम्मान करते हैं तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिलने के लिए आभार व्यक्त किया।
NEET पेपर लीक पर क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
अपने पत्र में पूर्व शिक्षा मंत्री ने कहा कि 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद केंद्र सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। मामले की जांच CBI को सौंपी गई, परीक्षा रद्द की गई और दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया गया। साथ ही उन्होंने बताया कि अगले वर्ष से NEET परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने का निर्णय भी लिया गया है।
उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के लिए निष्पक्ष और शांतिपूर्ण री-NEET आयोजित कराना थी, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के साथ जिला प्रशासन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
छात्रों के हितों की रक्षा का किया दावा
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने पहले दिन से इस पूरे मामले की जिम्मेदारी स्वीकार की और कभी इससे पीछे नहीं हटे। उनका कहना था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य परीक्षा माफिया के कारण प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि 16 जुलाई 2026 को घोषित री-NEET परिणाम संतोषजनक रहे और इसमें आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के कई प्रतिभाशाली छात्रों ने सफलता हासिल की।
आखिर क्यों देना पड़ा इस्तीफा?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं माना जा रहा है। पिछले कई सप्ताह से NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों और अभिभावकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा था। परीक्षा की विश्वसनीयता पर उठे सवालों ने सरकार पर राजनीतिक और सार्वजनिक दबाव बढ़ा दिया था।
विरोधी दलों और छात्र संगठनों का आरोप था कि परीक्षा प्रणाली में हुई गंभीर अनियमितताओं को रोकने और छात्रों की चिंताओं का समय पर समाधान करने में सरकार पूरी तरह सफल नहीं रही। इसी पृष्ठभूमि में नैतिक जिम्मेदारी के आधार पर शिक्षा मंत्री ने अपना पद छोड़ दिया।
छात्रों के आंदोलन ने बढ़ाया दबाव
इस पूरे विवाद के दौरान देशभर में कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन हुए। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया और लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई।
20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों ने संसद तक मार्च की योजना बनाई थी। इसके अलावा मुंबई सहित कई अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन हुए, जहां पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प की घटनाएं सामने आईं।
सोनम वांगचुक के अनशन से आंदोलन को मिली नई गति
शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। लगभग 20 दिनों तक चले अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
उनके स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंता ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई। इसके बाद CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने भी अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया, जिससे आंदोलन और तेज हो गया।
इस्तीफे पर सोनम वांगचुक की प्रतिक्रिया
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने लिखा कि यह सड़कों से निकले लोकतंत्र, शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। उन्होंने आंदोलन में शामिल युवाओं और देशभर के नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि अब जवाबदेही के बाद सुधार की दिशा में आगे बढ़ने का समय है।
सरकार अब क्या करेगी?
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रणाली से छेड़छाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।
इसी क्रम में सरकार संसद में ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पेश करने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून में पेपर लीक कराने वाले गिरोहों, परीक्षा केंद्रों और दोषी संस्थानों के खिलाफ कठोर दंड और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।
आगे क्या रहेगा सबसे बड़ा सवाल?
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अब देशभर के लाखों छात्रों की नजरें दो महत्वपूर्ण पहलुओं पर टिकी हैं—पहला, चल रही जांच का अंतिम परिणाम क्या होगा और दूसरा, प्रस्तावित एंटी-पेपर लीक कानून क्या वास्तव में भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाएगा।
NEET विवाद ने केवल एक परीक्षा की पारदर्शिता ही नहीं, बल्कि देश की पूरी सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब सरकार के अगले कदम और जांच एजेंसियों की कार्रवाई यह तय करेगी कि छात्रों का भरोसा कितनी जल्दी दोबारा बहाल हो पाता है।




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