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Dharmendra Pradhan's Tenure: Key Education Reforms, Achievements and Controversies Explained

धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यकाल: बड़े शिक्षा सुधारों से लेकर NEET विवाद तक, जानिए उपलब्धियां और चुनौतियां

Dharmendra Pradhan's Tenure: Key Education Reforms, Achievements and Controversies Explained

देशभर में NEET UG 2026 पेपर लीक विवाद और लगातार बढ़ते राजनीतिक व सामाजिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी उन्होंने पहले दिन से स्वीकार की थी। पिछले एक महीने से अधिक समय से छात्र संगठन और विभिन्न समूह उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। इस आंदोलन को CJP ने प्रमुखता से आगे बढ़ाया, जबकि शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के समर्थन में अनशन किया।

हालांकि, धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल केवल विवादों तक सीमित नहीं रहा। उनके नेतृत्व में शिक्षा क्षेत्र में कई बड़े सुधार लागू हुए, वहीं कुछ नीतियों और राष्ट्रीय परीक्षाओं से जुड़े विवादों ने सरकार को कठघरे में भी खड़ा किया। ऐसे में उनके कार्यकाल को उपलब्धियों और चुनौतियों, दोनों के संदर्भ में देखा जा रहा है।

CUET के जरिए बदली विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET-UG) की शुरुआत रही। इसका उद्देश्य देशभर के केंद्रीय और कई अन्य विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रवेश प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समान बनाना था। पहले अलग-अलग विश्वविद्यालय अपनी अलग प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करते थे, लेकिन CUET लागू होने के बाद छात्रों को एक ही परीक्षा के आधार पर कई संस्थानों में आवेदन करने का अवसर मिला।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन पर रहा जोर

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को लागू करने की दिशा में भी उनके कार्यकाल में कई कदम उठाए गए। नई एनसीईआरटी पुस्तकों की तैयारी, पाठ्यपुस्तकों की छपाई क्षमता में वृद्धि और उनकी कीमतों को कम करने जैसे फैसलों का उद्देश्य छात्रों और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम करना था।

इसी अवधि में मल्टीपल एंट्री-एग्जिट सिस्टम, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC) और चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम (FYUP) जैसे सुधारों को आगे बढ़ाया गया। साथ ही विश्वविद्यालयों में डिजिटल शिक्षा, कौशल आधारित पाठ्यक्रम और लचीली शिक्षा व्यवस्था को बढ़ावा देने के प्रयास किए गए।

विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की मंजूरी

उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से कई विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसरों की स्थापना की अनुमति दी गई। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना गया।

इसके अलावा, उच्च शिक्षा के नियामक ढांचे में बदलाव के लिए ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया गया, जिसमें यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई जैसी संस्थाओं की जगह एकीकृत नियामक व्यवस्था का प्रस्ताव रखा गया।

NEET विवाद बना सबसे बड़ी चुनौती

धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल का सबसे बड़ा विवाद NEET परीक्षा से जुड़ा रहा। वर्ष 2024 में परीक्षा प्रक्रिया और कथित अनियमितताओं को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे।

इसके बाद NEET UG 2026 में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं ने देशभर में छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी। लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर असर पड़ने की आशंका के बीच कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए। इसी विवाद के बाद बढ़ते दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर भी उठे सवाल

उनके कार्यकाल में सीबीएसई ने कक्षा 12 की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली लागू की। हालांकि, शुरुआती चरण में तकनीकी समस्याओं, धुंधली स्कैन कॉपियों और मूल्यांकन में देरी जैसी शिकायतों के कारण इस व्यवस्था की आलोचना भी हुई।

त्रिभाषा नीति को लेकर राजनीतिक विवाद

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रस्तावित त्रिभाषा व्यवस्था को लेकर भी विवाद सामने आया। विशेष रूप से तमिलनाडु और कुछ अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों ने केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगाया। इस मुद्दे पर लंबे समय तक राजनीतिक बहस और विरोध प्रदर्शन होते रहे।

UGC के नए नियमों पर भी हुआ विरोध

उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर और समावेशिता से जुड़े UGC Equity Regulations, 2026 को लेकर भी कई शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने आपत्तियां दर्ज कराईं। इन नियमों पर देशभर में व्यापक बहस देखने को मिली।

उपलब्धियों और विवादों के बीच याद रखा जाएगा कार्यकाल

धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल भारतीय शिक्षा व्यवस्था में बड़े संरचनात्मक बदलावों और कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों के लिए याद किया जाएगा। एक ओर उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, विश्वविद्यालय प्रवेश प्रणाली में सुधार और उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीयकरण जैसे कदमों को आगे बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने उनके पूरे कार्यकाल पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।

अब शिक्षा मंत्रालय के नए नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा दोबारा कायम करना, पारदर्शिता बढ़ाना और शिक्षा सुधारों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना होगी।

 

Asmita Sarkar

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