
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक सुधार प्रक्रिया शुरू कर दी है। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में बदलाव के लिए गठित समिति की 101 सिफारिशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इन सुधारों का उद्देश्य NEET, JEE Main, CUET समेत अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है।
सूत्रों के अनुसार, यह सुधार प्रक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में गठित समिति की सिफारिशों पर आधारित है। समिति की अध्यक्षता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन ने की थी।
NTA में प्रशासनिक बदलाव, भर्ती प्रक्रिया भी शुरू
नई व्यवस्था के तहत NTA की कार्यप्रणाली को मजबूत करने के लिए बड़े प्रशासनिक बदलाव किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एजेंसी के कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और नए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।
सुधारों के तहत परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय की जाएगी। यदि भविष्य में पेपर लीक या परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि शिक्षा मंत्रालय के संबंधित अधिकारियों के साथ-साथ शिक्षा मंत्री के स्तर तक जवाबदेही तय करने का प्रावधान किया गया है।
NEET UG 2027 CBT मोड में कराने की तैयारी
रिपोर्ट के अनुसार, NEET UG 2027 को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के रूप में आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो मेडिकल प्रवेश परीक्षा पहली बार पूरी तरह डिजिटल मोड में आयोजित होगी।
इसके साथ ही परीक्षा केंद्रों का चयन भी बदला जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, परीक्षा केंद्र मुख्य रूप से सरकारी शिक्षण संस्थानों में बनाए जाएंगे, ताकि सुरक्षा और निगरानी को बेहतर बनाया जा सके।
JEE Main की तर्ज पर साल में दो बार हो सकती है NEET UG
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार JEE Main की तरह NEET UG को भी वर्ष में दो बार आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।
प्रस्तावित मॉडल के तहत परीक्षा पांच से छह दिनों तक कई शिफ्टों में कराई जा सकती है। इससे प्रतिदिन लगभग तीन से चार लाख उम्मीदवार परीक्षा दे सकेंगे। वर्तमान में लगभग 23 से 24 लाख अभ्यर्थी एक ही दिन और एक ही शिफ्ट में परीक्षा देते हैं।
हालांकि, उम्मीदवारों को वर्ष में तीन या चार बार परीक्षा देने की अनुमति देने संबंधी प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
सरकारी विशेषज्ञ तैयार करेंगे प्रश्नपत्र
रिपोर्ट के अनुसार, भविष्य में प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी बदली जाएगी। अब प्रश्नपत्र तैयार करने का काम बाहरी विशेषज्ञों को देने के बजाय NTA स्वयं विषय विशेषज्ञों का पैनल तैयार करेगी।
इसके लिए विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों के साथ 13 भारतीय भाषाओं के अनुवादकों की नियुक्ति की जाएगी। सरकारी स्कूलों, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों एवं प्रोफेसरों को प्राथमिकता दिए जाने की योजना है।
इस बदलाव का उद्देश्य प्रश्नपत्र की गोपनीयता को और मजबूत बनाना तथा पेपर लीक की संभावनाओं को कम करना है।
सरकारी संस्थानों में बनेंगे परीक्षा केंद्र
रिपोर्ट के मुताबिक, परीक्षा सुरक्षा बढ़ाने के लिए NTA अपने स्थायी परीक्षा केंद्र विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है।
इन केंद्रों को IIT, IIIT, NIT, केंद्रीय विद्यालय (KV), जवाहर नवोदय विद्यालय, सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और अन्य सरकारी शिक्षण संस्थानों में विकसित करने की योजना है। माना जा रहा है कि इससे परीक्षा संचालन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित होगा।
परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
हाल के वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा प्रबंधन को लेकर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में काम कर रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना, पेपर लीक की घटनाओं को रोकना और लाखों अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत करना है। हालांकि, इनमें से कुछ प्रस्तावों—जैसे NEET UG को वर्ष में दो बार आयोजित करना और CBT मोड लागू करना—पर अंतिम निर्णय और आधिकारिक अधिसूचना जारी होना अभी बाकी है।




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