
PM Modi on Exam Reforms: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार शाम छात्रों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक और तकनीकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। इस टास्क फोर्स का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब हाल के महीनों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं को लेकर देशभर में चिंता और विरोध देखने को मिला। सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई भी जारी रहेगी।
छात्रों के भविष्य को सुरक्षित बनाने पर सरकार का जोर
वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया, वे जेल में हैं और ऐसे मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट भी स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार संसद में ऐसा नया कानून लाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जिसमें पेपर लीक और परीक्षा में धांधली जैसे अपराधों के लिए पहले से अधिक कड़े कानूनी प्रावधान और सख्त दंड का प्रावधान होगा।
नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में काम करेगी टास्क फोर्स
प्रधानमंत्री के अनुसार, नई हाई पावर्ड टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली की मौजूदा चुनौतियों का अध्ययन करेगी और सुधारों पर विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की नीतियां और बदलाव लागू किए जाएंगे।
इस समिति में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें नंदन नीलेकणि, पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। सरकार का मानना है कि तकनीक, सुरक्षा और प्रशासनिक अनुभव का यह संयोजन परीक्षा प्रणाली को अधिक मजबूत बनाने में मदद करेगा।
कौन हैं नंदन नीलेकणि?
नंदन नीलेकणि देश के जाने-माने उद्योगपति और तकनीकी विशेषज्ञ हैं। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और वर्ष 1981 में एन. आर. नारायण मूर्ति तथा अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर इन्फोसिस की स्थापना की।
वे इन्फोसिस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और बाद में गैर-कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे। इसके अलावा उन्हें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के पहले अध्यक्ष के रूप में देश की आधार (Aadhaar) परियोजना का नेतृत्व करने का श्रेय दिया जाता है। सार्वजनिक डिजिटल ढांचे में उनके योगदान के लिए भारत सरकार उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित कर चुकी है। वे शिक्षा और डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म EkStep के भी सह-संस्थापक हैं।
लगातार तीसरे वीडियो में परीक्षा सुधारों पर बोले प्रधानमंत्री
पिछले कुछ दिनों में यह तीसरा अवसर है जब प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक के मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया दी है।
23 जुलाई को जारी अपने पहले वीडियो संदेश में उन्होंने कहा था कि पेपर लीक कोई सामान्य घटना नहीं है, बल्कि यह लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है। उन्होंने बताया था कि सरकार ने कम समय में दोबारा परीक्षा आयोजित कराई और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
इसके बाद 24 जुलाई को जारी दूसरे वीडियो में प्रधानमंत्री ने लोगों से मिले सुझावों और समर्थन के लिए धन्यवाद दिया था। अब तीसरे वीडियो में उन्होंने परीक्षा सुधारों के लिए हाई पावर्ड टास्क फोर्स की घोषणा करते हुए संकेत दिया है कि सरकार केवल दोषियों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि परीक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार भी करेगी।
NEET UG विवाद के बाद तेज हुई सुधारों की प्रक्रिया
यह पूरा घटनाक्रम NEET UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और उससे जुड़े विवाद के बाद सामने आया। इस मामले को लेकर कई छात्र संगठनों और युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए। बढ़ते जनदबाव के बीच केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली की समीक्षा और सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने का फैसला लिया।
सरकार का कहना है कि नई टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और विश्वसनीय बन सकें।




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