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कैसे ‘राष्ट्र विरोधी’ पायल कपाड़िया अब ‘देश की शान’ बन गई !  

पायल कपाड़िया (Payal Kapadia) का नाम इन दिनों सुर्ख़ियों में है। हर तरफ उनके चर्चे हैं। स्वाभाविक है कि 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 (Cannes Film Festival 2024) में ग्रैंड प्रिक्स (Grand Prix) जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। ग्रैंड प्रिक्स जीतने वाली वह पहली भारतीय फिल्म निर्माता हैं। लेकिन एफटीआईआई (FTII) से ग्रेजुएट इस भारतीय फिल्ममेकर पायल कपाड़िया को ही कभी ‘राष्ट्र विरोधी’ तक कहा गया था। यह अलग बात कि उन्हें ऐसा कहने वाले ही आज उनकी सफलता पर उन्हें बधाई दे रहे हैं और इसे देश के लिए गौरव की बात बता रहे हैं। उनके लिए भी पायल कपाड़िया आज देश की शान बन गई हैं। हालांकि ऐसा करने में उन्हें 9 साल लग गए।

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पायल कपाड़िया की उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी है और जमकर उनकी सराहना भी की है। पीएम मोदी ने अपने एक्स हैंडल पर पायल की उपलब्धि को एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए लिखा है- भारत को पायल कपाड़िया पर उनके काम ऑल वी इमेजिन एज लाइट के लिए 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स जीतने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व है। एफटीआईआई की पूर्व छात्रा, उनकी उल्लेखनीय प्रतिभा वैश्विक मंच पर चमकती रहती है, जो भारत में समृद्ध रचनात्मकता की झलक देती है। यह प्रतिष्ठित सम्मान न केवल उनके असाधारण कौशल का सम्मान करता है बल्कि भारतीय फिल्म मेकर्स की नई पीढ़ी को प्रेरित भी करता है।

याद दिला दें कि पायल कपाड़िया साल 2015 से 2018 तक फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) में फिल्म निर्देशन की छात्रा रही हैं। उनके और उनके सहपाठियों ने साल 2015 में अभिनेता से नेता बने गजेंद्र चौहान को एफटीआईआई का अध्यक्ष बनाए जाने पर 139 दिनों तक विरोध-प्रदर्शन किया था। पुणे में FTII के लॉ कॉलेज रोड परिसर में हुआ आंदोलन FTII के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शनों में से एक था। इस आंदोलन के चलते पायल ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई थीं। उन्हें खूब ट्रोल लिया गया था। लानत-मलामतें भेजी गयीं थी। उन्हें इसके लिए ‘पाकिस्तान जाओ’ के नारों का भी सामना करना पड़ा था। आज भी पायल कपाड़िया सहित 35 छात्रों को कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। संस्थान के तत्कालीन निदेशक प्रशांत पथराबे ने इनके खिलाफ मामला दायर कर आरोप लगाया था कि उनके कार्यालय में उन्हें गलत तरीके से बंधक बनाया गया, कार्यालय में तोड़फोड़ की गई।

बहरहाल, वही गजेंद्र चौहान जो तब एफटीआईआई के अध्यक्ष थे और जिन्होंने पायल कपाडिया की जमकर आलोचना की थी, आज उन्हें बधाइयां दे रहे हैं। कह रहे हैं – ‘मैं पायल की उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई देता हूं। लेकिन प्रतिभाशाली और अनुशासित होने में बहुत बड़ा फर्क होता है। प्रतिभाशाली होना बहुत अच्छा है, मगर अनुशासन में रहना बहुत ज़्यादा ज़रूरी है।’ जाहिर है, अनुशासन की बात कहकर वह अपनी झेंप मिटाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कम से कम पायल कपाड़िया को ‘अर्बन नक्सल’, माओवादी और टुकड़े टुकड़े गैंग का सदस्य बताने वाले उन्हें अब बधाई देने को तो मजबूर हो ही गए हैं।     

शायद तभी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा है- मोदी जी, अगर भारत को उन पर गर्व है, तो क्या आपकी सरकार को तुरंत उनके और एफटीआईआई के साथी छात्रों के खिलाफ दर्ज मामले वापस नहीं लेने चाहिए, जो आपकी सरकार द्वारा एक अयोग्य अध्यक्ष की मनमानी नियुक्ति के खिलाफ प्रदर्शन का है।

Asmita Sarkar

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