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Thousands of posts vacant in NCERT and CBSE, reveals parliamentary report; concerns raised about impact on the education system

NCERT और CBSE में हजारों पद खाली, संसद की समिति ने जताई चिंता; शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

Thousands of posts vacant in NCERT and CBSE, reveals parliamentary report; concerns raised about impact on the education system

देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं—राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE)—में बड़ी संख्या में पद खाली होने का मामला सामने आया है। संसद की अनुमान समिति (Estimates Committee) की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों संस्थानों में कर्मचारियों की कमी उनके कामकाज और जिम्मेदारियों के प्रभावी निर्वहन में बाधा बन सकती है।

यह जानकारी ‘देश में किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने से जुड़े बजटीय और नीतिगत पहलुओं’ पर तैयार रिपोर्ट में दी गई है, जिसे हाल ही में लोकसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में शिक्षा मंत्रालय से रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने की सिफारिश की गई है।

NCERT में आधे से अधिक पद खाली

रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक NCERT में स्वीकृत 2,844 पदों के मुकाबले केवल 1,248 कर्मचारी कार्यरत थे। इसका मतलब है कि संस्थान में 1,596 पद रिक्त हैं, जो कुल स्वीकृत पदों के आधे से भी अधिक हैं।

समिति ने बताया कि रिक्त पदों में 145 शैक्षणिक, 131 स्कूल शिक्षण, 916 प्रशासनिक एवं मंत्रालयिक तथा 404 सहायक श्रेणी के पद शामिल हैं। समिति ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि NCERT देश की शिक्षा नीति, पाठ्यचर्या और पाठ्यपुस्तक विकास में केंद्रीय भूमिका निभाता है। ऐसे में बड़ी संख्या में रिक्तियां संस्थान की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।

नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में NCERT की अहम भूमिका

शिक्षा मंत्रालय ने समिति को बताया कि NCERT ने नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर फाउंडेशनल स्टेज (NCFFS) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCFSE) तैयार किया है। नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप इन्हीं ढांचों के आधार पर नए पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों के विकास का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है।

समिति का मानना है कि शिक्षा क्षेत्र में बदलाव लाने और नई शिक्षा नीति को जमीन पर उतारने में NCERT की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए संस्थान में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरना जरूरी है, ताकि पाठ्यक्रम सुधार और शैक्षणिक विकास से जुड़े कार्य प्रभावित न हों।

CBSE में भी 44 प्रतिशत पद रिक्त

रिपोर्ट में CBSE की स्थिति को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। समिति के अनुसार बोर्ड में स्वीकृत 2,117 पदों में से 933 पद खाली हैं, जो कुल पदों का लगभग 44 प्रतिशत है।

सबसे अधिक कमी ग्रुप ‘सी’ श्रेणी के सहायक कर्मचारियों में देखी गई है, जहां 595 पद रिक्त हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्तमान में CBSE अपने कई नियमित कार्यों के संचालन के लिए अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर निर्भर है।

समिति ने चेतावनी दी कि देश के सबसे बड़े स्कूली परीक्षा बोर्ड में स्थायी कर्मचारियों की इतनी बड़ी कमी परीक्षा प्रबंधन, सुरक्षा, गुणवत्ता और संचालन व्यवस्था पर असर डाल सकती है।

संवेदनशील परीक्षा कार्यों में संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता पर सवाल

समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि CBSE को परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए अस्थायी या संविदा कर्मचारियों पर अत्यधिक निर्भरता कम करनी चाहिए। इसके बजाय सभी रिक्त पदों को समयबद्ध तरीके से भरने के लिए फास्ट-ट्रैक भर्ती प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि CBSE एक स्व-वित्तपोषित (Self-Financed) स्वायत्त संस्था है और इसे केंद्र सरकार से अनुदान नहीं मिलता। इसके बावजूद बोर्ड का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

तेजी से बढ़ा CBSE का विस्तार

पिछले तीन दशकों में CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 1992-93 में जहां बोर्ड से जुड़े स्कूलों की संख्या 3,787 थी, वहीं अक्टूबर 2025 तक यह बढ़कर 31,234 पहुंच गई।

बढ़ते दायरे और विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए CBSE अब 25 क्षेत्रीय कार्यालयों और पांच उप-क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से अपने कार्यों का संचालन कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 तक कक्षा 12 के विद्यार्थियों की संख्या 17 लाख से अधिक और कक्षा 10 के विद्यार्थियों की संख्या 23.8 लाख से ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में परीक्षा संचालन, मूल्यांकन और प्रशासनिक कार्यों के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होना आवश्यक है।

शिक्षा व्यवस्था के लिए अहम संकेत

संसदीय समिति की रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब देश नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, पाठ्यक्रम सुधार और डिजिटल शिक्षा के विस्तार पर जोर दे रहा है। NCERT और CBSE जैसी संस्थाएं इन बदलावों की धुरी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन संस्थानों में रिक्त पद लंबे समय तक खाली रहते हैं, तो इसका असर नीति निर्माण, पाठ्यपुस्तक विकास, परीक्षा प्रबंधन और छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।

समिति ने शिक्षा मंत्रालय से आग्रह किया है कि दोनों संस्थाओं में भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जाए और आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, ताकि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयासों को गति मिल सके।

 

 

Asmita Sarkar

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