
Jharkhand Exam Cancellation: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने मंगलवार देर रात आठ अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर 44 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और आउटसोर्स एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाएं शामिल हैं। इन परीक्षाओं में कई महत्वपूर्ण सरकारी पदों की भर्तियां हुई थीं।
सरकार का यह फैसला लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच आया है। इससे पहले कैबिनेट बैठक में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया था। सरकार ने TDPL की ओर से कराई गई परीक्षाओं और उसके द्वारा जारी परिणामों को भी रद्द करने का निर्णय लिया है।
किन परीक्षाओं पर पड़ा असर?
रद्द की गई परीक्षाओं में अलग-अलग विभागों और पदों से जुड़ी भर्तियां शामिल हैं। इनमें ड्रग इंस्पेक्टर, असिस्टेंट प्रोफेसर, डिप्टी कलेक्टर, डेंटल डॉक्टर, असिस्टेंट इंजीनियर, सिविल जज, एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर जैसे पदों की भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं।
इसके अलावा सरकारी पॉलीटेक्निक में व्याख्याता, वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी और सहायक वन संरक्षक जैसे पदों से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाएं भी फैसले के दायरे में आई हैं। JPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर भी इन पदों की भर्ती प्रक्रियाओं के रिकॉर्ड उपलब्ध रहे हैं, जिनमें ड्रग इंस्पेक्टर, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सिविल जज, असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और अन्य पद शामिल हैं।
सरकार के इस कदम का असर केवल परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। जिन परीक्षाओं के आधार पर चयन और नियुक्तियां हुई हैं, उनके भविष्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर JSSC-CGL के सफल अभ्यर्थियों के सामने नौकरी को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 चयनित अभ्यर्थी इस फैसले से प्रभावित हो सकते हैं।
2014 से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं की भी होगी जांच
सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच का दायरा पुरानी परीक्षाओं तक बढ़ाया है। कैबिनेट के फैसले के मुताबिक TDPL की ओर से 2014 से कराई गई परीक्षाओं को जांच और कार्रवाई के दायरे में लाया गया है। इसी क्रम में JPSC और JSSC से जुड़ी पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की जा रही है।
इस फैसले का मकसद केवल मौजूदा विवाद को खत्म करना नहीं, बल्कि भर्ती परीक्षाओं की पूरी व्यवस्था में सुधार करना बताया गया है। सरकार ने परीक्षा संचालन, परिणाम जारी करने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया है।
JPSC-JSSC में सुधार के लिए बनेगी समिति
सरकार ने JPSC और JSSC की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता वाली यह समिति दोनों आयोगों में सुधार से जुड़े सुझाव देगी और अपनी रिपोर्ट दो महीने के भीतर सरकार को सौंपेगी।
इसके साथ ही दोनों आयोगों में आंतरिक सतर्कता प्रकोष्ठ बनाने का भी प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनियमितता पर नजर रखना और शिकायतों की समय पर जांच सुनिश्चित करना है।
अनियमितताओं से जुड़े मामलों के लिए त्वरित न्यायालय का प्रस्ताव
सरकार ने JPSC और JSSC में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए झारखंड हाईकोर्ट से त्वरित न्यायालय गठित करने का अनुरोध करने की बात भी कही है। इससे ऐसे मामलों की सुनवाई जल्द पूरी कराने की कोशिश की जाएगी।
सरकार के फैसलों से साफ है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद को केवल कुछ परीक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय पूरी भर्ती व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। हालांकि, जिन अभ्यर्थियों ने पहले ही परीक्षा पास कर नौकरी हासिल की है, उनके लिए इस फैसले का अंतिम असर क्या होगा, यह आगे की जांच और सरकार के अगले निर्णयों पर निर्भर करेगा।
24 दिन के आंदोलन के बाद बड़ा फैसला
JSSC-CGL और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का आंदोलन करीब 24 दिनों तक चला। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में JSSC-CGL को रद्द करना और भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की जांच शामिल थी। सरकार के फैसले के बाद आंदोलन से जुड़े कुछ नेताओं ने इसे बड़ी जीत बताया, हालांकि छात्रों की ओर से अन्य मांगें भी उठाई जा रही हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए आगे क्या व्यवस्था होगी और दोबारा परीक्षा कब कराई जाएगी। साथ ही, जिन उम्मीदवारों का पहले ही चयन हो चुका है, उनके मामले में सरकार क्या फैसला लेगी, इस पर भी हजारों अभ्यर्थियों की नजर है।
फिलहाल सरकार की ओर से JPSC-JSSC में सुधार, पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। आने वाले दिनों में समिति की रिपोर्ट और संबंधित अधिसूचनाओं से इस पूरे मामले की आगे की तस्वीर स्पष्ट होने की उम्मीद है।




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