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उर्दू मीडियम की छात्रा अमीना आरिफ ने मेडिकल की नीट परीक्षा में किया टॉप, लाये 720 में से 720 अंक

कहते हैं- जोश, जज्बा और जुनून हो तो इंसान हर मैदान फतह कर सकता है। समर्पित सोच और मेहनत राह में आने वाली हर उस रुकावट को दूर कर देती है जो लक्ष्य के आड़े आए। कुछ ऐसी ही कहानी है अमीना आरिफ कदिवाला की। मुंबई के एक साधारण पृष्ठभूमि वाले परिवार से ताल्लुक रखने वाली अमीना आरिफ कदिवाला (Amina Arif Kadiwala) की। अमीना ने मेडिकल की नीट 2024 परीक्षा (NEET UG 2024) में पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर लोगों को चौंका दिया है। इसलिए कि वह न सिर्फ एक साधारण परिवार से हैं, जहां अक्सर पढ़ने के लिए सुविधाएं कम संकट ज्यादा होते हैं बल्कि इसलिए भी उनकी पढ़ाई एक उर्दू मीडियम स्कूल से हुई है। जी हां, उर्दू मीडियम स्कूल से पढ़ाई करने वाली अमीना आरिफ कदिवाला नीट यूजी परीक्षा 2024 की टॉपर हैं। आॅल इंडिया रैंकिंग-1 के साथ वह आशा और प्रेरणा की किरण के रूप में आज दुनिया के सामने हैं और यह साबित कर रही हैं कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। 
          
मुंबई के जोगेश्वरी सिथत उर्दू विद्यालय मदनी हाई स्कूल में पढ़ीं अमीना आरिफ कड़ीवाला की उपलब्धि इस नाते भी जेरेगौर है कि उन्होंने नीट परीक्षा में 720 में से 720 अंक हासिल किये हैं। यानी जितने नंबरों की परीक्षा हुई, उसने पूरे अंक प्राप्त कर इस प्रतिष्ठित इम्तहान में टॉप किया। एसएससी पूरी करने के बाद अमीना ने जोगेश्वरी में एक्सीलेंट मास्टर एकेडमी में दाखिला लिया था, जहां से वे नीट परीक्षा की तैयारी कर रही थीं। यह कोई बड़ा और बुलंद संस्थान नहीं था लेकिन अमीना के हौसले बुलंद थे। उसे अपनी मेहनत पर यकीन था। इसी की बदौलत  उसने अपने असाधारण समर्पण के सहारे यह कामयाबी हासिल कर ली, जिस पर हर किसी को गर्व होगा। स्वाभाविक है कि जिस स्तर की यह परीक्षा होती है और जिसके लिए गंभीर किस्म की तैयारियों की दरकार होती है, अमीना ने उसमें अपना सब कुछ झोंक दिया होगा। तभी पूरे भारत में लगभग 25 लाख छात्रों को पछाड़कर उसने शीर्ष पर अपना स्थान सुरक्षित करने में सफलता पाई।

उर्दू माध्यम के एक स्कूल की पृष्ठभूमि से प्रतिष्ठित नीट यूजी परीक्षा 2024 के शिखर तक पहुंचने में अमीना के समर्पण, कड़ी मेहनत और उसकी दृढ़ता का ही योगदान है। उसने इस सफर में कई चुनौतियों का सामना किया, लेकिन सर्वश्रेष्ठ की अपनी खोज में दृढ़ रहीं। उनकी उपलब्धि से न केवल उनका परिवार और स्कूल के लोग गौरवान्वित होंगे, बल्कि उसके जैसी पृष्ठभूमि वाले अनगिनत दूसरे छात्रों के लिए भी वह प्रेरणा का स्रोत हैं।

अमीना ने जिस मदनी हाई स्कूल से पढ़ाई की, उसने भी नि:संदेह अमीना की प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भले ही वह उर्दू माध्यम का एक स्कूल है, लेकिन अपने क्षेत्र में वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की अपनी प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। स्कूल के अच्छे वातावरण और समर्पित शिक्षकों के कारण अमीना को अपनी पढ़ाई के दौरान आवश्यक मार्गदर्शन और संसाधन हासिल हुए। और उसने अब जाकर उसे इस सफर में उत्कृष्टता के ऊंचे पायदान पर स्थापित कर दिया। अमीना की उपलब्धि सभी भाषाई और सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि के छात्रों को समान शैक्षिक अवसर प्रदान करने के महत्व को भी रेखांकित करती है। 

बहरहाल, शुरू से ही एमबीबीएस यानी डॉक्टरी की पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाली अमीना आरिफ कदिवाला ने उर्दू में कक्षा 10 तक की पढ़ाई के बाद एसवीकेएम के मीठीबाई कॉलेज में भी दाखिला लिया था। यहां उन्हें पहली बार अपने सपने के सामने आने वाली चुनौतियों का आभास हुआ। धीमी लेखन गति उनकी एक चुनौती बनी। परीक्षाएं अक्सर वह समय पर पूरी नहीं कर पाती थीं। उन्होंने इससे जंग जीती। उनकी अंग्रेजी कमजोर थी, और आगे का सफर उसे इसी के सहारे ही चलना था। लिहाजा, धीरे-धीरे उन्होंने यह भाषा सीखी और फिर मेडिकल की परीक्षा की तैयारियों में भी जुटीं। दो नावों पर सवारी को अक्सर खतरनाक माना जाता है, लेकिन उसके पास कोई चारा न था। उसने हर जाखिम उठाया। मॉक पेपर का अभ्यास और हर दिन अध्ययन करने से उन्हें बेहतर बनने में मदद मिली। अंतत: नीट परीक्षा के टॉपर के रूप में उन्हें इसका परिणाम भी मिला। 

अमीना की सफलता की कहानी अब जब सबके सामने आई है तो उसकी व्यापक प्रशंसा भी हो रही है। नीट की सफलता में उनके असाधारण प्रदर्शन ने देश के सर्वश्रेष्ठ मेडिकल कॉलेजों के दरवाजे उनके लिए खोल दिए हैं। वह यहां दाखिल होकर चिकित्सा जगत में एक आशाजनक और आकर्षक करियर की राह पर उतर सकती हैं। लेकिन इस नई यात्रा पर निकलते हुए भी अमीना आगे अपनी कड़ी मेहनत को लेकर दृढ़ संकल्पित हैं। अमीना की इच्छा एम्स दिल्ली में अपनी चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने की है। वह चाहती हैं कि स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी वह सकारात्मक कुछ योगदान कर सकें। उम्मीद भी है कि वह अपने मकसद में कामयाब होंगी। वैसे ही,जैसा अब तक उनके साथ हुआ है। उन्हें अपनी उपलब्धि पर हर्ष है, कहती हैं- ‘मैं अभिभूत हूं, बहुत खुशं। मेरी कड़ी मेहनत का फल मिला है।’ 

Asmita Sarkar

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