
हेल्थ केयर सेक्टर में पूर्वोत्तर राज्य मेघालय लगातार अपनी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज कर रहा है। इसी कड़ी में इन दिनों राज्य की 27 नर्सें जापान की अपनी पेशेवर यात्रा पर जाने की तैयारी कर रही हैं। मेघालय के हेल्थ केयर प्रोफेशनल्स की विश्व में बढ़ती उपयोगिता का यह साक्षात् प्रमाण है। इन नर्सों ने अपना जापानी भाषा प्रशिक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है जो जापान की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली से जुड़ने की प्राथमिक आवश्यकता है। इसके बाद वे जल्द ही जापान की अपनी यात्रा पर रवाना हो जाएंगी। वहां इन्हें विभिन्न अस्पतालों और केयर होम्स में अपनी सेवा देने का अवसर मिलेगा।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा इस प्रगति पर कहते हैं, ‘एक वर्ष के बाद, हमने जो प्रयास किए वे सफल हो रहे हैं। हमारी 27 नर्सों को जापान में और 18 को सिंगापुर में प्लेसमेंट मिला है। सभी नर्सों को बेंगलुरु में भाषा प्रशिक्षण दिया जा चुका है और वे उन देशों के सांस्कृतिक आयाम से भी परिचित हो चुकी हैं। अगला पड़ाव उनका जापान और सिंगापुर है।’ हालांकि इससे पहले भी कुछ नर्सों को वीजा मिल चुका है और वे जापान की यात्रा पर जा चुकी हैं।
गौरतलब है कि मेघालय सरकार कौशल विकास कार्यक्रम के तहत मेघालय राज्य कौशल विकास सोसाइटी (MSSDS) के माध्यम से इन नर्सों को 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करके इस दिशा में उनका सहयोग कर रही है। इस पहल का मकसद है अपने स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों की करियर की संभावनाओं को बढ़ाना। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा देने का प्रयास और इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध नज़र आती है। इस पहल का दीर्घकालिक महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण है, जिसका लक्ष्य आने वाले वर्षों में जापान में 300 नर्सों को तैनात करना है। इस कदम से न केवल मेघालय के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को भी मजबूती मिलेगी।
NAVIS में पंजीकृत 27 नर्सों ने पहले ही बेंगलुरु में व्यापक भाषा प्रशिक्षण और सांस्कृतिक दीक्षा प्राप्त कर ली है। उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई है, उनमें से 25 ने अपने पहले प्रयास में ही N4 और N5 भाषा प्रवीणता परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। इस उपलब्धि ने उन्हें जापान की स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान किये हैं। अब तक, पाँच नर्सों को उनके वीज़ा मिल चुके हैं, और दो 27 मई, 2024 को जापान के लिए रवाना हो चुकी हैं। शेष वीज़ा प्रक्रियाधीन हैं, जिसके पूरा होने के पश्चात उनके शीघ्र प्रस्थान का मार्ग प्रशस्त होगा।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा कहते हैं, ‘प्रशिक्षण कार्यक्रम बहुत अच्छे से चल रहा है और हमें उम्मीद है कि आने वाले महीनों और वर्षों में हमारी कई कुशल जनशक्ति को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में काम करने का अवसर दिया जाएगा।’ जो नर्सें काम के लिए विदेश जाने वाले पहले बैच का हिस्सा हैं, उनका कहना है कि यह कौशल और संस्कृतियों का आदान-प्रदान है। मेघालय की एक नर्स ने कहा, ‘शुरुआत में एक नई भाषा का अध्ययन करना बहुत कठिन था लेकिन शिक्षकों की मदद से हम जापानी भाषा सीखने, समझने और लिखने में सक्षम हैं ’
बहरहाल, यह पहल केवल जापान तक ही सीमित नहीं है। मेघालय की चौदह अतिरिक्त नर्सों ने सिंगापुर में विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में प्लेसमेंट प्राप्त किया है और अगले तीन महीनों के भीतर अपनी भूमिकाएँ शुरू करने वाली हैं। यह मेघालय के कुशल स्वास्थ्य पेशेवरों की वैश्विक माँग और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर राज्य की बढ़ती प्रतिष्ठा पर और ज़ोर देता है।
इन नर्सों की यात्रा सिर्फ़ करियर में उन्नति से कहीं बढ़कर है। यह भारत और जापान के बीच स्वास्थ्य सेवा संबंधों को मज़बूत करने का प्रतीक है, जो सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पेशेवर विकास के लिए एक अवसर प्रदान करता है। यह पहल नर्सों, उनके परिवारों और मेघालय और उनके मेज़बान देशों दोनों में व्यापक स्वास्थ्य सेवा समुदायों को महत्वपूर्ण लाभ पहुँचाने के लिए तैयार है।




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