
नीट यूजी रिजल्ट पर बढ़ते विवाद के बाच एनटीए ने आज प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया। इसमें नीट यूजी रिजल्ट में गड़बड़ी से जुड़े आरोपो पर सफाई दी गई। एनटीए की तरफ से कहा गया कि इस मामले में एक कमेटी बनाई गई है, जो नीट के मामले की जांच करेगी। समिति एक हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। उसके बाद फैसला लिया जाएगा। जिन सेंटर्स पर गड़बड़ी हुई, उनपर एक्शन होगा।
हालांकि एनटीए महानिदेशक सुबोध कुमार सिंह ने साथ ही यह भी कहा कि गड़बड़ी का जो मामला बताया जा रहा है, वो सिर्फ 6 सेंटर्स और 1600 उम्मीदवारों तक सीमित है। उन्होंने कहा, ‘ देशभर में 4750 सेंटर पर नीट यूजी एग्जाम हुआ था। सिर्फ 6 सेंटर पर दिक्कत आई है। यूपीएससी के पूर्व अध्यक्ष और अन्य शिक्षाविदों को मिलाकर कमेटी बनाई गई है, जो नीट के मामले की जांच करेगी। जो सिफारिशें आएंगी, उसपर निर्णय लिया जाएगा। जिन सेंटर्स पर गड़बड़ी हुई, उनपर एक्शन होगा।
एनटीए महानिदेशक ने बताया कि छह केंद्रों के लगभग 1,600 अभ्यर्थियों को गलत प्रश्नपत्र वितरित किए गए और दो से तीन अभ्यर्थियों को ओएमआर फटा हुआ मिला, जिसके कारण उन्हें परीक्षा देने के लिए कम समय मिला। हमारा निर्देश है कि अगर परीक्षा देर से शुरू होती है तो अभ्यर्थियों को पूरा समय दिया जाए, जो कि ज्यादातर केंद्रों पर हुआ है, लेकिन कुछ केंद्रों पर परीक्षा इस तरह आयोजित की गई कि उन्हें (छात्रों को) पर्याप्त समय मिल सके।
संबंधित अभ्यर्थी ने माननीय उच्च न्यायालय में जाकर पुन: परीक्षा अथवा प्रतिपूरक अंक दिलाने का अनुरोध किया। हमने एचसी को जवाब दिया कि हमने समय के नुकसान के मुद्दे को देखने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है जिसने सिफारिश की है कि उन्हें (छात्रों को) समय के नुकसान के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए।
वहीं नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) नई दिल्ली कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में शिक्षा सचिव ने कहा कि एक्सपर्ट कमेटी बनाकर मामले की समीक्षा की गयी थी। फिर से एक नई अपर लेवल कमेटी बनाई गई है, जो पहले की कमेटी (ग्रीवांस रीड्रेसल कमेटी) की रिपोर्ट की समीक्षा करेगी। समिति एक हफ्ते के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।
शिक्षा सचिव ने कहा कि ‘1563 उम्मीदवारों को नीट में ग्रेस मार्क्स मिले। इनमें से 790 उम्मीदवार ग्रेस मार्क्स से क्वालिफाई हुए हैं। बाकी सभी के मार्क्स या तो निगेटिव में ही रहे या वो पास नहीं हो सके। ओवरऑल पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। ग्रेस मार्क्स अलग-अलग होता है।’ एक सेंटर से 6 टॉपर वाले सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘उस सेंटर का एवरेज मार्क्स 235 था। यानी वहां इतने कैपेबल छात्र थे, जो हाई स्कोर कर सकते थे, इसीलिए बिना ग्रेस मार्क्स भी उनका एवरेज मार्क्स ज्यादा था।’




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