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वैज्ञानिकों ने बनाया चावल के दाने जितना छोटा पेसमेकर, बिना सर्जरी के शरीर में हो जाएगा फिट

दिल की बीमारियाँ दुनियाभर में गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनी हुई हैं। कोविड-19 महामारी के बाद हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे यह चिंता और भी गहरी हो गई है। हालांकि, मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हो रहे नवाचार उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आ रहे हैं।

इसी कड़ी में नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ऐसा अनोखा और अतिसूक्ष्म पेसमेकर विकसित किया है, जो आकार में एक चावल के दाने जितना छोटा है और इसे सिरिंज के जरिए शरीर में आसानी से इंजेक्ट किया जा सकता है—बिना किसी सर्जरी या चीर-फाड़ के। यह न केवल नवाचार की मिसाल है, बल्कि हृदय रोगियों के इलाज में भी एक क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला उपकरण साबित हो सकता है।

क्या है पेसमेकर और क्यों होता है जरूरी?
पेसमेकर एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होता है, जिसे दिल की अनियमित धड़कनों (एरिथमिया) को नियंत्रित करने के लिए शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। जब दिल बहुत धीरे या बहुत तेज धड़कता है, तब पेसमेकर उसे नियंत्रित करता है और हृदय को सामान्य गति में लाता है।

अब तक के पारंपरिक पेसमेकर को जनरल एनेस्थीसिया के साथ सर्जरी के माध्यम से शरीर में फिट किया जाता रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में लीडलेस पेसमेकर जैसी तकनीकें आई हैं जो कैथेटर से सीधे हृदय में डाली जाती हैं। लेकिन नया नवाचार इन सभी विधियों से आगे है।

नया पेसमेकर: तकनीक में क्रांति
सिरिंज से प्रत्यारोपण: इस नए पेसमेकर को शरीर में इंजेक्शन के माध्यम से डाला जा सकता है।
बायोडिग्रेडेबल डिवाइस: इसका उपयोग अस्थायी रूप से किया जाता है और जब इसकी आवश्यकता समाप्त हो जाती है तो यह शरीर में घुलकर खुद से नष्ट हो जाता है, यानी इसे हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती।
बायोकम्पैटिबल मटेरियल: इसके सभी हिस्से शरीर के लिए सुरक्षित हैं और किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं करते।
छाती पर वायरलेस कंट्रोलर: एक छोटा सा वायरलेस डिवाइस छाती पर लगाया जाता है, जो दिल की धड़कनों पर नजर रखता है और अनियमितता महसूस होते ही पेसमेकर को एक्टिव कर देता है।

नवजातों के लिए वरदान
अध्ययन के अनुसार यह डिवाइस हर आकार के दिल के लिए उपयुक्त है—चाहे वह नवजात शिशु का नाजुक दिल ही क्यों न हो। लगभग 1% बच्चे जन्मजात हृदय दोष के साथ पैदा होते हैं, जिनमें से कई को सर्जरी के बाद केवल 7 दिन की अस्थायी पेसिंग की आवश्यकता होती है। यह छोटा पेसमेकर उनके लिए जीवनदायी साबित हो सकता है क्योंकि उन्हें बार-बार सर्जरी से नहीं गुजरना पड़ेगा।

वैज्ञानिकों की राय
मैककॉर्मिक स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग, अमेरिका के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. इगर इफिमोब कहते हैं, “यह तकनीक उन नवजात शिशुओं के लिए बेहद मददगार होगी जिन्हें जन्म के तुरंत बाद अस्थायी हृदय सहायता की जरूरत होती है।”

भविष्य की ओर एक कदम
नेचर जर्नल में प्रकाशित इस शोध को चिकित्सा विज्ञान में भविष्य की तकनीक के रूप में देखा जा रहा है। एक ऐसा समय अब बहुत दूर नहीं जब जटिल हृदय रोगों का इलाज, दर्दरहित और बेहद सहज प्रक्रिया बन जाएगा।

हृदय रोगों के इलाज में यह नया, छोटा लेकिन शक्तिशाली पेसमेकर एक बड़ी उम्मीद है। न केवल यह इलाज को सरल बनाएगा, बल्कि जीवन रक्षक होने के साथ-साथ रोगियों के जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर बनाएगा।

Asmita Sarkar

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