
कैंसर दुनियाभर में मौत का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 में करीब 9.7 मिलियन (97 लाख) लोगों की मौत कैंसर के कारण हुई, यानी हर छह में से एक मौत के लिए कैंसर जिम्मेदार रहा। पुरुषों में प्रोस्टेट और लंग कैंसर, जबकि महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर सबसे ज्यादा पाए गए हैं।
हाल ही में हुए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्किन कैंसर के तेजी से बढ़ते मामलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। खासकर अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य पश्चिमी देशों में इसकी दर लगातार बढ़ रही है। अध्ययन में यह चेतावनी दी गई है कि अत्यधिक धूप के संपर्क में आना स्किन कैंसर, विशेष रूप से मेलेनोमा का जोखिम दोगुना कर सकता है, जो त्वचा कैंसर का सबसे घातक प्रकार माना जाता है।
युवा वर्ग सबसे अधिक प्रभावित
शोध में 18 से 32 वर्ष के युवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। करीब 65% मामलों में पाया गया कि लंबे समय तक धूप में रहने से स्किन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। यूके में किए गए एक सर्वेक्षण में यह भी सामने आया कि एक-तिहाई से अधिक लोग गर्मियों में नियमित रूप से सनस्क्रीन का उपयोग नहीं करते, जिससे UV किरणों का त्वचा पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
भारत में खतरा कितना?
हालांकि भारत में स्किन कैंसर के मामले अभी पश्चिमी देशों की तुलना में कम हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे नजरअंदाज करने की सलाह नहीं देते। ब्रेनवेयर यूनिवर्सिटी, पश्चिम बंगाल द्वारा किए गए अध्ययन में पाया गया कि भारत में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) के मामले अपेक्षाकृत अधिक हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) अधिक आम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खेती या बाहरी कार्य करने वाले लोगों में स्किन कैंसर का जोखिम अधिक होता है। लंबे समय तक धूप के संपर्क में रहने से SCC जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं। अध्ययन में यह भी बताया गया कि महिलाओं में SCC के मामले पुरुषों की तुलना में अधिक रिपोर्ट किए गए हैं।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भले ही भारत में स्किन कैंसर के मामले कम हों, लेकिन सावधानी जरूरी है, खासकर उनके लिए जो धूप में अधिक समय बिताते हैं।
– धूप में निकलते समय सनस्क्रीन का उपयोग करें।
– बाहरी गतिविधियों के दौरान टोपी या सुरक्षात्मक कपड़े पहनें।
– विटामिन-डी और एंटीऑक्सीडेंट्स युक्त आहार से त्वचा की रक्षा क्षमता बढ़ाई जा सकती है।
– कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि विटामिन-डी सप्लीमेंट्स का सेवन भी सुरक्षात्मक प्रभाव डाल सकता है (डॉक्टर की सलाह से)।
स्किन कैंसर के प्रकार
त्वचा कैंसर तब होता है जब त्वचा की कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। यह स्थिति अन्य अंगों तक भी फैल सकती है। इसके तीन प्रमुख प्रकार होते हैं:
मेलेनोमा – सबसे खतरनाक प्रकार, जो मेलानोसाइट्स (त्वचा को रंग देने वाली कोशिकाएं) से उत्पन्न होता है।
स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (SCC) – आमतौर पर लंबे समय तक धूप में रहने वालों में होता है।
बेसल सेल कार्सिनोमा (BCC) – त्वचा कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार, पर कम घातक।
स्किन कैंसर की रोकथाम पूरी तरह संभव है, यदि समय रहते सावधानी बरती जाए। बढ़ते ग्लोबल तापमान और UV विकिरण के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, सूर्य की किरणों से सुरक्षा अब एक स्वास्थ्य जरूरत बन गई है, खासकर युवाओं और बाहरी काम करने वालों के लिए।




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