
भारत में हाल के वर्षों में संक्रामक बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिनमें सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में केरल सबसे ऊपर है। हाल के महीनों में यहाँ ब्रेन ईटिंग अमीबा संक्रमण बड़ा खतरा बनकर सामने आया है। विशेष रूप से कोझिकोड और आसपास के जिलों में यह बीमारी तेजी से फैल रही है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में एक और मरीज की मौत हो गई। मृतक की पहचान मलप्पुरम जिले के शाजी (47) के रूप में हुई है। इसके साथ ही, अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (ब्रेन ईटिंग अमीबा) से केरल में अब तक 6 लोगों की जान जा चुकी है।
जुलाई से लगातार बढ़ रहे हैं मामले
मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि शाजी को 9 अगस्त को भर्ती कराया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर गुरुवार सुबह उनकी मृत्यु हो गई। फिलहाल यह जांच जारी है कि उन्हें संक्रमण किस तरह हुआ।
इससे पहले सोमवार को मलप्पुरम की 54 वर्षीय महिला की भी इसी संक्रमण से मौत हुई थी। वर्तमान में कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में 10 मरीजों का इलाज चल रहा है।
संक्रमण के तेजी से फैलने के चलते राज्य सरकार ने उत्तरी जिलों में कुओं और तालाबों के क्लोरीनीकरण सहित सफाई अभियानों को तेज कर दिया है। साथ ही आम लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।
बच्चों और वयस्कों पर समान खतरा
16 अगस्त को कोझिकोड जिले में 9 वर्षीय बच्ची की भी इस संक्रमण से मौत हो गई थी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह एक घातक बीमारी है जिसकी मृत्युदर काफी अधिक होती है। पिछले साल भी केरल के कई जिलों में इसके मामले सामने आए थे।
क्या है अमीबिक इंसेफेलाइटिस?
अमीबिक इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क का एक दुर्लभ और घातक संक्रमण है, जो नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा से होता है। यह अमीबा मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे गंभीर सूजन और अक्सर मृत्यु हो जाती है।
संक्रमण का खतरा विशेष रूप से उन लोगों में अधिक होता है जो दूषित पानी में तैरते या गोते लगाते हैं। जब ऐसा पानी नाक के जरिए शरीर में प्रवेश करता है, तो संक्रमण फैल सकता है।
शुरुआती लक्षण
– फ्लू जैसे लक्षण
– तेज सिरदर्द
– बुखार
– मतली और उल्टी
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लक्षण दिखते ही तत्काल चिकित्सा लेनी चाहिए क्योंकि यह संक्रमण तेजी से जानलेवा रूप ले लेता है।




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