
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन को ध्यान में रखते हुए मेडवेज हेल्थ फाउंडेशन ने दिल्ली में ‘हेल्थकेयर होराइजन 2.0’ सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें देशभर से आए डॉक्टरों, पॉलिसी मेकर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स ने प्रिवेंटिव हेल्थकेयर, महिलाओं को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित करने और किफायती स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की।
एचपीवी वैक्सीन और शुरुआती जांच पर जोर
सम्मेलन के पहले सत्र में विशेषज्ञों ने एचपीवी वैक्सीन और शुरुआती जांच को कैंसर रोकथाम में अहम बताया।
डॉ. सुदर्शन डे (यथार्थ सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल) ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर को वैक्सीन की मदद से रोका जा सकता है।
डॉ. अनिल कुमार धर (मारेंगो एशिया हॉस्पिटल्स) ने CAR T-Cell थेरेपी में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला।
डॉ. राकेश कुमार (वीएमएमसी एवं सफदरजंग हॉस्पिटल) ने कहा कि सही लाइफस्टाइल और समय पर रोकथाम से कैंसर पर जीत संभव है।
सस्ती जांच और मानसिक स्वास्थ्य
सम्मेलन में किफायती स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता पर भी गहन चर्चा हुई।
डॉ. चंद्रिका कंबम (ईवन हेल्थकेयर) ने ओपीडी इंश्योरेंस को जांच सस्ती बनाने का कारगर उपाय बताया।
डॉ. रश्मि श्रिया (MASSH हॉस्पिटल) ने महिलाओं से एचपीवी टेस्ट और टीकाकरण करवाने की अपील की।
दूसरे सत्र में विशेषज्ञों ने वर्कप्लेस मेंटल हेल्थ, सस्ते इंश्योरेंस प्लान और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अनिवार्य बताया। उनका मानना था कि केवल अस्पताल और डॉक्टर ही नहीं, बल्कि मानव संसाधन, सीएसआर पहल और नीतिगत सुधार भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। इस सत्र में डॉ. रोहित गर्ग (माइंड वृक्ष), वंदना कामरा (न्यू इंडिया एश्योरेंस), जय प्रकाश (एवेनिर हेल्थ), जयमालिनी रामरत्नम (आईडीपी एजुकेशन), समारा महिंद्रा (करियर) और अमित लखोटिया (आर1 आरसीएम) ने अपने विचार रखे।
युवाओं के लिए जागरूकता अभियान
कार्यक्रम के दौरान ‘बनेगी रील, बचेगी जान’ नामक विशेष कैंपेन भी लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य युवाओं को सोशल मीडिया के जरिए कैंसर जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित करना है।
विशेषज्ञों ने निष्कर्ष में कहा कि ‘विकसित भारत’ का सपना तभी साकार होगा जब देश में रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं और वर्कप्लेस वेलनेस को प्राथमिकता दी जाएगी।




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