
भारत में फार्मेसी शिक्षा को अधिक आधुनिक, प्रैक्टिकल और रोजगार केंद्रित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया यानी Pharmacy Council of India (PCI) ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से संशोधित बी फार्म (B.Pharm) पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
नए सिलेबस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लिनिकल फार्मेसी, स्किल बेस्ड एजुकेशन और अस्पताल आधारित प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें इंडस्ट्री और हेल्थकेयर सेक्टर की वास्तविक जरूरतों के अनुसार तैयार करना है।
AI आधारित फार्मेसी शिक्षा पर बढ़ा जोर
PCI की शिक्षा विनियमन समिति से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, नया B.Pharm पाठ्यक्रम तेजी से बदलती फार्मा इंडस्ट्री और हेल्थकेयर सेक्टर की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
अब छात्रों को फार्मेसी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल और उसके व्यावहारिक उपयोग के बारे में पढ़ाया जाएगा। दवा अनुसंधान, डेटा विश्लेषण, मरीजों की निगरानी और हेल्थकेयर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में AI की बढ़ती भूमिका को देखते हुए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में फार्मा और हेल्थ सेक्टर में AI आधारित तकनीकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा। ऐसे में छात्रों को नई तकनीकों से परिचित कराना जरूरी हो गया था।
इंडस्ट्री और शिक्षा के बीच की दूरी होगी कम
PCI का कहना है कि नया पाठ्यक्रम इस तरह डिजाइन किया गया है जिससे शिक्षा और उद्योग के बीच मौजूद अंतर को कम किया जा सके।
कई बार छात्रों के पास थ्योरिटिकल नॉलेज तो होती है, लेकिन इंडस्ट्री की जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक अनुभव की कमी रहती है। नए सिलेबस में रोजगार क्षमता बढ़ाने वाले विषयों और प्रोफेशनल स्किल्स को शामिल किया गया है ताकि छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के लिए बेहतर तरीके से तैयार हों।
छात्रों को मिलेंगे ज्यादा विकल्प
संशोधित बी फार्म (B.Pharm) पाठ्यक्रम में छात्रों के लिए कई नए वैकल्पिक विषय भी जोड़े गए हैं। छात्र अपनी रुचि और करियर लक्ष्य के अनुसार विषय चुन सकेंगे।
इसके साथ ही फार्मेसी कॉलेजों को भी यह अनुमति दी गई है कि वे PCI की मंजूरी के बाद अपने छात्रों के लिए विशेष कोर्स या अतिरिक्त विषय शुरू कर सकें। इससे संस्थानों को स्थानीय और उद्योग आधारित जरूरतों के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी।
हॉस्पिटल और इंडस्ट्री ट्रेनिंग होगी जरूरी
नए सिलेबस की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब व्यावहारिक प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है। छात्रों को अस्पतालों और फार्मा इंडस्ट्री में ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि उन्हें वास्तविक कार्य वातावरण का अनुभव मिल सके।
इस बदलाव से छात्रों को मरीजों से जुड़ी जिम्मेदारियों, दवा प्रबंधन और हेल्थकेयर सिस्टम को समझने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा पाठ्यक्रम में “फार्मेसी में मनोविज्ञान की भूमिका” जैसे नए विषय भी शामिल किए गए हैं, जिससे छात्र मरीजों के व्यवहार और प्रोफेशनल जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकें।
NEP 2020 के अनुसार तैयार हुआ नया सिलेबस
संशोधित B.Pharm कोर्स को National Education Policy 2020 के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें स्किल बेस्ड और वैल्यू एडेड कोर्स को शामिल किया गया है।
नई शिक्षा नीति का उद्देश्य छात्रों को केवल डिग्री आधारित शिक्षा नहीं बल्कि रोजगार और कौशल आधारित प्रशिक्षण देना है। PCI का नया पाठ्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
रोजगार के नए अवसर बढ़ने की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि AI, क्लिनिकल फार्मेसी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को शामिल करने से फार्मेसी छात्रों की रोजगार क्षमता बेहतर होगी।
फार्मा कंपनियां, अस्पताल और हेल्थ टेक्नोलॉजी सेक्टर अब ऐसे प्रोफेशनल्स की मांग कर रहे हैं जिनके पास टेक्निकल नॉलेज के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और नई तकनीकों की समझ भी हो।
नया B.Pharm पाठ्यक्रम छात्रों को बदलते हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर के लिए बेहतर तरीके से तैयार करने की दिशा में अहम बदलाव माना जा रहा है।




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