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सुनने और बोलने से जुड़ी समस्याओं के इलाज में बनाएं मजबूत करियर, जानिए कोर्स से जुड़ी पूरी जानकारी

सुनने और बोलने से जुड़ी समस्याओं के इलाज में बनाएं मजबूत करियर, जानिए कोर्स से जुड़ी पूरी जानकारी

सुनने और बोलने से जुड़ी समस्याओं के इलाज में बनाएं मजबूत करियर, जानिए कोर्स से जुड़ी पूरी जानकारी

बारहवीं का रिजल्ट आने के बाद ज्यादातर छात्र अपने करियर को लेकर गंभीरता से योजना बनाना शुरू कर देते हैं। आमतौर पर मेडिकल, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे क्षेत्रों की चर्चा ज्यादा होती है, लेकिन हेल्थकेयर सेक्टर में कई ऐसे प्रोफेशनल कोर्स भी हैं जिनकी जानकारी अब भी सीमित छात्रों तक ही पहुंच पाती है। बीएएसएलपी यानी बैचलर ऑफ ऑडियोलॉजी एंड स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी (BASLP) ऐसा ही एक तेजी से उभरता हुआ करियर विकल्प है।

यह कोर्स उन छात्रों के लिए खास माना जाता है जो हेल्थकेयर क्षेत्र में रहकर लोगों की जिंदगी में बदलाव लाना चाहते हैं। बीएएसएलपी के जरिए छात्र सुनने, बोलने, भाषा और आवाज से जुड़ी समस्याओं के इलाज और थेरेपी में विशेषज्ञता हासिल करते हैं। देश में बढ़ती जागरूकता और स्पीच थेरेपी सेवाओं की मांग के कारण इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।

क्या होता है BASLP कोर्स

बीएएसएलपी एक प्रोफेशनल हेल्थ साइंस कोर्स है, जिसमें छात्रों को ऑडियोलॉजी और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजी की ट्रेनिंग दी जाती है। इस कोर्स के बाद छात्र ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट के रूप में काम कर सकते हैं।

ऑडियोलॉजिस्ट एवं स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट ऐसे प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञ होते हैं जो सुनने, बोलने, भाषा, आवाज, निगलने और संतुलन से जुड़ी समस्याओं का मूल्यांकन, निदान और पुनर्वास करते हैं। ये विशेषज्ञ ईएनटी डॉक्टर, न्यूरोलॉजिस्ट, पीडियाट्रिशियन और विशेष शिक्षकों के साथ मिलकर मरीजों की रिकवरी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

किन समस्याओं का इलाज करते हैं विशेषज्ञ

बीएएसएलपी प्रोफेशनल बच्चों और वयस्कों दोनों के साथ काम करते हैं। बच्चों में स्पीच डिले, ऑटिज्म और भाषा विकास से जुड़ी समस्याओं की थेरेपी दी जाती है। वहीं वयस्कों में स्ट्रोक, ब्रेन इंजरी या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के बाद स्पीच रिहैबिलिटेशन का काम किया जाता है।

इसके अलावा हकलाना, आवाज से जुड़ी परेशानियां, सुनने की क्षमता कम होना, टिनिटस यानी कान में आवाज आना और बैलेंस डिसऑर्डर जैसी समस्याओं का भी उपचार किया जाता है। मरीजों के लिए हियरिंग एड और अन्य सहायक उपकरणों का चयन और फिटिंग भी इसी क्षेत्र के विशेषज्ञ करते हैं।

BASLP कोर्स की अवधि और योग्यता

बीएएसएलपी में प्रवेश के लिए छात्र का 12वीं कक्षा भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंकों से पास होना जरूरी है। कुछ संस्थान प्रवेश परीक्षा के आधार पर भी दाखिला देते हैं।

इस कोर्स की कुल अवधि चार वर्ष होती है। इसमें तीन वर्ष का अकादमिक अध्ययन और एक वर्ष की अनिवार्य क्लिनिकल इंटर्नशिप शामिल होती है। इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को अस्पतालों और क्लिनिकल सेटअप में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है।

RCI मान्यता क्यों जरूरी है

बीएएसएलपी कोर्स में प्रवेश लेते समय यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है कि संस्थान भारतीय पुनर्वास परिषद यानी Rehabilitation Council of India (RCI) से मान्यता प्राप्त हो। बिना आरसीआई रजिस्ट्रेशन के इस क्षेत्र में प्रोफेशनल प्रैक्टिस करना संभव नहीं होता। इसलिए किसी भी कॉलेज में दाखिले से पहले उसकी मान्यता जरूर जांच लें।

देश के प्रमुख संस्थान

बीएएसएलपी की पढ़ाई के लिए देश में कई प्रतिष्ठित संस्थान मौजूद हैं। इनमें प्रमुख नाम शामिल हैं:

  • Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities
  • Ali Yavar Jung National Institute of Speech and Hearing Disabilities
  • All India Institute of Speech and Hearing
  • All India Institute of Physical Medicine and Rehabilitation
  • Postgraduate Institute of Medical Education and Research

करियर और सैलरी के अवसर

बीएएसएलपी कोर्स पूरा करने के बाद छात्र सरकारी और निजी अस्पतालों, स्पीच एवं हियरिंग क्लीनिक, रिहैबिलिटेशन सेंटर, मेडिकल कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में काम कर सकते हैं। इसके अलावा निजी क्लिनिक या स्पीच थेरेपी सेंटर शुरू करने का विकल्प भी मौजूद रहता है।

विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती स्तर पर इस क्षेत्र में 25 हजार से 50 हजार रुपये प्रतिमाह तक की आय संभव है। अनुभव बढ़ने के साथ सैलरी और अवसर दोनों में तेजी से वृद्धि होती है। विदेशों में भी ऑडियोलॉजी और स्पीच थेरेपी प्रोफेशनल्स की अच्छी मांग देखी जा रही है।

क्यों बढ़ रही है BASLP की मांग

बच्चों में स्पीच और भाषा संबंधी समस्याओं की बढ़ती पहचान, बुजुर्गों में सुनने की समस्याएं और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मामलों में वृद्धि के कारण इस क्षेत्र की जरूरत लगातार बढ़ रही है। हेल्थकेयर सेक्टर में यह ऐसा प्रोफेशन बनता जा रहा है जहां विशेषज्ञों की कमी महसूस की जा रही है। ऐसे में बीएएसएलपी आने वाले समय में मजबूत और स्थिर करियर विकल्प साबित हो सकता है।

Asmita Sarkar

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