
भारत में बच्चों और किशोरों के बीच तंबाकू और निकोटिन की बढ़ती लत अब गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कम उम्र में तंबाकू सेवन की शुरुआत भविष्य में कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर आयोजित एक राष्ट्रीय परामर्श में इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए युवाओं को तंबाकू से बचाने के लिए ठोस और लगातार कदम उठाने की मांग की गई।
दिल्ली विश्वविद्यालय के सामाजिक कार्य विभाग और सोशियो इकोनॉमिक्स एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (SEEDS) की ओर से आयोजित इस राष्ट्रीय परामर्श में जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति निर्माताओं और युवा प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का विषय था — “आकर्षण को बेनकाब करना: निकोटिन और तंबाकू की लत का मुकाबला करना”। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि तंबाकू कंपनियां युवाओं और किशोरों को आकर्षित करने के लिए नए-नए तरीके अपना रही हैं, जिससे कम उम्र के बच्चे तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (GYTS) के आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया। सर्वे के मुताबिक भारत में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के करीब 8.5 फीसदी स्कूली बच्चे किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं। इनमें लड़कों की हिस्सेदारी 9.6 फीसदी है, जबकि लड़कियों में यह आंकड़ा 7.4 फीसदी दर्ज किया गया। विशेषज्ञों ने इसे बेहद चिंताजनक बताया क्योंकि कम उम्र में निकोटिन की लत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर गहरा असर डालती है।
सर्वे में यह भी सामने आया कि लगभग 29.5 फीसदी विद्यार्थी परोक्ष धूम्रपान यानी सेकेंड हैंड स्मोक के संपर्क में आते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि धूम्रपान न करने वाले बच्चों पर भी इसका गंभीर असर पड़ता है। इससे फेफड़ों की बीमारी, सांस की समस्या और भविष्य में हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने कहा कि स्कूलों, परिवारों और समाज को मिलकर बच्चों को तंबाकू के नुकसान के प्रति जागरूक करना होगा। उन्होंने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बढ़ते निकोटिन उत्पादों के प्रचार को भी चिंता का बड़ा कारण बताया। उनका कहना है कि फ्लेवर्ड निकोटिन उत्पाद, ई-सिगरेट और आकर्षक पैकेजिंग युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रही है।
परामर्श के दौरान यह सुझाव भी दिया गया कि स्कूल स्तर पर जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत बनाया जाए। साथ ही बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है ताकि वे तनाव या सामाजिक दबाव में तंबाकू की ओर न बढ़ें।
विश्व तंबाकू निषेध दिवस हर साल 31 मई को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को तंबाकू सेवन के खतरों के प्रति जागरूक करना और तंबाकू मुक्त समाज की दिशा में प्रयासों को मजबूत करना है। इस वर्ष विशेषज्ञों ने खासतौर पर बच्चों और युवाओं को तंबाकू उद्योग के प्रभाव से बचाने पर जोर दिया है।




Add comment