
Medical Education News: देश में मेडिकल शिक्षा से जुड़े विवाद लगातार गहराते जा रहे हैं। NEET-UG को लेकर चले लंबे विवाद के बाद अब NEET-SS काउंसिलिंग, FMGE पास डॉक्टरों की इंटर्नशिप और DM (Doctorate of Medicine) में प्रवेश नियमों में प्रस्तावित बदलाव को लेकर डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों की चिंता बढ़ गई है। इन तीनों मामलों का असर हजारों युवा डॉक्टरों के करियर और देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है।
सबसे बड़ी चिंता NEET-SS 2024 (शैक्षणिक सत्र 2024-25) की काउंसिलिंग में हो रही देरी को लेकर है, जो कई महीनों बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। वहीं, विदेश से एमबीबीएस कर लौटे और Foreign Medical Graduate Examination (FMGE) पास कर चुके सैकड़ों डॉक्टर इंटर्नशिप शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके अलावा, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) द्वारा DM पाठ्यक्रमों में प्रवेश के नियमों की समीक्षा के प्रस्ताव ने भी नया विवाद खड़ा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित विवाद से अटकी NEET-SS काउंसिलिंग
सामान्य परिस्थितियों में NEET-SS की काउंसिलिंग अप्रैल तक पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन तमिलनाडु के सर्विस कोटा से जुड़े विवाद के कारण पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
मामला तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु सरकार ने सुपर स्पेशियलिटी की करीब 250 सीटों को सर्विस कोटे के तहत रखा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से केवल लगभग 60 सीटों पर ही प्रवेश हो सका, जबकि बची हुई लगभग 190 सीटें ऑल इंडिया कोटे में वापस भेजी जानी थीं।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने राज्य सरकार से सीटें लौटाने को कहा था। बाद में 29 मई को सुप्रीम कोर्ट ने भी शेष सीटें वापस करने का निर्देश दिया। हालांकि, तमिलनाडु सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए नई याचिका दाखिल कर दी। फिलहाल इस विवाद से जुड़े कई मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, जिसके कारण काउंसिलिंग प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि अगस्त शुरू होने के बावजूद हजारों सुपर स्पेशियलिटी अभ्यर्थी प्रशिक्षण और नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं, जबकि देश में पहले से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी बनी हुई है।
FMGE पास 500 डॉक्टरों को अब भी इंटर्नशिप का इंतजार
दूसरा बड़ा मुद्दा FMGE पास कर चुके उन करीब 500 विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स का है, जो भारत लौटने के बाद इंटर्नशिप शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं।
इन डॉक्टरों का कहना है कि परीक्षा पास करने के बावजूद उन्हें अनिवार्य इंटर्नशिप के लिए काउंसिलिंग नहीं मिल रही है। इंटर्नशिप पूरी किए बिना वे स्थायी पंजीकरण और आगे की चिकित्सा प्रैक्टिस की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते।
बताया जा रहा है कि प्रभावित अभ्यर्थियों ने इस संबंध में दिल्ली मेडिकल काउंसिल से भी संपर्क किया है। उन्हें अन्य मेडिकल कॉलेजों में समायोजन की संभावना का आश्वासन दिया गया है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
DM Admission Rules में बदलाव के प्रस्ताव पर बढ़ा विरोध
इसी बीच राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने Doctorate of Medicine (DM) पाठ्यक्रमों में प्रवेश पात्रता की समीक्षा के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है।
समिति इस बात पर विचार कर रही है कि क्या कुछ अन्य MD विशेषज्ञता वाले डॉक्टरों को भी संबंधित DM सुपर स्पेशियलिटी कार्यक्रमों में प्रवेश की अनुमति दी जा सकती है।
प्रस्ताव के अनुसार—
- MD Biochemistry करने वाले डॉक्टरों को DM Endocrinology में प्रवेश देने पर विचार किया जा रहा है।
- MD Emergency Medicine के डॉक्टरों को DM Neurology और DM Cardiology में पात्र बनाया जा सकता है।
- MD Tropical Medicine के डॉक्टरों को DM Gastroenterology, Rheumatology, Critical Care, Nephrology और Hematology जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश देने का प्रस्ताव समीक्षा के दायरे में है।
हालांकि, इस प्रस्ताव का कई डॉक्टर संगठन विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि सुपर स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की मौजूदा व्यवस्था विशेष प्रशिक्षण और विषयगत विशेषज्ञता पर आधारित है। यदि पात्रता का दायरा बिना पर्याप्त अकादमिक आधार के बढ़ाया गया, तो प्रशिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
IMA Junior Doctors Network के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने कहा कि यह प्रस्ताव विशेष रूप से MD Medicine पृष्ठभूमि वाले डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय है और इससे सुपर स्पेशियलिटी प्रशिक्षण की मौजूदा संरचना प्रभावित हो सकती है।
मेडिकल शिक्षा के सामने एक साथ कई चुनौतियां
एक ओर NEET-SS काउंसिलिंग सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों के कारण रुकी हुई है, दूसरी ओर FMGE पास डॉक्टर इंटर्नशिप शुरू नहीं कर पा रहे हैं। वहीं DM प्रवेश नियमों में संभावित बदलाव ने भी चिकित्सा समुदाय में नई बहस छेड़ दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन तीनों मुद्दों का जल्द समाधान आवश्यक है, क्योंकि इनका सीधा असर मेडिकल शिक्षा, विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और देश की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।




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