
भारत में Allied Healthcare यानी सहायक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कोर्स करने वाले छात्रों के लिए बड़ा बदलाव हुआ है। कई दशकों से भारतीय Allied Healthcare graduates को UK, US, Australia और Gulf देशों में काम करने के लिए अलग-अलग तरह की शैक्षणिक और नियामकीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता रहा है। कोर्स की अवधि, क्रेडिट सिस्टम और पेशेवर रजिस्ट्रेशन में अंतर के कारण कई भारतीय योग्यताओं का विदेश में मूल्यांकन आसान नहीं था।
अब इस स्थिति को बदलने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। National Commission for Allied and Healthcare Professions (NCAHP) की सिफारिशों के बाद University Grants Commission (UGC) ने 33 नए और 21 संशोधित या अपडेट किए गए Allied Healthcare UG और PG degree programmes को अधिसूचित किया है। UGC ने इसके लिए 27 अगस्त 2026 को Specification of Degrees के तहत 5th Amendment जारी किया, जिसे 31 अगस्त को Gazette में प्रकाशित किया गया।
इस बदलाव का उद्देश्य Allied Healthcare शिक्षा में कोर्स की अवधि, डिग्री के नाम और प्रवेश योग्यता में देशभर में एकरूपता लाना है। NCAHP इसे ‘One Nation, One Curriculum’ की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रहा है।
BPT, BOT और Optometry जैसे कोर्स होंगे ज्यादा व्यावहारिक
नए ढांचे के तहत Bachelor of Physiotherapy (BPT), Bachelor of Occupational Therapy (BOT) और Bachelor of Optometry (BOptom) जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को पांच साल की अवधि के साथ तैयार किया गया है, जिसमें एक साल की अनिवार्य clinical internship शामिल है।
NCAHP की चेयरपर्सन डॉ. यज्ञा उन्मेष शुक्ला के अनुसार, क्लिनिकल प्रशिक्षण बढ़ाने का उद्देश्य छात्रों को वास्तविक अस्पताल और स्वास्थ्य सेवाओं के माहौल में ज्यादा अनुभव देना है। उनका कहना है कि Allied Healthcare शिक्षा में केवल कोर्स की अवधि बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि छात्रों में वास्तविक मरीजों के साथ काम करने का आत्मविश्वास और क्षमता विकसित करना भी जरूरी है।
नए पाठ्यक्रम में Fundamentals of Healthcare Delivery Systems जैसे शुरुआती विषयों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा छात्रों के मूल्यांकन को ज्यादा व्यावहारिक बनाने के लिए Objective Structured Clinical Examination (OSCE) और Objective Structured Practical Examination (OSPE) जैसी परीक्षाओं को मानकीकृत किया जा रहा है।
पांच साल का कोर्स, लेकिन बढ़ेगा मुख्य रूप से Internship का समय
पांच साल की अवधि सुनकर छात्रों को लग सकता है कि उन्हें एक साल ज्यादा क्लास करनी होगी। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा नहीं है। मौजूदा BPT ढांचे में चार साल की अकादमिक पढ़ाई के बाद छह महीने की रोटेटरी internship होती थी। नए ढांचे में मुख्य बदलाव internship की अवधि को बढ़ाकर एक साल करने का है।
Symbiosis College of Physiotherapy, Pune के निदेशक और प्रोफेसर डॉ. अपूर्व पी. शिम्पी के अनुसार, अतिरिक्त अवधि का उद्देश्य छात्रों को ज्यादा clinical exposure देना है, ताकि वे मरीजों के साथ काम करने और स्वतंत्र रूप से पेशेवर जिम्मेदारी संभालने के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
इस बदलाव से फीस बढ़ने की चिंता पर विशेषज्ञों का कहना है कि internship आमतौर पर paid training के रूप में होती है, जहां छात्रों को stipend मिल सकता है। इसलिए केवल internship की अवधि एक साल होने का मतलब यह नहीं है कि छात्रों पर एक अतिरिक्त साल की सामान्य tuition fee का बोझ पड़ेगा।
PG में भी बढ़ेंगे स्पेशलाइजेशन के विकल्प
नए ढांचे में सिर्फ UG courses में बदलाव नहीं किया गया है। कई Allied Healthcare क्षेत्रों में postgraduate education को भी ज्यादा विशेषज्ञता आधारित बनाया गया है।
UGC की नई अधिसूचना में Master of Physiotherapy (MPT) की आठ specialisations के अलावा Master of Occupational Therapy, Medical Laboratory Sciences, Medical Radiology and Imaging Technology और Respiratory Technology जैसे क्षेत्रों में भी अलग-अलग specialisations शामिल हैं।
नई और संशोधित डिग्रियों में Physiotherapy, Occupational Therapy, Optometry, Medical Laboratory Sciences, Emergency Medical Technology, Anaesthesia and Operation Theatre Technology, Nutrition and Dietetics, Psychology, Medical Radiology, Imaging and Therapeutic Technology, Physician Associate, Respiratory Technology, Dialysis Therapy Technology और Health Information Management जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
2026-27 से नए नियमों के अनुसार होगा बदलाव
यह सुधार prospective यानी आगे होने वाले नए admissions पर लागू किया जा रहा है। इसका मतलब है कि पुराने बैच के छात्रों पर नए पाठ्यक्रम को पीछे की तारीख से लागू नहीं किया जाएगा। संशोधित programmes में नए academic year से दाखिला लेने वाले छात्रों को नए curriculum और training requirements के अनुसार पढ़ाई करनी होगी।
NCAHP ने पहले ही 28 professions को कवर करने वाले 18 competency-based curricula तैयार किए हैं। इनका उद्देश्य Allied Healthcare professionals को सिर्फ किताबी ज्ञान देने के बजाय उनकी वास्तविक पेशेवर क्षमता और clinical skills पर ज्यादा ध्यान देना है।
Kaloji Narayana Rao University of Health Sciences, Telangana के पूर्व कुलपति डॉ. बी. करुणाकर रेड्डी के अनुसार, पुराने समय में paramedical education में दो साल के diploma programmes का दबदबा था और कई जगह प्रशिक्षण तथा रोजगार के अवसर सीमित थे। नए ढांचे से इस क्षेत्र में शिक्षा और पेशेवर मानकों को मजबूत करने की उम्मीद है।
विदेश में नौकरी के रास्ते आसान करने की कोशिश
इस पूरे सुधार का एक बड़ा लक्ष्य भारतीय Allied Healthcare professionals के लिए international mobility बढ़ाना भी है। NCAHP विदेशों के regulatory bodies के साथ bilateral arrangements पर काम कर रहा है। सितंबर 2026 में Australia की Australian Health Practitioner Regulation Agency (AHPRA) और UK के health regulators के साथ बातचीत प्रस्तावित है।
इसका उद्देश्य भारतीय courses की अवधि, credit requirements और clinical training को अंतरराष्ट्रीय मानकों के करीब लाना है। अगर भविष्य में संबंधित विदेशी regulatory bodies के साथ औपचारिक समझौते होते हैं, तो भारतीय graduates के लिए qualification evaluation और overseas licensing की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि नई UGC degree अपने आप UK, US या Australia में practice licence की गारंटी नहीं देती। हर देश और profession का अपना registration और licensing system होता है। नए भारतीय curriculum का लक्ष्य इन अंतरराष्ट्रीय requirements के साथ बेहतर alignment तैयार करना है।
कॉलेजों को अस्पताल और Faculty व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी
नए नियमों के साथ Allied Healthcare institutions के लिए infrastructure और clinical training की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। जिन कॉलेजों में ये courses चलेंगे, उन्हें पर्याप्त hospital exposure, trained faculty और clinical supervisors की व्यवस्था करनी होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ बड़ा hospital होना पर्याप्त नहीं है। छात्रों को Orthopaedics, Neurology, Paediatrics जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में पर्याप्त संख्या और विविधता वाले मरीजों के साथ training का अवसर मिलना जरूरी है।
बड़े और स्थापित विश्वविद्यालयों के लिए यह बदलाव अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, लेकिन छोटे और कम संसाधन वाले निजी संस्थानों को infrastructure और hospital tie-ups पर ज्यादा निवेश करना पड़ सकता है।
State Councils की स्थिति अभी भी बड़ी चुनौती
NCAHP Act, 2021 के लागू होने के बाद Allied Healthcare professionals के regulation के लिए State Allied and Healthcare Councils का गठन भी जरूरी है। जुलाई 2026 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 ने State Allied and Healthcare Councils गठित कर लिए थे।
हालांकि, इन councils के कामकाज और NCAHP Act के पूरी तरह लागू होने को लेकर अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2026 में केंद्र, राज्यों और NCAHP से Act के implementation को लेकर compliance affidavits मांगे थे और मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 के लिए तय की थी।
NCAHP के अनुसार, जहां State Council काम नहीं कर रहा होगा, वहां केंद्रीय स्तर पर regulatory व्यवस्था के जरिए professionals को registration से जुड़ी दिक्कतों से बचाने की व्यवस्था की जा रही है। आयोग एक centralized online system के जरिए graduates के verification और Unique Identity Number (UID) से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है।
छात्रों के लिए क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि Allied Healthcare courses के नाम, duration, entry qualification और curriculum को ज्यादा स्पष्ट और एक समान बनाया जा रहा है। इससे छात्रों को course चुनने और आगे career planning करने में आसानी होगी।
साथ ही, ज्यादा clinical training से graduates को अस्पतालों में वास्तविक काम का अनुभव मिलेगा। लंबे समय में standardized education, practical training और professional registration व्यवस्था मजबूत होने से भारतीय Allied Healthcare workforce को देश के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर अवसर मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, विदेश में नौकरी या practice के लिए छात्रों को संबंधित देश की licensing requirements अलग से पूरी करनी होंगी। इसलिए किसी भी course में admission लेने से पहले छात्र को यह जरूर देखना चाहिए कि संबंधित degree UGC और NCAHP के मौजूदा मानकों के अनुरूप है या नहीं, institution के पास जरूरी clinical training facilities हैं या नहीं और जिस देश में वह काम करना चाहता है वहां उस profession के registration rules क्या हैं।




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