
भारत में फैशन और लाइफस्टाइल इंडस्ट्री तेजी से विस्तार कर रही है। बदलते ट्रेंड और ब्रांडेड उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच फैशन डिजाइनिंग से जुड़े प्रोफेशनल्स की जरूरत भी लगातार बढ़ रही है। यही वजह है कि अब डिजाइनिंग के क्षेत्र में पारंपरिक कोर्स के अलावा कई नए और स्पेशलाइज्ड विकल्प सामने आए हैं। इन्हीं में से एक लोकप्रिय कोर्स है BDes in Leather Design यानी बैचलर ऑफ डिजाइन इन लेदर डिजाइन।
यह चार वर्षीय अंडरग्रेजुएट कोर्स है, जिसमें छात्रों को चमड़े से बने उत्पादों की डिजाइनिंग, डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी तकनीकी और क्रिएटिव ट्रेनिंग दी जाती है। फैशन और प्रोडक्ट डिजाइन में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए यह कोर्स तेजी से आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
कोर्स में क्या सिखाया जाता है?
BDes Leather Design कोर्स के दौरान छात्रों को बैग, जूते, बेल्ट, जैकेट, वॉलेट और अन्य फैशन एक्सेसरीज की डिजाइनिंग सिखाई जाती है। इसमें केवल डिजाइन बनाना ही नहीं, बल्कि उत्पाद तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को समझाया जाता है।
छात्रों को कटिंग, सिलाई, पैटर्न मेकिंग, डिजाइन डेवलपमेंट और एडवांस डिजाइन सॉफ्टवेयर की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही लेदर टैनिंग, मटेरियल की पहचान, फैशन ट्रेंड्स, ब्रांडिंग और मार्केटिंग जैसे विषय भी पढ़ाए जाते हैं।
कोर्स का बड़ा हिस्सा प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पर आधारित होता है। कई संस्थान छात्रों को इंडस्ट्री प्रोजेक्ट और इंटर्नशिप के जरिए वास्तविक कार्य अनुभव भी देते हैं ताकि वे प्रोफेशनल दुनिया के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।
कैसे मिलता है एडमिशन?
इस कोर्स में दाखिले के लिए उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना जरूरी है। साइंस, कॉमर्स या आर्ट्स किसी भी स्ट्रीम के छात्र आवेदन कर सकते हैं।
कई संस्थान प्रवेश परीक्षा, पोर्टफोलियो और इंटरव्यू के आधार पर एडमिशन देते हैं। देश के प्रमुख डिजाइन संस्थानों में प्रवेश के लिए डिजाइन एप्टीट्यूड टेस्ट भी आयोजित किए जाते हैं।
लेदर डिजाइनिंग में करियर के अवसर
फैशन और लेदर इंडस्ट्री के विस्तार के साथ इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। कोर्स पूरा करने के बाद छात्र फुटवियर डिजाइनर, एक्सेसरी डिजाइनर, मर्चेंडाइजर, प्रोडक्शन मैनेजर और रेंज डेवलपर जैसी भूमिकाओं में काम कर सकते हैं।
फुटवियर डिजाइनर नए और आरामदायक जूतों की डिजाइन तैयार करते हैं, जबकि एक्सेसरी डिजाइनर बैग, बेल्ट और वॉलेट जैसे उत्पादों पर काम करते हैं। इसके अलावा छात्र खुद का डिजाइन लेबल या स्टार्टअप भी शुरू कर सकते हैं।
Bata, Liberty Shoes, Hush Puppies और Louis Vuitton जैसी कंपनियां इस क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करती हैं।
कहां से करें यह कोर्स?
लेदर डिजाइनिंग की पढ़ाई के लिए National Institute of Fashion Technology देश के प्रमुख संस्थानों में गिना जाता है। National Institute of Fashion Technology Delhi ग्रेजुएशन स्तर पर यह कोर्स ऑफर करता है।
इसके अलावा Footwear Design and Development Institute और Shoolini University भी इस क्षेत्र में लोकप्रिय विकल्प माने जाते हैं।
कितनी मिलती है सैलरी?
भारत में लेदर डिजाइनर की शुरुआती सैलरी आमतौर पर 20 हजार से 30 हजार रुपये प्रति माह के बीच होती है। सालाना पैकेज करीब 2.5 लाख से 3.5 लाख रुपये तक हो सकता है।
हालांकि अनुभव, स्किल और कंपनी के आधार पर सैलरी तेजी से बढ़ती है। बड़े फैशन ब्रांड्स और इंटरनेशनल कंपनियों में अनुभवी डिजाइनरों को इससे कहीं अधिक पैकेज भी मिल सकता है।




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