
सार्वजनिक प्रसारक ऑल इंडिया रेडियो (AIR) द्वारा हाल ही में कैजुअल उद्घोषकों की नियुक्ति के लिए जारी नोटिफिकेशन को लेकर केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) ने सख्ती दिखाई है। यह नोटिस उन कैजुअल आरजे (Radio Jockeys) के संगठन की याचिका पर जारी किया गया है, जो लंबे समय से आकाशवाणी में सेवाएं दे रहे हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने CAT में दलील दी कि AIR ब्रॉडकास्टिंग प्रोफेशनल्स एसोसिएशन के तहत लगभग 20 कैजुअल आरजे कई वर्षों से लगातार काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के कर्मचारियों की नियमितीकरण से जुड़ी एक याचिका फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
नोटिफिकेशन की वैधता न्यायिक निर्णय पर निर्भर
CAT ने अपने 10 जून 2025 के आदेश में कहा कि 4 अप्रैल को जारी नोटिफिकेशन फिलहाल “वर्तमान याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन” रहेगा। साथ ही, न्यायाधिकरण ने ऑल इंडिया रेडियो, केंद्र सरकार और प्रसार भारती को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
नई नियुक्तियों पर उठे सवाल
उत्तरदाता पक्ष के वकील ने तर्क दिया कि याचिका जल्दबाज़ी में दायर की गई है क्योंकि भर्ती प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरण में है और इससे याचिकाकर्ताओं को सीधा नुकसान नहीं हो रहा। इसके जवाब में खुर्शीद ने कहा कि नई भर्तियों से पहले से कार्यरत कैजुअल उद्घोषकों की स्थिति और अधिक अनिश्चित हो जाएगी।
अगली सुनवाई 29 जुलाई को
न्यायाधिकरण ने मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई 2025 को तय की है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित संबंधित मामले में हस्तक्षेप की अर्जी दाखिल किए जाने की जानकारी को भी रिकॉर्ड पर लिया गया है।




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