
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स (AIIMS) और आईआईटी (IIT) द्वारा वर्ष 2020 में संयुक्त रूप से मेडटेक कार्यक्रम शुरू किये गए थे। अब इस कार्यक्रम से मेक इन इंडिया टेक्नोलॉजी और विभिन्न मॉडल तैयार होने लगे हैं। मेडटेक कार्यक्रम के तहत 8 मेक इन इंडिया स्टार्टअप शुरू हो चुके हैं। इन स्टार्टअप में सबसे उपयोगी सेलवर्स कंपनी का डिजीज मॉडल है। इसका उपयोग करने से जानवरों पर जो ड्रग ट्रायल करना पड़ता था, उसके लिए अब जानवरों की जरूरत नहीं पड़ेगी।
एम्स में कार्यरत सेलवर्स की फाउंडर डॉक्टर कनिका सिंग्रोहा ने जानकारी देते हुए कहा कि पीएचडी के दौरान विचार आया कि ड्रग ट्रायल में गैर रोग पशु मॉडल होना चाहिए। इससे जानवरों को हानि से बचाया जा सकेगा। दवाओं का मानव पर क्या असर पड़ रहा है, इसकी सही पहचान भी की जा सकेगी।
आईआईटी के प्रोफेसर इंद्रनील बनर्जी तथा एम्स की डॉक्टर शिल्पी दीक्षित गुप्ता के मार्गदर्शन में एआई की मदद से डीपटेक मॉडल तैयार किया गया है। यह मनुष्य की स्क्रीन की तरह है। इसके अलग-अलग मॉडल तैयार किए गए हैं। मुहं के कैंसर का मॉडल तैयार किया गया है। विभिन्न शारीरिक बीमारियों के अलग-अलग मॉडल तैयार किए गए हैं। इन मॉडल के माध्यम से जांच एवं दवा के प्रभाव का ट्रायल किया जा रहा है।
सेंसर युक्त तकनीकी का इनोवेशन किया गया है। इससे फंगल संक्रमण का जल्दी पता लगाया जा सकेगा। एडवांस सेंसर तकनीकी से ब्लड और सीरम सैंपल से तेजी से फैलने वाले फंगल संक्रमणों को रोकने में मदद मिलेगी। वर्तमान में फंगल इन्फेक्शन की जांच आने में 3 दिन तक का समय लगता है। जो नई तकनीकी ईजाद हुई है, उसके माध्यम से मात्र 30 मिनट में इंफेक्शन का पता लग जाएगा। चिकित्सा के क्षेत्र में जांच के वर्तमान सिस्टम में बड़ा बदलाव आने जा रहा है। वहीं दवाओं का बड़े पैमाने पर परीक्षण किया जा सकेगा। चिकित्सा जगत के क्षेत्र में इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।




Add comment