
दुनियाभर में सोशल मीडिया पर इन दिनों जो एक चीज हर प्रोफाइल पर देखने को मिल रही है, वह है घिबली आर्ट। एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफार्म्स पर लोग एआई के जरिए अपनी और सेलिब्रिटीज की कार्टून जैसी तस्वीरें बना रहे हैं और इन्हें शेयर कर रहे हैं। इसके साथ ही, एआई के प्रभाव और इसके संभावित खतरों पर भी चर्चा हो रही है। जापान की प्रसिद्ध कॉमिक्स और कार्टून शो के लिए इस्तेमाल होने वाली घिबली आर्ट, जो पहले महीनों का समय लेती थी, अब एआई की मदद से कुछ ही सेकंड्स में बनाई जा रही है।
यहां सवाल उठता है कि घिबली आर्ट है क्या? इसकी शुरुआत कहां से हुई और यह ट्रेंड कैसे वायरल हुआ? क्या एआई के जरिए घिबली आर्ट बनाना कानूनी रूप से सही है? घिबली के फाउंडर्स का इस पर क्या कहना है? और इस विषय पर चल रही चर्चाएं क्या हैं?
घिबली आर्ट का आकर्षण और एआई की भूमिका
घिबली आर्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें हाथ से बनाए गए कैरेक्टर्स और हल्के पेस्टल रंगों का प्रयोग होता है, जो इसे एक शांत और सादगीपूर्ण रूप प्रदान करते हैं। यही कारण है कि घिबली आर्ट ने दुनिया भर में करोड़ों फैंस बनाए हैं।
हाल ही में, चैटजीपीटी ने अपना बिल्ट-इन इमेज जेनरेशन फीचर लॉन्च किया, जिससे एआई अब घिबली स्टाइल की तस्वीरें बनाने में सक्षम हो गया। यह फीचर ओपनएआई के GPT-4o मॉडल के साथ काम करता है, और इसका परिणाम यह रहा कि एआई द्वारा बनाई गई तस्वीरें हयाओ मियाजाकी की कला से मिलती-जुलती दिखने लगीं। इसके बाद, घिबली आर्ट पूरी दुनिया में वायरल हो गई।
चैटजीपीटी का वायरल फीचर और इसके प्रभाव
चैटजीपीटी पर घिबली स्टाइल की तस्वीरें बनाने की होड़ मच गई, और लोग इसे अपनी प्रोफाइल पिक्चर्स, बॉलीवुड फिल्मों, और सेलिब्रिटीज की तस्वीरों पर भी लागू करने लगे। 2024 के पेरिस ओलंपिक से लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क तक, सब घिबली स्टाइल में दिखने लगे।
हालांकि, चैटजीपीटी के जीपीयू पर इस ट्रेंड का दबाव बढ़ने के कारण प्लेटफॉर्म पर कभी-कभी क्रैश भी हो गया, जिससे टीम को अस्थायी रूप से कुछ सीमाएं लागू करनी पड़ीं। सैम अल्टमैन ने इस पर ट्वीट किया कि उनकी टीम इस दबाव को कम करने के लिए काम कर रही है।
कानूनी और नैतिक विवाद
घिबली आर्ट को लेकर सबसे बड़ा विवाद एआई की पहुंच और उसके द्वारा रचनात्मक कार्यों की नकल करने से जुड़ा है। चैटजीपीटी ने भी अपने उपयोगकर्ताओं को चेतावनी दी है कि वह कॉपीराइट के तहत सुरक्षित आर्ट स्टाइल की तस्वीरें नहीं बना सकता। हालांकि, कई कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एआई द्वारा घिबली स्टाइल की तस्वीरें बनाना पूरी तरह से कानून के ग्रे जोन में आता है।
इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मामलों के वकील इवान ब्राउन के अनुसार, घिबली आर्ट स्टाइल को कॉपीराइट कानून के तहत सुरक्षित नहीं किया गया है, और ओपनएआई का इस तरह की तस्वीरें बनाना कानूनी रूप से सही हो सकता है। हालांकि, कुछ आलोचकों का मानना है कि ओपनएआई ने घिबली स्टूडियो की रचनात्मक कला के आधार पर अपने मॉडल को प्रशिक्षित किया है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या एआई डेवलपर्स को कॉपीराइट किए गए काम का इस्तेमाल अपने मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए करना चाहिए।
घिबली के फाउंडर्स की प्रतिक्रिया
घिबली आर्ट के फाउंडर हयाओ मियाजाकी ने एक बार एआई जनरेटेड कला को लेकर कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने इसे ‘जीवन का अपमान’ बताया था और कहा था कि एआई द्वारा बनाई गई कला इंसान की गहरी भावनाओं, अनुभवों और संवेदनाओं को व्यक्त नहीं कर सकती। मियाजाकी का मानना है कि कला का असली सार तभी सामने आता है जब इसे किसी इंसान के अनुभव और दर्द के साथ जोड़ा जाता है।
जैसे-जैसे घिबली आर्ट एआई के माध्यम से वायरल हो रही है, इसके कानूनी और नैतिक पहलू पर चर्चाएं भी तेज हो रही हैं। एआई के जरिए कला बनाने के इस ट्रेंड के बाद, यह सवाल उठता है कि क्या यह भविष्य में कलाकारों के अधिकारों का उल्लंघन करेगा, या फिर यह एक नया और लोकतांत्रिक तरीका होगा रचनात्मकता को व्यक्त करने का।




Add comment