
दुनियाभर की टेक इंडस्ट्री तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है। हालांकि यह बदलाव सकारात्मक अवसरों के बजाय कर्मचारियों के लिए नौकरी संकट लेकर आया है। साल 2025 इस दृष्टि से टेक सेक्टर के लिए खासा कठिन साबित हुआ है। भारत की आईटी कंपनियां भी इससे अछूती नहीं रहीं—यहां तक कि अनुभवी कर्मचारियों तक को नौकरी से हाथ धोना पड़ा है।
भारत की आईटी इंडस्ट्री पर दबाव
भारतीय आईटी सेक्टर में फिलहाल करीब 73 लाख लोग काम कर रहे हैं। लेकिन कोटक इंस्टीट्यूशन इक्विटीज की रिपोर्ट बताती है कि बड़ी आईटी सर्विस कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में गिरावट दर्ज की है। कोविड काल (जून 2020) के बाद यह पहली बार है जब सेक्टर इतनी बड़ी सुस्ती से जूझ रहा है।
भर्ती पर ब्रेक और छंटनी जारी
वित्त वर्ष 2022 एकमात्र ऐसा साल था जब आईटी कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्तियां की थीं। उसके बाद से भर्ती का ग्राफ लगातार नीचे जा रहा है। FY25 की चौथी तिमाही में सिर्फ 13,935 नई भर्तियां हुईं, जबकि अनुमान है कि 2026 में इसमें 72% तक की गिरावट आ सकती है।
पिछले साल 7,700 वरिष्ठ पेशेवरों (15 साल से अधिक अनुभव वाले) की छंटनी की गई। वहीं 2022 में जहां कंपनियों ने करीब 10 लाख भर्तियां की थीं, उसके बाद भू-राजनीतिक तनाव और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के प्रभाव ने नौकरियों के अवसरों को लगातार कम किया।
छंटनी की लहर: बड़ी कंपनियां भी पीछे नहीं
इंडस्ट्री डेटा के मुताबिक—
इंटेल: वैश्विक कर्मचारियों का 20% घटाया
माइक्रोसॉफ्ट: 15,000 नौकरियां खत्म
टीसीएस: 12,000 कर्मचारियों की छंटनी
मेटा, गूगल, अमेजन: प्रत्येक ने 20,000–25,000 नौकरियां खत्म कीं
क्लावियो: जुलाई में 20% स्टाफ कम किया
रेड हैट: 800 कर्मचारी बाहर
Qorvo: 250 पद समाप्त
इसके अलावा Salesforce, Cisco और Oracle जैसी कंपनियों के सटीक आंकड़े सामने नहीं आए हैं। साथ ही, कई स्टार्टअप्स में भी 5,000–8,000 तक नौकरियां खत्म की गई हैं।
AI बना बड़ा कारण
छंटनी के पीछे आर्थिक दबाव और री-स्ट्रक्चरिंग तो कारण हैं ही, लेकिन सबसे बड़ा असर AI अपनाने से आया है। रूटीन और मिड-लेवल की नौकरियां तेजी से ऑटोमेट हो रही हैं। सिर्फ अमेरिका में कोविड के बाद से 7.4 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी हुई है, जिनमें सबसे ज्यादा असर टेक सेक्टर पर पड़ा है।
री-स्किलिंग की बढ़ती जरूरत
जहां पारंपरिक जॉब्स खत्म हो रही हैं, वहीं नए क्षेत्रों में अवसर बढ़ रहे हैं। AI इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे डोमेन्स में नई नौकरियां पैदा हो रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रोफेशनल्स ने समय रहते नई स्किल्स नहीं सीखीं, तो वे इस AI-प्रधान दौर में पीछे छूट जाएंगे।
आगे भी बना रहेगा खतरा
अगर आप सोचते हैं कि छंटनी की यह लहर थम जाएगी तो यह गलत साबित हो सकता है। इंडस्ट्री अनुमानों के मुताबिक, 2025 के अंत तक वैश्विक स्तर पर छंटनी का आंकड़ा 1 लाख से ज्यादा पहुंच सकता है।




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