
आज के समय में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और हर क्षेत्र को प्रभावित कर रहा है। राइटिंग, लैंग्वेज और टेक्नोलॉजी के बाद अब यह शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने की ओर अग्रसर है। चीन में AI-आधारित शिक्षा का प्रयोग शुरू हो चुका है। यहां क्लासरूम में बच्चे टैबलेट पर पढ़ाई करते हैं, उनकी गतिविधियां और सवाल रियल टाइम में ट्रैक होते हैं, और शिक्षक तभी आते हैं जब वास्तव में ज़रूरत होती है।
नया AI शिक्षा मॉडल
यह प्रयोग Squirrel AI Learning के फाउंडर डेरेक ली (Derek Li) की पहल है। उनका मानना है कि AI की मदद से शिक्षा को हर छात्र की ज़रूरत के हिसाब से कस्टमाइज किया जा सकता है। यह adaptive software छात्रों की प्रगति, सीखने की गति और सोचने के समय को ट्रैक करता है और उसी आधार पर पढ़ाई की दिशा तय करता है। ली का कहना है कि पारंपरिक शिक्षा के पुराने तरीकों से आगे बढ़ना अब ज़रूरी है।
क्या शिक्षक की भूमिका खत्म हो जाएगी?
डेरेक ली के अनुसार, AI केवल रिपीट होने वाले और मापे जा सकने वाले कामों में बेहतर है—जैसे टेस्ट लेना, फीडबैक देना, प्रैक्टिस सेशन और प्रगति पर नज़र रखना। लेकिन छात्रों की भावनाओं को समझना, उन्हें प्रेरित करना, नैतिक और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा देना अब भी शिक्षकों की ही भूमिका है। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि AI तथ्य तो सिखा सकता है, लेकिन रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और मानवीय जुड़ाव जैसी क्षमताओं को विकसित करना मशीन के लिए आसान नहीं है।
Squirrel AI का प्रभाव
आज चीन में 3,000 से ज़्यादा सेंटर और 1.2 मिलियन छात्र Squirrel AI से जुड़े हैं। डेरेक ली ने एक वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया, जब उन्होंने अकेले 24 घंटे में 112,718 छात्रों को ऑनलाइन गणित पढ़ाया। यह मॉडल शिक्षा को बड़े स्तर पर सुलभ और व्यक्तिगत बनाने में मददगार साबित हो रहा है।
वैश्विक विस्तार की ओर
Squirrel AI अब अमेरिका में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी में है। इसकी खासियत यह है कि इसका टेक्नोलॉजी मॉडल इसे अन्य प्रतिस्पर्धियों से अलग बनाता है। फिलहाल, Squirrel AI यह साबित कर रहा है कि भविष्य की शिक्षा केवल शिक्षक को बदलने की नहीं, बल्कि छात्रों के सीखने के अनुभव को और समृद्ध बनाने की दिशा में है।




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