
भारत का डीप-टेक और डिफेंस इनोवेशन सेक्टर तेजी से बदल रहा है और इसी बदलाव के बीच olee.space एक उभरते उदाहरण के तौर पर सामने आया है। पुणे स्थित इस स्टार्टअप ने बेहद कम समय में रिसर्च स्तर से आगे बढ़ते हुए सैन्य तकनीकों का लाइव प्रदर्शन कर ध्यान आकर्षित किया है।
साल 2023 में James Solomon और Suman Hiremath द्वारा स्थापित इस स्टार्टअप ने लेजर आधारित कम्युनिकेशन सिस्टम और डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन टेक्नोलॉजी विकसित की है, जिनका उपयोग रणनीतिक और रक्षा क्षेत्रों में किया जा सकता है।
कंपनी के अनुसार, स्थापना के छह महीने के भीतर ही दो तकनीकों को व्यावसायिक रूप से तैयार कर लिया गया था। इनमें लेजर कम्युनिकेशन सिस्टम और लेजर डायरेक्टेड-एनर्जी वेपन शामिल हैं। इन तकनीकों का प्रदर्शन प्रयागराज में आयोजित एक ऑप्टिक्स संगोष्ठी में किया गया, जिसमें Yogi Adityanath और Rajnath Singh समेत कई वरिष्ठ राजनीतिक और सैन्य अधिकारी मौजूद थे।
अलग-अलग क्षमता वाले लेजर हथियार
स्टार्टअप का दावा है कि उसके लेजर वेपन सिस्टम को 2 किलोवाट से लेकर 50 किलोवाट तक की विभिन्न क्षमता में डिजाइन किया गया है। कंपनी के मुताबिक यह सिस्टम तीन सेकंड से कम समय में लक्ष्य को निशाना बना सकता है और मौजूदा रडार नेटवर्क के साथ भी काम कर सकता है।
दुनियाभर में डायरेक्टेड-एनर्जी सिस्टम, खासकर लेजर हथियारों, को काउंटर-ड्रोन ऑपरेशन, मिसाइल इंटरसेप्शन और एयर डिफेंस के लिए तेजी से विकसित किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक मिसाइल सिस्टम की तुलना में इन तकनीकों की ऑपरेटिंग लागत कम हो सकती है और प्रतिक्रिया समय काफी तेज होता है।
सुरक्षित सैन्य संचार के लिए लेजर कम्युनिकेशन
कंपनी ने लेजर कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी भी विकसित की है। रक्षा और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेक्टर में इस तकनीक का महत्व लगातार बढ़ रहा है क्योंकि यह हाई-स्पीड और सुरक्षित ऑप्टिकल डेटा ट्रांसमिशन की सुविधा देती है।
विशेषज्ञों के अनुसार भविष्य में सैन्य संचार और अंतरिक्ष तकनीकों में लेजर आधारित संचार प्रणालियां अहम भूमिका निभा सकती हैं।
पारंपरिक सरकारी मॉडल से अलग रणनीति
आमतौर पर रक्षा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां सीधे सरकारी खरीद प्रक्रिया पर निर्भर रहती हैं, लेकिन olee.space बड़े डिफेंस कॉन्ट्रैक्टर्स के साथ साझेदारी के जरिए अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही है।
कंपनी के सह-संस्थापक जेम्स सोलोमन के अनुसार, डीप-टेक सेक्टर में काम करने वाले स्टार्टअप्स के लिए केवल सरकारी अनुबंधों पर निर्भर रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी को एक भारतीय रक्षा कंपनी के साथ साझेदारी के जरिए पहला रक्षा ऑर्डर मिला है, हालांकि साझेदार कंपनी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
शुरुआत में बूटस्ट्रैप मॉडल पर काम करने वाले इस स्टार्टअप ने अब तक करीब 3 मिलियन डॉलर की फंडिंग जुटाई है। इसमें IIMA Ventures और Rockstud Capital जैसे निवेशकों का समर्थन शामिल है।
IIT बॉम्बे से डिफेंस टेक्नोलॉजी तक का सफर
जेम्स सोलोमन की कहानी भारत के बदलते टेक्नोलॉजी उद्यमिता माहौल को भी दर्शाती है। Indian Institute of Technology Bombay से मटेरियल साइंस की पढ़ाई करने वाले सोलोमन ने कॉलेज के दौरान ही डिफेंस टेक्नोलॉजी पर काम शुरू कर दिया था।
सीमित आर्थिक संसाधनों वाले परिवार से आने वाले सोलोमन ने JEE की तैयारी कर रहे छात्रों को पढ़ाकर अपनी पढ़ाई और रिसर्च को आगे बढ़ाया। धीरे-धीरे उन्होंने एडवांस इंजीनियरिंग सिस्टम में विशेषज्ञता हासिल की।
आज कंपनी में करीब 25 इंजीनियरों की टीम काम कर रही है, जिसमें Defence Research and Development Organisation और Bharat Electronics Limited जैसी संस्थाओं का अनुभव रखने वाले प्रोफेशनल्स भी शामिल हैं।
भारत के बदलते डीप-टेक इकोसिस्टम की झलक
olee.space जैसे स्टार्टअप्स का उभरना इस बात का संकेत है कि भारत में निजी कंपनियां अब उन रणनीतिक क्षेत्रों में भी तेजी से प्रवेश कर रही हैं, जहां पहले सरकारी लैब्स और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का वर्चस्व था।
डिफेंस-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और एडवांस्ड मटेरियल्स जैसे सेक्टर अब भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मनिर्भर रक्षा निर्माण और स्वदेशी तकनीक पर भारत के बढ़ते फोकस के बीच लेजर सिस्टम, ऑप्टिकल कम्युनिकेशन और डायरेक्टेड-एनर्जी तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप भविष्य में देश की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।




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