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PM Modi Free Coaching Scheme 2026: Free Coaching Centres to Help Students in Small Cities and Rural Areas

छोटे शहरों और ग्रामीण छात्रों के लिए बनेंगे फ्री कोचिंग सेंटर, SATHEE से मिलेगी JEE-NEET समेत कई परीक्षाओं की तैयारी

PM Modi Free Coaching Scheme 2026: Free Coaching Centres to Help Students in Small Cities and Rural Areas

प्रतियोगी परीक्षाओं की महंगी कोचिंग का खर्च कम करने के लिए केंद्र सरकार मुफ्त कोचिंग व्यवस्था को बड़े स्तर पर विस्तार देने की तैयारी कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग की घोषणा की थी। सरकार अब इस पहल को खासतौर पर छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और दूरदराज क्षेत्रों के छात्रों तक पहुंचाने पर काम कर रही है।

सरकार की योजना केवल ऑनलाइन सुविधा तक सीमित रखने के बजाय ऐसे इलाकों में भी मदद पहुंचाने की है, जहां छात्रों को अच्छी कोचिंग आसानी से उपलब्ध नहीं होती। इसके लिए संबंधित हितधारकों के साथ चर्चा के बाद विस्तृत रोडमैप तैयार किया जाएगा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ-साथ सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को इस व्यवस्था से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिए जाने की बात सामने आई है।

SATHEE के जरिए मुफ्त कोचिंग का पहले से चल रहा मॉडल

इस पहल के लिए सरकार के पास SATHEE (Self-Assessment, Test and Help for Entrance Examination) जैसा डिजिटल प्लेटफॉर्म पहले से मौजूद है। शिक्षा मंत्रालय ने IIT कानपुर के सहयोग से नवंबर 2023 में SATHEE शुरू किया था। इसका उद्देश्य देशभर के छात्रों को JEE, NEET, SSC और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए मुफ्त गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना है। आधिकारिक India Portal के अनुसार, यह सुविधा आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों सहित सभी छात्रों के लिए उपलब्ध है।

SATHEE पर IIT और AIIMS जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों की शैक्षणिक सामग्री, वीडियो लेक्चर, मॉक टेस्ट, प्रश्नों का अभ्यास, डाउट क्लियरिंग और मेंटरशिप जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। शिक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर JEE और NEET के साथ CLAT, ICAR, SSC, IBPS और RRB जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

हालांकि, उपलब्ध आधिकारिक स्रोतों में 21 लाख से अधिक छात्रों द्वारा SATHEE से मुफ्त कोचिंग लेने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए इस आंकड़े को फिलहाल सरकारी तौर पर सत्यापित संख्या के रूप में पेश करना उचित नहीं होगा।

IIT और AIIMS के छात्र बन सकते हैं मेंटर

SATHEE के मौजूदा मॉडल में IIT और AIIMS के छात्रों की मेंटरशिप भी शामिल है। इससे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को पढ़ाई से जुड़े सवालों, रणनीति और परीक्षा की तैयारी को लेकर मार्गदर्शन मिल सकता है। शिक्षा मंत्रालय के दस्तावेजों में SATHEE के तहत IIT और AIIMS छात्रों की मेंटरशिप का उल्लेख है।

सरकार का फोकस अब इस तरह की डिजिटल सुविधाओं को उन छात्रों तक पहुंचाने पर है, जिन्हें अपने शहर या गांव में निजी कोचिंग की सुविधा नहीं मिल पाती। ऐसे में सरकारी स्कूल, स्थानीय संस्थान और पंचायत स्तर की व्यवस्था इस योजना के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

मॉक टेस्ट, वीडियो लेक्चर और सेल्फ असेसमेंट की सुविधा

SATHEE को केवल वीडियो देखने वाले प्लेटफॉर्म के रूप में नहीं बनाया गया है। इसमें छात्रों को सवालों का अभ्यास करने और अपनी तैयारी जांचने के लिए टेस्ट और असेसमेंट की सुविधा भी मिलती है। शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, प्लेटफॉर्म पर हजारों प्रश्नों वाला प्रैक्टिस बैंक, मॉक टेस्ट, वीडियो लेक्चर, इंटरैक्टिव चैटबॉट और डाउट-क्लियरिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

प्लेटफॉर्म वेब और DTH के जरिए भी शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है। इससे उन छात्रों को भी फायदा मिल सकता है जिनके पास लगातार इंटरनेट कनेक्शन की सुविधा नहीं है।

JEE की तैयारी के लिए SATHEE पर 45 दिन का क्रैश कोर्स भी शुरू किया जा चुका है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कोर्स IIT टॉपर्स, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों की मदद से तैयार किया गया था।

13 भाषाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर जोर

सरकार की डिजिटल शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं में पढ़ाई की सुविधा बढ़ाने पर भी जोर है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार JEE Main, NEET UG और CUET UG जैसी प्रमुख राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाएं 13 भाषाओं में आयोजित की जाती हैं। इससे छात्रों को अपनी पसंद की भाषा में परीक्षा की तैयारी करने का विकल्प मिलता है।

मुफ्त कोचिंग व्यवस्था के विस्तार में भी स्थानीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण होगा। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्रों के लिए भाषा की बाधा कम होने से ऐसी सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने वालों की संख्या बढ़ सकती है।

सरकारी स्कूलों और दूरदराज के छात्रों पर रहेगा फोकस

सरकार की प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे बड़ा लक्ष्य उन छात्रों तक पहुंचना है, जो आर्थिक या भौगोलिक कारणों से निजी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते। छोटे शहरों में अच्छी कोचिंग संस्थाओं की कमी और बड़े शहरों में रहने-खाने का अतिरिक्त खर्च प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाता है।

ऐसे में यदि मुफ्त कोचिंग सेंटर वास्तव में पिछड़े और दूरदराज क्षेत्रों में स्थापित किए जाते हैं, तो छात्रों को JEE, NEET, CUET, SSC, बैंकिंग और अन्य परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़े शहरों का रुख करने की जरूरत कम हो सकती है।

हालांकि, इस योजना की सफलता केवल सेंटर खोलने से तय नहीं होगी। अच्छे शिक्षक, नियमित कक्षाएं, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, इंटरनेट और डिवाइस की उपलब्धता, डाउट क्लियरिंग तथा छात्रों की प्रगति की नियमित निगरानी भी जरूरी होगी।

महंगी कोचिंग से परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद

भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निजी कोचिंग पर बड़ी रकम खर्च होती है। 2026 की एक रिपोर्ट में भारत के कोचिंग उद्योग का आकार करीब 58,000 करोड़ रुपये बताया गया है, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में बाजार के आकार के अलग-अलग अनुमान मिलते हैं।

ऐसे में सरकारी मुफ्त कोचिंग का विस्तार छात्रों और उनके परिवारों के खर्च को कम कर सकता है। खासतौर पर उन परिवारों के लिए यह बड़ा बदलाव हो सकता है, जो JEE या NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बच्चों को कोटा, दिल्ली, हैदराबाद या दूसरे बड़े शिक्षा केंद्रों में भेजने का खर्च नहीं उठा पाते।

लेकिन मुफ्त कोचिंग को निजी संस्थानों का पूरा विकल्प मानना जल्दबाजी होगी। सरकारी व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों की गुणवत्ता, कंटेंट, टेस्ट सिस्टम, मेंटरशिप और छात्रों तक पहुंच को लगातार बेहतर करना होगा। यदि ये सुविधाएं छोटे शहरों और गांवों तक प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं, तो प्रधानमंत्री की मुफ्त कोचिंग की घोषणा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में आर्थिक और भौगोलिक असमानता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

 

Asmita Sarkar

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