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‘ठग लाइफ’: कमल हासन और मणि रत्नम की बहुप्रतीक्षित लेकिन कमजोर वापसी

कमल हासन की मेगा बजट फिल्म ‘ठग लाइफ’ तमिल सिनेमा के दो दिग्गजों — मणि रत्नम और कमल हासन — का ‘नायकन’ के बाद एक बार फिर से साथ आना है। इस वजह से यह फिल्म 2024 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक बन गई थी। माना जा रहा था कि यह हिंदी फिल्म ‘हाउसफुल 5’ को कड़ी टक्कर देगी।

लेकिन फिल्म की रिलीज़ को शुक्रवार से गुरुवार करना यह संकेत देता है कि शायद ‘ठग लाइफ’ की टीम सीधे मुकाबले के लिए तैयार नहीं थी — और शायद फिल्म की कहानी भी।

कमजोर कहानी, उलझी पटकथा
‘ठग लाइफ’ की सबसे बड़ी कमजोरी है इसकी कहानी, पटकथा और संवाद। फिल्म 1994 से शुरू होती है, जिसमें युवा कमल हासन भी दिखाई देते हैं। कहानी दिल्ली के दो माफिया गिरोहों के बीच तनाव और पुलिस से मिलीभगत की है।

कमल हासन का किरदार ‘नायकन’ से मिलता-जुलता है — नाम है शक्तिवेल। वह एक अखबार बेचने वाले बच्चे को ढाल बनाकर भागने की कोशिश करता है, जो बड़ा होकर उसका उत्तराधिकारी बनता है। लेकिन फिर वह दो भाइयों की आपसी रंजिश में मोहरा बन जाता है।

इंटरवल तक फिल्म ठीक-ठाक चलती है, लेकिन उसके बाद ऐसा लगता है जैसे मणि रत्नम ने फिल्म को अपने सहायकों पर छोड़ दिया हो। फिल्म अचानक इतनी गिर जाती है कि मणि रत्नम और कमल हासन के फैंस के दिल में एक गहरा धक्का लग जाता है।

मणि रत्नम की उम्मीद से कम
‘रोजा’, ‘बॉम्बे’ और ‘दिल से’ जैसी कालजयी फिल्में बनाने वाले निर्देशक से यह उम्मीद नहीं की गई थी कि वह इतनी कमजोर स्क्रिप्ट पर फिल्म बनाएंगे। गोवा और दिल्ली के बीच का सफर पात्र ऐसे तय करते हैं जैसे वे किसी टाइम पोर्टल से गुजर रहे हों।

फिल्म में टाइम लैप्स, कॉन्टीन्यूटी और लॉजिक की कई बड़ी खामियाँ हैं। डबिंग में भी ऐसे संवाद हैं जो हास्यास्पद बन जाते हैं — जैसे शक्तिवेल की बेटी अपने बेटे को ‘पोता’ कहती है।

कमल हासन का सबसे बड़ा धोखा
कमल हासन के फैंस को इस फिल्म से सबसे ज्यादा निराशा कमल हासन के प्रदर्शन से ही होती है। शक्तिवेल के किरदार में वह जवानी से लेकर बुढ़ापे और संन्यास तक के पड़ाव पार करते हैं, लेकिन किरदार का ग्राफ कहीं नहीं टिकता।

इंटरवल के बाद दर्शक दूसरे शक्तिवेल की एंट्री का इंतजार करते रह जाते हैं, जो कभी पूरा नहीं होता। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि ‘ठग लाइफ’ देखने वाले दर्शक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं — जैसे ऑनलाइन ऑर्डर किया गया आईफोन की जगह साबुन की टिकिया डिलीवर हो जाए।

तकनीकी पक्ष और कलाकारों का योगदान
फिल्म तकनीकी रूप से शानदार है। रवि के. चंद्रन का कैमरा कमाल दिखाता है और कुछ दृश्य मणि रत्नम के स्टाइल में बेहद खूबसूरत हैं। ए. श्रीकर प्रसाद यदि फिल्म की लंबाई थोड़ी कम करते, तो असर बेहतर हो सकता था।

तृषा कृष्णन ने इंद्राणी के किरदार में शानदार अभिनय किया है। सिलम्बरासन ने गोद लिए बेटे की भूमिका में अच्छा काम किया है और अभिरामी (उनकी पत्नी के रोल में) ने भी प्रभावित किया। ऐश्वर्या लक्ष्मी छोटे रोल में चमकी हैं।

अली फजल की भूमिका सीमित है और अपने बालों को संवारते हुए वह प्रभाव खो बैठते हैं। महेश मांजरेकर का काम दमदार है — अगर फिल्म सिर्फ सदानंद और शक्तिवेल की दुश्मनी पर केंद्रित रहती, तो शायद बेहतर परिणाम मिलता।

संगीत और निष्कर्ष
फिल्म में ए. आर. रहमान का संगीत लंबे समय बाद अच्छा लगता है, लेकिन जब बीज ही कमजोर हो, तो संगीत भी असर नहीं कर पाता।

निष्कर्षतः, ‘ठग लाइफ’ एक ऐसी फिल्म है जो संभावनाओं की कब्र बन जाती है। दो दिग्गजों की वापसी से जो उम्मीदें थीं, वे निराशा में बदल जाती हैं। यह फिल्म तमिल और हिंदी सिनेमा दोनों के दर्शकों के लिए एक अधूरी उम्मीद जैसी लगती है।

 

Asmita Sarkar

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