
23 मई 2025 को रिलीज़ हुई राजकुमार राव और वामिका गब्बी की फिल्म ‘भूल चूक माफ’ एक गंभीर सामाजिक विषय को छूती है—सरकारी नौकरी पाने की होड़ और उससे जुड़ी नैतिक उलझनें। फिल्म की कहानी एक युवक की है, जो पैसे देकर सिंचाई विभाग में नौकरी हासिल कर लेता है। लेकिन हालात कुछ ऐसे बनते हैं कि उसे यह नौकरी उस असली हकदार को लौटानी पड़ती है, जिसके पास योग्यता तो थी, लेकिन संसाधन नहीं।
यह फिल्म भारत के युवाओं की उस हकीकत को छूती है, जिसमें नौकरी पाना सिर्फ शिक्षा या मेहनत से नहीं, बल्कि सामाजिक ताने-बाने और परिस्थितियों से भी तय होता है।
इस विषय को लेकर हिंदी सिनेमा में पहले भी कई फिल्में बनी हैं। आइए नजर डालते हैं कुछ ऐसी फिल्मों पर जो पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षा और नौकरी के संघर्ष को ईमानदारी से पर्दे पर दिखा चुकी हैं।
1. 12वीं फेल (2023)
निर्देशक: विधु विनोद चोपड़ा
मुख्य कलाकार: विक्रांत मैसी, मेधा शंकर, अंशुमान पुष्कर
यह फिल्म एक छोटे शहर के युवक की कहानी है, जो दिल्ली जाकर UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी करता है। सीमित संसाधनों और संघर्षों के बावजूद वह सरकारी नौकरी हासिल करता है। यह फिल्म असफलता से लड़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
2. शादी में जरूर आना (2017)
निर्देशक: रत्ना सिंह
मुख्य कलाकार: राजकुमार राव, कृति खरबंदा
फिल्म में एक लड़की अपनी शादी छोड़कर करियर और नौकरी को चुनती है। दूसरी ओर, उसका मंगेतर भी खुद को साबित करने के लिए सरकारी नौकरी हासिल करता है। यह कहानी आत्मसम्मान, करियर और रिश्तों के टकराव को खूबसूरती से दिखाती है।
3. निल बटे सन्नाटा (2016)
निर्देशक: अश्विनी अय्यर तिवारी
मुख्य कलाकार: स्वरा भास्कर, रिया शुक्ला
यह फिल्म एक घरेलू सहायिका और उसकी पढ़ाई से भागती बेटी की कहानी है। मां अपनी बेटी को पढ़ाई की अहमियत समझाने के लिए खुद स्कूल जाने लगती है। अंततः बेटी पढ़ाई में रुचि लेने लगती है और नौकरी हासिल करती है। फिल्म शिक्षा के महत्व को भावुक और प्रेरणादायक अंदाज़ में प्रस्तुत करती है।
4. आरक्षण (2011)
निर्देशक: प्रकाश झा
मुख्य कलाकार: अमिताभ बच्चन, सैफ अली खान, दीपिका पादुकोण, मनोज बाजपेयी
यह फिल्म शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण नीति के सामाजिक, राजनीतिक और व्यक्तिगत पहलुओं को उजागर करती है। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे आरक्षण नीतियों से जुड़े मतभेद समाज में गहरी खाई पैदा करते हैं।
5. परीक्षा (2019)
निर्देशक: प्रकाश झा
मुख्य कलाकार: आदिल हुसैन, संजय सूरी, प्रयंका बोस
‘परीक्षा’ एक रिक्शा चालक की मार्मिक कहानी है, जो अपने बेटे को एक अच्छे निजी स्कूल में पढ़ाना चाहता है। फिल्म शिक्षा, वर्गभेद और आर्थिक संघर्षों को बेहद सशक्त तरीके से दर्शाती है।
राजकुमार राव की ‘भूल चूक माफ’ सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि भारतीय समाज में नौकरी की होड़, नैतिकता और अवसर की असमानता का आईना है। इन फिल्मों के माध्यम से यह साफ होता है कि नौकरी और शिक्षा की राह केवल डिग्रियों से नहीं, संघर्ष और आत्मबल से भी तय होती है।




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