अमेरिका में पढ़ाई के लिए जाने वाले भारतीय छात्रों और उनके आश्रितों की संख्या में अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 39 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के इंटरनेशनल ट्रेड एडमिनिस्ट्रेशन (ITA) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में छात्र वीजा पर भारत से जुड़े 25,321 लोगों के अमेरिका पहुंचने की एंट्री दर्ज हुई। अगस्त 2025 में यह संख्या 41,540 थी। अगस्त में आम तौर पर अमेरिकी विश्वविद्यालयों के फॉल सेमेस्टर से पहले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की आवाजाही सबसे ज्यादा रहती है। ऐसे में लगातार तीसरे साल अगस्त में गिरावट दर्ज होना महत्वपूर्ण है।
अगस्त 2026 का आंकड़ा 2020 के बाद इस महीने का सबसे कम स्तर है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण यात्रा पर लगी पाबंदियों के बीच अगस्त में केवल 2,908 लोगों के पहुंचने की एंट्री दर्ज हुई थी। वहीं, अगस्त 2023 में यह आंकड़ा 93,833 तक पहुंच गया था। इसके मुकाबले अगस्त 2026 की संख्या करीब 73 प्रतिशत कम रही।
अमेरिका में वीजा जांच सख्त होने, अपॉइंटमेंट और प्रक्रिया में देरी, वीजा अस्वीकृति की बढ़ती दर और पढ़ाई के बाद नौकरी मिलने को लेकर अनिश्चितता के बीच यह गिरावट आई है। शिक्षा सलाहकारों के मुताबिक, महंगी पढ़ाई और मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी भारतीय छात्रों और उनके परिवारों को विदेश में पढ़ाई की योजना पर दोबारा विचार करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
अमेरिका में छात्र वीजा पर आने वालों की संख्या लगातार घटी
जनवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद भारतीय छात्रों और उनके आश्रितों के अमेरिका पहुंचने के आंकड़ों में गिरावट तेज हुई। अगस्त 2024 में यह संख्या सालाना आधार पर 20.3 प्रतिशत घटी थी। अगस्त 2025 में गिरावट 44.5 प्रतिशत रही, जबकि अगस्त 2026 में इसमें 39 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये अमेरिका में प्रवेश की दर्ज एंट्री को दिखाते हैं, न कि अलग-अलग व्यक्तियों की कुल संख्या को। इनमें F-2 और M-2 वीजा पर यात्रा करने वाले आश्रित भी शामिल हैं। आंकड़ों में देश के निवास के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है। इनसे यह तय नहीं होता कि कितने छात्रों को वीजा मिला, कितनों ने अमेरिकी संस्थानों में दाखिला लिया या कितने छात्रों ने अपनी योजना बदल दी।
वीजा प्रक्रिया और सख्त जांच का असर
भारतीय आवेदकों के लिए अमेरिकी वीजा प्रक्रिया में आई मुश्किलें भी चिंता का विषय बनी हैं। विदेश मंत्रालय ने 2 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में दिए जवाब में बताया था कि अमेरिका ने जून और जुलाई 2025 के दौरान भारतीय नागरिकों को 12,776 F-1 छात्र वीजा जारी किए। एक साल पहले इसी अवधि में 41,336 वीजा जारी किए गए थे। इस तरह जारी किए गए वीजा की संख्या में 69.1 प्रतिशत की गिरावट आई। मंत्रालय ने इसके पीछे अमेरिकी जांच और नियमों के अनुपालन से जुड़े उपायों के विस्तार को भी एक कारण बताया।
अमेरिकी विदेश विभाग ने 18 जून 2025 को जारी दिशा-निर्देशों में छात्र और एक्सचेंज विजिटर वीजा के आवेदकों से जांच के लिए अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल सार्वजनिक रखने को कहा था।
अमेरिका की शिक्षा कंपनी Shorelight ने अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में सरकारी आंकड़ों का इस्तेमाल किया, जिन्हें सूचना की स्वतंत्रता से जुड़े कानून (FOIA) के तहत प्राप्त किया गया था। अध्ययन के अनुसार, भारतीय आवेदकों के F-1 वीजा आवेदन अस्वीकृत होने की दर वित्त वर्ष 2023 में 36 प्रतिशत थी, जो 2024 में बढ़कर 53 प्रतिशत और 2025 में 61 प्रतिशत हो गई।
अमेरिका पहुंचने वालों की संख्या में जून और जुलाई 2026 में भी गिरावट दर्ज की गई। जून में यह आंकड़ा सालाना आधार पर 17.3 प्रतिशत और जुलाई में 30.6 प्रतिशत घटा। सितंबर 2026 में अमेरिका पहुंचने वालों की संख्या पिछले साल के 11,700 से बढ़कर 12,285 हो गई, यानी करीब 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसके बावजूद यह संख्या सितंबर 2024 के स्तर से 37.5 प्रतिशत कम रही।
पढ़ाई के बाद नौकरी को लेकर भी चिंता
अमेरिका में पढ़ाई के बाद काम करने के अवसरों को लेकर अनिश्चितता ने भी छात्रों की चिंता बढ़ाई है। वहां पात्र F-1 वीजा धारक छात्रों को अपने अध्ययन क्षेत्र से संबंधित काम का अनुभव हासिल करने के लिए ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कार्यक्रम की सुविधा मिलती है। इसके तहत छात्र अपनी डिग्री के दौरान या पढ़ाई पूरी करने के बाद निर्धारित नियमों के अनुसार काम कर सकते हैं।
8 अक्टूबर 2026 को अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक प्रस्ताव रखा, जिसके तहत संस्थानों को OPT की शुरुआती अवधि के लिए प्रति छात्र 70,000 डॉलर और उसके बाद की प्रत्येक अवधि के लिए 30,000 डॉलर का भुगतान करना होगा। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिए जाने और लागू होने की स्थिति अलग हो सकती है, इसलिए इसे लागू नियम मानने से पहले आधिकारिक जानकारी देखना जरूरी है।
इसके अलावा, अमेरिका में छात्रों के ठहरने की अवधि से जुड़ी मौजूदा ‘ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस’ व्यवस्था को बदलकर अधिकतम चार साल की निश्चित प्रवेश अवधि लागू करने के लिए जुलाई में एक नियम को अंतिम रूप दिया गया था। हालांकि, 14 सितंबर को मैसाचुसेट्स की एक संघीय अदालत ने इस नियम पर रोक लगा दी। अमेरिकी सरकार ने इस फैसले के खिलाफ अपील की है।
शिक्षा सलाहकारों का कहना है कि वीजा अपॉइंटमेंट, पढ़ाई के बाद रोजगार और नीतियों में संभावित बदलाव छात्रों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं।
eduVelocity Global के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर विनु वारियर के अनुसार, अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दाखिले की प्रक्रिया आम तौर पर तय समय के अनुसार चल रही है और प्रवेश में कोई बड़ी देरी सामने नहीं आई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि छात्र वीजा, अस्थायी कामकाजी वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़ी नीतियों में अनिश्चितता के कारण अमेरिका को पढ़ाई के लिए चुनने को लेकर छात्रों का भरोसा प्रभावित हो रहा है।
Global Empower Network की कोर टीम के सदस्य अनिल वागड़े ने बताया कि वीजा जारी होने में देरी और वीजा स्टैम्पिंग के लिए अपॉइंटमेंट उपलब्ध नहीं होने के कारण कुछ छात्र अपनी यात्रा अगले सेमेस्टर तक टाल रहे हैं।
IDP Education के एक प्रवक्ता के मुताबिक, अपॉइंटमेंट की कमी, वीजा अस्वीकृति की बढ़ती दर और OPT में प्रस्तावित बदलावों को लेकर अनिश्चितता छात्रों की योजनाओं को प्रभावित कर रही है। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से विदेश में पढ़ाई का खर्च उठाना और मुश्किल हो रहा है। ऐसे में परिवार यह भी देख रहे हैं कि पढ़ाई पर खर्च की तुलना में भविष्य में कितना लाभ मिल सकता है।
भारतीय छात्र दूसरे देशों में पढ़ाई के विकल्प तलाश रहे
अमेरिकी वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई के बढ़ते खर्च को देखते हुए कुछ भारतीय छात्र अब दूसरे देशों के विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं। इनमें जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस, स्पेन, सिंगापुर, हांगकांग और जापान शामिल हैं। कुछ छात्र भारत के निजी विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने या अमेरिकी वीजा और पढ़ाई के बाद रोजगार से जुड़े नियमों पर स्थिति स्पष्ट होने तक अपनी योजना टालने पर विचार कर रहे हैं।
अमेरिका पहुंचने वाले भारतीय छात्रों और उनके आश्रितों की संख्या में आई गिरावट बताती है कि वहां पढ़ाई की योजना बनाना पहले की तुलना में अधिक अनिश्चित हो गया है। परिवारों के सामने अब केवल विश्वविद्यालय और कोर्स चुनने का सवाल नहीं है, बल्कि उन्हें पढ़ाई के कुल खर्च, वीजा मिलने की संभावना और डिग्री के बाद रोजगार के अवसरों को भी ध्यान में रखना पड़ रहा है।




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