
तेजी से बदलती दुनिया में जहां लोग नई-नई तकनीकों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं प्रकृति से जुड़ने की जरूरत भी उतनी ही महसूस की जा रही है। पेड़-पौधे केवल ऑक्सीजन देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे इंसान के मानसिक संतुलन, सुकून और जीवन के नजरिए को भी बदल सकते हैं। इसी सोच के साथ अमेरिका की प्रतिष्ठित Harvard University ने एक अनोखा नेचर कोर्स शुरू किया है, जिसमें पेड़ों को ही शिक्षक माना गया है।
क्या है यह खास कोर्स?
यह कोर्स हार्वर्ड के मशहूर Arnold Arboretum में संचालित किया जाता है। लगभग 281 एकड़ में फैले इस विशाल परिसर में करीब 16,000 पेड़ और पौधे हैं। यहीं छात्रों को प्रकृति के साथ गहरा रिश्ता बनाने का अवसर मिलता है।
इस पहल के पीछे विकास जीवविज्ञानी और अरबोरिटम के निदेशक William Friedman का विचार है। उनका मानना है कि पेड़ केवल जैविक इकाई नहीं, बल्कि जीवन के शिक्षक भी हो सकते हैं। वे कहते हैं कि पेड़ हमें धैर्य, स्थिरता और सामूहिक जीवन की सीख देते हैं।
बिना किताब और बिना क्लासरूम की पढ़ाई
इस कोर्स की खास बात यह है कि यहां पारंपरिक अर्थों में न तो क्लासरूम है और न ही पाठ्यपुस्तकें। छात्रों को पहले दिन अरबोरिटम में ले जाया जाता है और हर छात्र को एक पेड़ चुनना होता है। पूरा सेमेस्टर वह छात्र उसी पेड़ के साथ समय बिताता है। वही पेड़ उसका साप्ताहिक असाइनमेंट और अंतिम प्रोजेक्ट का आधार बनता है।
छात्र अपने चुने हुए पेड़ का निरीक्षण करते हैं, उसके आसपास के वातावरण को समझते हैं और उससे जुड़ाव महसूस करने की कोशिश करते हैं। इस प्रक्रिया के जरिए वे प्रकृति के साथ रिश्ते को गहराई से समझते हैं।
छात्रों के अनुभव
कई छात्रों ने इस कोर्स को अपने जीवन का अलग अनुभव बताया है। एक छात्र जैकब किफ्लू ने लिलैक का पेड़ चुना। उनका कहना है कि वह ऐसा पेड़ चाहते थे जो उन्हें घर जैसा एहसास दे। उनके मुताबिक उस पेड़ के नीचे बैठकर जो सुकून मिलता है, वह कहीं और नहीं मिलता।
एक अन्य छात्रा स्टेला ने जापानी मेपल का पेड़ चुना। उनका कहना है कि कॉलेज में नए दोस्त बनने के बावजूद सबसे गहरा रिश्ता उन्हें अपने चुने हुए पेड़ से महसूस होता है।
कोर्स का संदेश क्या है?
इस कोर्स का मूल संदेश सरल है—पेड़ को सिर्फ एक संसाधन या सजावट का हिस्सा न समझें, बल्कि एक जीव के रूप में देखें। उसे समझने और महसूस करने की कोशिश करें। फ्रीडमैन के शब्दों में, “पेड़ को अपना विस्तार न मानें, बल्कि एक जीव की तरह समझें।”
विशेषज्ञ मानते हैं कि भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रकृति से जुड़ाव मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। ऐसे कोर्स यह याद दिलाते हैं कि आधुनिक जीवन में भी प्रकृति के लिए जगह बनाना संभव है।
जब दुनिया तकनीकी प्रगति की ओर तेजी से बढ़ रही है, तब यह पहल बताती है कि इंसान और प्रकृति का रिश्ता अभी भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शायद यही संतुलन भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है।




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