
अगर आप अमेरिका में शिक्षक बनकर काम करने का सपना देख रहे हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर सामने आई है। अमेरिका में एक नया बिल पेश किया गया है, जो विदेशी शिक्षकों के लिए नौकरी पाना आसान कर सकता है। इस बिल के जरिए H-1B वीजा पर टीचर्स की नियुक्ति के दौरान लागू भारी फीस को हटाने का प्रस्ताव रखा गया है। अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो अमेरिकी स्कूल बड़ी संख्या में विदेशी शिक्षकों को हायर कर सकेंगे, जिससे भारतीयों सहित अन्य देशों के शिक्षकों को भी फायदा मिलेगा।
यह मामला उस बदलाव से जुड़ा है, जिसे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले साल सितंबर में H-1B वीजा के लिए नई फीस लागू करते समय पेश किया था। इस नई फीस के लागू होने के बाद से ही कई अमेरिकी स्कूलों को शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वे विदेश से टीचर्स को नियुक्त नहीं कर पा रहे हैं। खासकर सरकारी स्कूलों के लिए यह समस्या ज्यादा गंभीर है।
इसी समस्या को देखते हुए अमेरिकी सांसद Lisa Murkowski ने ‘S.4087’ नामक एक बिल पेश किया है। इस बिल का लक्ष्य सरकारी स्कूलों को H-1B वीजा पर टीचर्स की नियुक्ति के दौरान नई फीस से छूट देना है। बिल का यह प्रस्ताव ऐसे समय पर आया है जब अमेरिका के कई राज्यों में, खासकर अलास्का जैसे इलाकों में, सरकारी स्कूलों को टीचर्स की कमी का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों की कमी ने पढ़ाई की गुणवत्ता पर भी असर डाला है।
भारतीय उम्मीदवारों को मिलेगा फायदा
भारतीय शिक्षकों के लिए H-1B वीजा काफी महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसके जरिए वे अमेरिका में करीब छह साल तक नौकरी कर सकते हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर यह बिल पारित हो जाता है, तो भारत जैसे देशों के शिक्षकों को अमेरिका में रोजगार पाने के बेहतर मौके मिलेंगे। विशेष रूप से गणित, विज्ञान, अंग्रेज़ी जैसे विषयों में प्रशिक्षित शिक्षक की मांग अमेरिकी स्कूलों में अधिक है, और ऐसे में भारतीय शिक्षकों को प्राथमिकता मिलने की संभावना भी बन सकती है।
फीस बढ़ने से स्कूलों की मुश्किलें बढ़ीं
अमेरिकी स्कूलों का कहना है कि जब से H-1B वीजा फीस बढ़ाई गई है, तब से विदेशी शिक्षकों को नियुक्त करना कठिन हो गया है। अलास्का काउंसिल ऑफ स्कूल एडमिनिस्ट्रेटर्स की कार्यकारी निदेशक Lisa Paradee ने बताया कि अलास्का में वर्तमान समय में 573 विदेशी शिक्षक हैं, जिनमें से 341 H-1B वीजा पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले एक विदेशी शिक्षक को हायर करने पर लगभग 6,000 से 12,000 रुपये का खर्च आता था, लेकिन अब नई फीस के बाद यह लागत बहुत बढ़ गई है, जिससे स्कूलों के लिए ऐसे शिक्षकों को नौकरी देना मुश्किल हो गया है।
इस नए बिल से अगर H-1B फीस हटाई जाती है, तो अमेरिकी स्कूलों में विदेशी शिक्षकों की नियुक्ति पहले से कहीं अधिक आसान हो सकती है। इससे न केवल शिक्षकों की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी, बल्कि भारतीय जैसे देशों के शिक्षकों के लिए भी अमेरिका में बेहतर करियर के दरवाजे खुलेंगे।




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