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उच्च शिक्षा के लिए इज़राइल भी है भारतीय छात्रों की पसंद 

क्या आप विश्वास करेंगे कि उच्च अध्ययन के लिए इज़राइल भी भारतीय छात्रों के पसंदीदा स्थलों में से एक है। इसके बावजूद कि पश्चिम एशिया पर युद्ध के बादल मंडराते रहे हैं और इज़राइल इसकी जद में रहा है। भारतीय छात्रों का ऐसी स्थिति में भी इजराइल के प्रति आकर्षण चौंकाने वाला है, मगर है यह सच।   

विदेश मंत्रालय ने 2022 में इज़राइल में भारतीय छात्रों की संख्या 1,218 होने का अनुमान लगाया था। हालाँकि, COVID-19 की महामारी के बाद इज़राइली अधिकारियों द्वारा संकलित आंकड़ों के मुताबिक इज़राइली विश्वविद्यालयों में नामांकित भारतीय छात्रों की संख्या शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के दौरान इससे कहीं अधिक 1,691 थी।

उपरोक्त आंकड़ा इस लिहाज से भी अहम है कि इज़राइल में जो विदेशी छात्र उच्च अध्ययन कर रहे हैं, उनमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय छात्रों की ही है। चीन से भी ज़्यादा। 2022 में 842 चीनी छात्र इजराइल में उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे थे। यानी भारत के बाद चीन के छात्र इजराइल में संख्या के मामले में दूसरे स्थान पर हैं। 

यहाँ यह बताते चलें कि भारत ने आधिकारिक तौर पर 2022 में विदेश में भारतीय छात्रों की संख्या 13.24 लाख होने का अनुमान लगाया था। हालांकि आप्रवासन सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2022 में 7.5 लाख और 2021 में 4.44 लाख थी।

दक्षिण भारत में इज़राइल के महावाणिज्य दूत टैमी बेन-हैम के अनुसार, भारतीय और इज़राइली वैज्ञानिकों के बीच अच्छा शैक्षणिक सहयोग और अकादमिक आदान-प्रदान और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों की इच्छा भारतीय छात्रों को इज़राइल की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

वह कहते हैं, “भारतीय प्रबंधन संस्थान, बैंगलोर (IIM Bangalore) में पढ़ाने के लिए इस जुलाई में एक इज़राइली प्रोफेसर आ रहे हैं। हम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (IIT Madras) के साथ जल पर उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए वार्ता कर रहे हैं। एक इज़रायली प्रतिनिधिमंडल अगस्त में एक सेमिनार में भाग लेने के लिए आईआईटी-मद्रास का दौरा करने वाला है। इसके अतिरिक्त भी कई इज़रायली कंपनियों ने कार्यक्रम में रुचि व्यक्त की है।”

इज़राइली संस्थानों और विश्वविद्यालयों में बड़ी संख्या में पढ़ने वाले भारतीय छात्र डॉक्टरेट और पोस्ट-डॉक्टरेट अध्ययन कर रहे हैं। 2022 में, इज़राइल में 47.9% विदेशी पोस्ट-डॉक्टरल फेलो भारत से थे, जबकि चीन से केवल 9.6%।

NoRKA रूट्स के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. हरिकृष्णन नंबूथिरी का कहना है कि इज़राइल में भारतीय छात्रों की उच्च संख्या के पीछे दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग, संयुक्त अनुसंधान कार्यक्रम, छात्रवृत्तियां, संकाय या छात्र विनिमय कार्यक्रम आदि के माध्यम से अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने जैसी पहल प्रमुख वजहें हैं। 

श्री नंबूथिरी कहते हैं, “इसके अलावा, इज़राइल में विश्वविद्यालयों में नामांकित छात्रों की संख्या पर इज़राइल द्वारा बनाए रखा गया डेटा अधिक यथार्थवादी है, क्योंकि भारतीय एजेंसियों के पास पारगमन देशों और प्रवासन के अन्य तरीकों के माध्यम से इज़राइल में प्रवास करने वाले छात्रों के डेटा को ट्रैक करने की सीमाएं हैं।” 

केरल कृषि विश्वविद्यालय की पूर्व विस्तार निदेशक पी. इंदिरा देवी कहती हैं कि इज़राइल अपने जल प्रबंधन कार्यक्रमों और नवीन कृषि पद्धतियों के लिए देश के विद्वानों के बीच अधिक प्रसिद्ध है। वह कहती हैं कि इज़राइल और भारत के बीच  इन विषयों पर आधारित कुछ अकादमिक आदान-प्रदान कार्यक्रम भी हुए हैं।

विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में विदेश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की सबसे ज़्यादा तादाद संयुक्त राज्य अमेरिका में थी और इसके बाद कनाडा का नंबर था। ये दो प्रमुख देश हैं जो उच्च अध्ययन के लिए भारतीय छात्रों को आकर्षित करते हैं।  संयुक्त राज्य अमेरिका में 4.65 लाख और कनाडा में 1.83 लाख भारतीय छात्र। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया ( 1 लाख), संयुक्त अरब अमीरात (1.64 लाख), और यूनाइटेड किंगडम (0.55 लाख) जैसे देश हैं जो भारतीय छात्रों की पसंद रहे हैं।

 

Asmita Sarkar

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