
विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करना लाखों भारतीय छात्रों का सपना होता है। लेकिन ऊंची ट्यूशन फीस, रहने का खर्च और अन्य आर्थिक चुनौतियों के कारण यह सपना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। अब यह स्थिति बदल सकती है। आने वाले समय में भारत में ही कई विदेशी विश्वविद्यालय अपने स्वतंत्र कैंपस शुरू करने जा रहे हैं, जिससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई और विदेशी डिग्री देश में ही हासिल करने का मौका मिलेगा।
केंद्र सरकार और University Grants Commission (UGC) की पहल के तहत देश में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस स्थापित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। गुजरात के GIFT City के बाद अब दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहर भी इंटरनेशनल हायर एजुकेशन के नए केंद्र बनने जा रहे हैं।
15 विदेशी विश्वविद्यालयों को मिला कैंपस खोलने का लेटर ऑफ इंटेंट
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, अब तक 15 अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों को भारत में स्वतंत्र कैंपस स्थापित करने के लिए Letter of Intent (LoI) जारी किया जा चुका है। इनमें से अधिकांश संस्थान अगस्त 2026 से अपने पहले बैच की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी कर रहे हैं।
शुरुआती चरण में प्रत्येक कैंपस में करीब 200 से 250 छात्रों को प्रवेश दिया जाएगा। अगले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर हर वर्ष 1,000 से 1,200 छात्रों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्रालय के अनुसार, शुरुआती एडमिशन प्रक्रिया में ही 10,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जिससे छात्रों की बढ़ती रुचि का अंदाजा लगाया जा सकता है।
किन विदेशी विश्वविद्यालयों के खुलेंगे भारत में कैंपस?
भारत में कैंपस स्थापित करने की तैयारी कर रहे प्रमुख विश्वविद्यालयों में University of Southampton, Deakin University, University of Wollongong, Queen’s University Belfast, University of Liverpool, University of York, University of Bristol, University of Aberdeen, Illinois Institute of Technology, Western Sydney University, Victoria University, Coventry University, University of Surrey, La Trobe University और Lancaster University शामिल हैं।
किन शहरों में शुरू होंगे नए कैंपस?
विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस देश के चार प्रमुख शिक्षा और उद्योग केंद्रों में स्थापित किए जा रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में University of Southampton और Victoria University अपने कैंपस शुरू करेंगी। GIFT City में पहले से Deakin University, University of Wollongong और Queen’s University Belfast अपने शैक्षणिक केंद्र स्थापित कर रही हैं।
बेंगलुरु में University of Liverpool अपना कैंपस शुरू करेगी। वहीं मुंबई इस पहल का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है, जहां University of York, University of Bristol, University of Aberdeen और Illinois Institute of Technology अपने कैंपस स्थापित करने की तैयारी में हैं।
इन शहरों का चयन बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योगों से मजबूत जुड़ाव और बड़े छात्र आधार को ध्यान में रखकर किया गया है।
एडमिशन के लिए क्या होगी पात्रता?
अधिकांश विश्वविद्यालयों में स्नातक (Undergraduate) कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं में लगभग 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक मांगे जा सकते हैं। वहीं पोस्टग्रेजुएट कोर्स में आवेदन के लिए 55 से 70 प्रतिशत अंक की आवश्यकता हो सकती है। अंतिम पात्रता संबंधित विश्वविद्यालय और कोर्स के अनुसार अलग-अलग होगी।
कई विश्वविद्यालयों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि किसी छात्र ने 12वीं में अंग्रेजी विषय में 70 से 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं, तो उसे अलग से IELTS स्कोर जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि अंतिम नियम संबंधित विश्वविद्यालय की प्रवेश नीति पर निर्भर करेंगे।
किन विषयों में होगी पढ़ाई?
शुरुआती दौर में इन विश्वविद्यालयों का फोकस आधुनिक और रोजगार आधारित विषयों पर रहेगा। इनमें Artificial Intelligence (AI), Computer Science, Data Science, Business Management और STEM (Science, Technology, Engineering and Mathematics) जैसे क्षेत्र प्रमुख होंगे।
इन संस्थानों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रिया उनके मूल विदेशी कैंपस के मानकों के अनुरूप होगी। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का अनुभव भारत में ही मिलेगा।
विदेश में पढ़ाई का भी मिलेगा अवसर
इन विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने वाले छात्रों को एक या दो सेमेस्टर अपने मूल विदेशी कैंपस में पढ़ने का अवसर भी दिया जाएगा।
उदाहरण के तौर पर University of York 2+1 मॉडल लागू करेगी, जिसमें छात्र दो वर्ष मुंबई कैंपस और अंतिम वर्ष ब्रिटेन में पढ़ाई कर सकेंगे। वहीं University of Bristol के भारतीय कैंपस के छात्रों को ब्रिटेन स्थित विश्वविद्यालय की AI सुपरकंप्यूटिंग सुविधाओं तक क्लाउड प्लेटफॉर्म के माध्यम से पहुंच मिलेगी।
स्कॉलरशिप और फैकल्टी की भी होगी सुविधा
इन कैंपस में भारतीय शिक्षकों के साथ विदेशी प्रोफेसर भी पढ़ाएंगे। छात्रों के लिए मेरिट और आर्थिक स्थिति के आधार पर स्कॉलरशिप की व्यवस्था भी की जाएगी।
सरकार और संस्थानों की संयुक्त योजना के तहत अगले पांच वर्षों के लिए करीब 1,000 करोड़ रुपये का स्कॉलरशिप फंड प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत योग्य छात्रों को 10 प्रतिशत से लेकर 100 प्रतिशत तक फीस में छूट मिल सकती है। इसके अलावा University of Aberdeen और University of Bristol जैसी संस्थाओं ने अपनी ओर से अलग स्कॉलरशिप योजनाओं की भी घोषणा की है।
छात्रों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?
भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के कैंपस खुलने से छात्रों को विदेश जैसी पढ़ाई, अंतरराष्ट्रीय डिग्री, वैश्विक फैकल्टी, आधुनिक रिसर्च सुविधाएं और विदेशी विश्वविद्यालयों के अकादमिक माहौल का अनुभव देश में ही मिल सकेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विदेश जाकर पढ़ाई करने की तुलना में कुल खर्च लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम होने की संभावना है।
उच्च शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल न केवल भारतीय छात्रों के लिए वैश्विक शिक्षा को अधिक सुलभ बनाएगी, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।




Add comment