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India's Panchatantra Tales Reach Austrian Schools; Indian Ambassador Recounts Moral Stories to Children in Vienna

Panchatantra Reaches Austria: वियना के स्कूलों में पढ़ाई जा रही भारत की 2000 साल पुरानी ज्ञान परंपरा 

India's Panchatantra Tales Reach Austrian Schools; Indian Ambassador Recounts Moral Stories to Children in Vienna

भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान परंपरा अब यूरोप के स्कूलों तक पहुंच रही है। कभी भारतीय बच्चों की पाठ्यपुस्तकों का अहम हिस्सा रही पंचतंत्र की कहानियां अब ऑस्ट्रिया के स्कूली बच्चों को भी पढ़ाई जा रही हैं। वियना स्थित भारतीय दूतावास की इस पहल को भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) का एक नया उदाहरण माना जा रहा है।

1 जुलाई को ऑस्ट्रिया में भारत के राजदूत शंभू कुमारन ने वियना के स्कूली बच्चों के साथ विशेष संवाद किया और उन्हें पंचतंत्र की कहानियां सुनाईं। इस अवसर को भारतीय दूतावास ने “गुरुकुल डिप्लोमेसी” का नाम दिया, जिसका उद्देश्य भारतीय ज्ञान, संस्कृति और जीवन मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

भारतीय दूतावास ने इस कार्यक्रम की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा की। पोस्ट के साथ जारी वीडियो में राजदूत शंभू कुमारन बच्चों को कहानियां सुनाते और उनसे बातचीत करते नजर आए। दूतावास ने यह भी बताया कि हाल ही में ऑस्ट्रियाई छात्रों के लिए पंचतंत्र का जर्मन भाषा में अनुवाद भी उपलब्ध कराया गया है, जिससे स्थानीय बच्चों के लिए इन कहानियों को समझना और आसान हो गया है।

पंचतंत्र भारतीय साहित्य की सबसे प्रसिद्ध और प्राचीन नीति-कथा संग्रहों में से एक है। इसकी रचना पंडित विष्णु शर्मा ने संस्कृत में की थी। माना जाता है कि इन कहानियों का उद्देश्य युवा राजकुमारों को नेतृत्व, व्यवहार-कुशलता, निर्णय क्षमता और व्यावहारिक जीवन के सिद्धांत सिखाना था। समय के साथ पंचतंत्र केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका अनुवाद दुनिया की 50 से अधिक भाषाओं में हो चुका है।

पंचतंत्र पांच प्रमुख भागों में विभाजित है। इनमें मित्रभेद मित्रों के बीच मतभेद पैदा होने के परिणामों को बताता है, मित्रलाभ अच्छे मित्र बनाने और सहयोग का महत्व समझाता है, काकोलुकीयम् युद्ध और शांति की रणनीति पर आधारित है, लब्धप्रणाश प्राप्त उपलब्धियों को संभालकर रखने का संदेश देता है, जबकि अपरीक्षित कारक बिना सोचे-समझे लिए गए निर्णयों के नुकसान को दर्शाता है।

राजदूत शंभू कुमारन ने इस कार्यक्रम को भारत और ऑस्ट्रिया के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों ने पंचतंत्र की कहानियों में गहरी रुचि दिखाई और उनके संदेश को आसानी से समझा। उन्होंने पुस्तक के आकर्षक चित्रों के लिए ऑस्ट्रियाई कार्टूनिस्ट क्लॉस पीटर का भी आभार व्यक्त किया।

भारतीय दूतावास इससे पहले भी ऑस्ट्रिया में पंचतंत्र को लोकप्रिय बनाने के लिए कई पहल कर चुका है। जून में दूतावास ने वियना शहर और स्थानीय स्कूलों के सहयोग से “स्टोरीज फ्रॉम द पंचतंत्र” कार्यक्रम का नया चरण शुरू किया था। यह प्रसिद्ध ऑस्ट्रियाई लेखक और पॉडकास्टर थॉमस ब्रेजिना की वीडियो पॉडकास्ट श्रृंखला है, जिसमें वे जर्मन भाषा में पंचतंत्र की कहानियां सुनाते हैं।

दूतावास के अनुसार, इस कार्यक्रम में वियना के एक स्कूल के 50 से अधिक छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान राजदूत ने बच्चों को चुनिंदा कहानियां सुनाईं और उनसे संवाद भी किया। बच्चों ने अपने पसंदीदा पात्रों और कहानियों से मिली सीख को उत्साह के साथ साझा किया।

भारत लंबे समय से योग, आयुर्वेद, शास्त्रीय संगीत और साहित्य जैसी सांस्कृतिक धरोहरों के माध्यम से दुनिया से जुड़ता रहा है। अब पंचतंत्र की कहानियों के जरिए भारतीय ज्ञान परंपरा का यह संदेश यूरोप के बच्चों तक पहुंच रहा है। यह पहल न केवल भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रही है, बल्कि यह भी दिखा रही है कि सदियों पुरानी नैतिक शिक्षाएं आज भी दुनिया भर के बच्चों के लिए उतनी ही प्रासंगिक हैं।

 

 

 

 

Asmita Sarkar

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