
टी.एस. मिश्रा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग द्वारा राष्ट्रीय फॉरेंसिक मेडिसिन दिवस के अवसर पर कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (CME) कार्यक्रम और फॉरेंसिक क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक कार्यक्रम में फैकल्टी सदस्यों, मेडिकल छात्रों और विधि शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान फॉरेंसिक मेडिसिन, मेडिको-लीगल सिस्टम और स्वास्थ्य सेवाओं व कानून के क्षेत्र में तेजी से बदलते फॉरेंसिक साइंस के महत्व पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने मेडिकल और कानूनी प्रक्रियाओं में फॉरेंसिक विज्ञान की बढ़ती भूमिका को विस्तार से समझाया।
इस अवसर पर डॉ. आदर्श कुमार और देवांग पांडेय ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए। उन्होंने “मेडिको-लीगल ब्लूप्रिंट” विषय पर चर्चा करते हुए कहा कि आज के समय में चिकित्सा, फॉरेंसिक साइंस और कानूनी व्यवस्था के बीच समन्वित ज्ञान की जरूरत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने छात्रों को फॉरेंसिक जांच प्रक्रिया और कानूनी पहलुओं की बेहतर समझ विकसित करने पर जोर दिया।
आयोजकों के अनुसार, CME सत्रों का उद्देश्य प्रतिभागियों को मेडिको-लीगल प्रक्रियाओं, फॉरेंसिक जांच तकनीकों और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में फॉरेंसिक मेडिसिन की भूमिका के प्रति जागरूक बनाना था। कार्यक्रम में फॉरेंसिक मेडिसिन और टॉक्सिकोलॉजी से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यावहारिक और शैक्षणिक गतिविधियां भी आयोजित की गईं।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण फॉरेंसिक क्विज प्रतियोगिता रही, जिसमें छात्रों ने उत्साह के साथ भाग लिया। इस प्रतियोगिता के जरिए छात्रों को साक्ष्य विश्लेषण, मेडिको-लीगल अवधारणाओं और मेडिकल प्रैक्टिस में फॉरेंसिक अनुप्रयोगों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। आयोजकों का कहना था कि इस तरह की गतिविधियां छात्रों को सिर्फ सैद्धांतिक ज्ञान ही नहीं बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में उपयोग होने वाली प्रक्रियाओं की समझ भी देती हैं।
कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अंतिम सम्मान समारोह तक छात्रों और फैकल्टी सदस्यों के लिए अनुभव आधारित शिक्षा और पेशेवर सीखने के अवसर उपलब्ध कराए गए। विभिन्न सत्रों में प्रतिभागियों ने फॉरेंसिक साइंस के नए आयामों और इसकी उपयोगिता पर चर्चा की।
राष्ट्रीय फॉरेंसिक मेडिसिन दिवस फॉरेंसिक मेडिसिन की उस महत्वपूर्ण भूमिका को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है, जो आपराधिक जांच, मेडिकल ज्यूरिस्प्रूडेंस, टॉक्सिकोलॉजी और स्वास्थ्य व न्याय प्रणाली से जुड़े वैज्ञानिक परीक्षणों में निभाई जाती है।
टी.एस. मिश्रा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की यह पहल देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में फॉरेंसिक शिक्षा, मेडिकल ट्रेनिंग और कानूनी जागरूकता को एक साथ जोड़ने की बढ़ती जरूरत को भी दर्शाती है। आज के समय में फॉरेंसिक साइंस अपराध जांच, हेल्थकेयर डॉक्यूमेंटेशन, टॉक्सिकोलॉजी और मेडिको-लीगल रिपोर्टिंग जैसे क्षेत्रों में तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे कार्यक्रम मेडिकल छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और बहु-विषयक सीखने का अवसर प्रदान करते हैं।




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