श्री श्री यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स की ओर से छात्रों के कौशल विकास के लिए डिजाइन थिंकिंग पर दो दिवसीय वर्कशॉप आयोजित की गई। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को डिजाइन तैयार करने के व्यावहारिक तरीकों, रचनात्मक सोच और समस्याओं का समाधान खोजने की तकनीकों से परिचित कराना था। वर्कशॉप में छात्रों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी विचार को उपयोगी समाधान में कैसे बदला जा सकता है।
इस कार्यशाला का संचालन प्रोफेसर एमेरिटस परेश चटर्जी ने किया। वह कर्नावती यूनिवर्सिटी के यूनाइटेडवर्ल्ड इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (UID), गांधीनगर में क्राफ्ट इनोवेशन सेंटर के एसोसिएट डायरेक्टर हैं। वह अहमदाबाद स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) में प्रोफेसर के रूप में भी काम कर चुके हैं।
वर्कशॉप के दौरान रचनात्मक सोच, डिजाइन की पारंपरिक और आधुनिक पद्धतियों तथा नए विचारों को विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को डिजाइन के सिद्धांतों और समस्याओं को अलग-अलग नजरिए से समझने का अवसर मिला।
डिजाइन थिंकिंग और रचनात्मक समस्या समाधान पर जोर
डिजाइन थिंकिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें किसी समस्या को समझने, लोगों की जरूरतों को पहचानने और उनके लिए उपयोगी समाधान तैयार करने पर ध्यान दिया जाता है। इसमें किसी एक विचार को अंतिम मानने के बजाय अलग-अलग संभावनाओं पर विचार करना, धारणाओं को परखना और नए तरीके आजमाना शामिल है।
वर्कशॉप में प्रतिभागियों ने सीखा कि डिजाइन के सिद्धांतों का इस्तेमाल वास्तविक परिस्थितियों में किस तरह किया जा सकता है। सत्रों में रचनात्मकता और व्यवस्थित तरीके से समस्या सुलझाने के बीच संबंध को भी समझाया गया।
पारंपरिक और आधुनिक डिजाइन पद्धतियों पर चर्चा के जरिए छात्रों को यह समझने का मौका मिला कि पुराने अनुभवों और नए विचारों को मिलाकर बेहतर डिजाइन तैयार किए जा सकते हैं। इस तरह की सीख रचनात्मक क्षेत्रों में काम करने वाले छात्रों को किसी समस्या के कई संभावित समाधान तलाशने में मदद कर सकती है।
डिजाइन विशेषज्ञ परेश चटर्जी ने किया मार्गदर्शन
वर्कशॉप का संचालन करने वाले परेश चटर्जी ने डिजाइन शिक्षा और इस क्षेत्र में अपने अनुभव के आधार पर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। कर्नावती यूनिवर्सिटी के UID स्थित क्राफ्ट इनोवेशन सेंटर और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन में उनके अनुभव ने सत्रों को अकादमिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान किया।
श्री श्री यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स ने इस कार्यक्रम को छात्रों के कौशल विकास की पहल के रूप में आयोजित किया। इसका उद्देश्य छात्रों को डिजाइन की व्यापक समझ देना और रचनात्मक काम के लिए नए दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करना था।
डिजाइन शिक्षा को व्यावहारिक कौशल से जोड़ने की पहल
डिजाइन की पढ़ाई केवल चित्र बनाने या नए दृश्य विचार तैयार करने तक सीमित नहीं है। इसमें आसपास की चीजों का बारीकी से निरीक्षण करना, लोगों की जरूरतों को समझना, नए प्रयोग करना और चुनौतियों का समाधान तलाशना भी शामिल है।
इस तरह की कार्यशालाएं छात्रों को नियमित कक्षाओं से आगे बढ़कर डिजाइन के सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर देती हैं। चर्चा और गतिविधियों के माध्यम से छात्र अलग-अलग तरीकों को आजमा सकते हैं और अपने विचारों को बेहतर बनाने की प्रक्रिया सीख सकते हैं।
श्री श्री यूनिवर्सिटी में आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप का मुख्य फोकस रचनात्मक खोज, नवाचार और व्यावहारिक सीख पर रहा। इस कार्यक्रम के माध्यम से स्कूल ऑफ फाइन आर्ट्स के छात्रों को डिजाइन थिंकिंग और समस्या समाधान के विभिन्न तरीकों से परिचित कराया गया।




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