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IILM यूनिवर्सिटी गुरुग्राम में अकादमिक फोरम: कानून की पढ़ाई में इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच और AI की भूमिका पर चर्चा

IILM यूनिवर्सिटी गुरुग्राम में अकादमिक फोरम: कानून की पढ़ाई में इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच और AI की भूमिका पर चर्चा

IILM यूनिवर्सिटी गुरुग्राम में अकादमिक फोरम: कानून की पढ़ाई में इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच और AI की भूमिका पर चर्चा

IILM University Gurugram के स्कूल ऑफ लॉ में हाल ही में एक अकादमिक फोरम सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का विषय था “कानून और समाज में चुनौतीपूर्ण कानूनी प्रतिमान: लीगल पेडागॉजी के लिए एक इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण”। इस कार्यक्रम का संचालन स्कूल ऑफ लॉ की फैकल्टी सदस्य Dr. Ana Penteado ने किया। सत्र का उद्देश्य यह समझना था कि बदलती सामाजिक और तकनीकी परिस्थितियों के बीच कानून की शिक्षा को किस तरह अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

सत्र के दौरान इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि अंतरराष्ट्रीय कानून, Artificial Intelligence और बौद्धिक संपदा अधिकार (Intellectual Property) जैसे क्षेत्रों को कानून की पढ़ाई में किस प्रकार जोड़ा जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों के समन्वय से छात्रों को कानून की व्यापक समझ मिलती है और वे आधुनिक कानूनी चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।

फोरम में यह भी बताया गया कि पारंपरिक कानूनी शिक्षा के साथ अन्य विषयों को जोड़ने से पढ़ाई अधिक व्यावहारिक और समकालीन बन सकती है। चर्चा के दौरान यह पहचानने की कोशिश की गई कि किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय कानून, तकनीक और बौद्धिक संपदा जैसे क्षेत्रों को कानूनी शिक्षा के साथ जोड़कर शिक्षण पद्धति को मजबूत किया जा सकता है।

इस सत्र का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह रहा कि वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए ट्रांसडिसिप्लिनरी नीति-निर्माण को बढ़ावा देना आवश्यक है। प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार साझा किए कि लॉ स्कूलों के पाठ्यक्रम में इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण को लागू करने के लिए कौन-कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि टीमवर्क और सहयोग से शिक्षण में नए और अभिनव विचार सामने आते हैं। फैकल्टी सदस्यों के बीच हुई चर्चाओं में कानून पढ़ाने के नए तरीकों और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों पर विचार सामने आए, जो भविष्य में कानूनी शिक्षा को और प्रभावी बना सकते हैं।

इस अकादमिक फोरम का उद्देश्य आने वाली पीढ़ी के कानूनी पेशेवरों और नेताओं को बेहतर तरीके से तैयार करना है। इंटरडिसिप्लिनरी दृष्टिकोण के माध्यम से कानून की शिक्षा को बदलती वैश्विक और तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप ढालने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे फोरम लॉ स्कूलों को अपनी शिक्षण पद्धतियों की समीक्षा करने और आधुनिक कानूनी प्रैक्टिस की जरूरतों के अनुसार उन्हें अपडेट करने में मदद करते हैं।

Asmita Sarkar

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