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हिमालय में कला, संगीत और सतत जीवन का उत्सव: देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय बना काफल फेस्टिवल 2026 का सह-प्रायोजक

हिमालय में कला, संगीत और सतत जीवन का उत्सव: देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय बना काफल फेस्टिवल 2026 का सह-प्रायोजक

हिमालय में कला, संगीत और सतत जीवन का उत्सव: देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय बना काफल फेस्टिवल 2026 का सह-प्रायोजक

Dev Bhoomi Uttarakhand University (DBUU) ने उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में आयोजित सामुदायिक सांस्कृतिक कार्यक्रम Kaphal Festival 2026 में सह-प्रायोजक के रूप में भागीदारी की। इस फेस्टिवल का उद्देश्य स्थानीय परंपराओं, लोक कला, लोक संगीत और सामुदायिक जीवन का उत्सव मनाना था, ताकि लोगों को व्यावसायिक पर्यटन से अलग क्षेत्र की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ा जा सके।

काफल फेस्टिवल में स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। पारंपरिक लोक समूह Pandavaas ने कहानी-आधारित लोक संगीत और भक्तिमय प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय लोक नृत्य, पारंपरिक गीत और हस्तशिल्प कला प्रदर्शनी भी शामिल रही। इससे आगंतुकों को ग्रामीण उत्तराखंड के दैनिक जीवन और संस्कृति को करीब से समझने का अवसर मिला। आयोजन खुले और प्राकृतिक वातावरण में किया गया। आयोजकों के अनुसार फेस्टिवल को सरल, पर्यावरण के अनुकूल और समुदाय-केंद्रित रखा गया।

विश्वविद्यालय ने गर्व के साथ साझा किया कि सह-प्रायोजक के रूप में उसकी भागीदारी स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने, सामुदायिक सहयोग मजबूत करने और क्षेत्रीय कार्यक्रमों को समर्थन देने के प्रयासों का हिस्सा है। DBUU ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य युवाओं की भागीदारी बढ़ाना, स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और औपचारिक शिक्षा को जमीनी सांस्कृतिक अनुभवों से जोड़ना है। विश्वविद्यालय अधिकारियों के मुताबिक, ऐसे आयोजन संस्थान की सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक विकास की प्रतिबद्धता के अनुरूप हैं।

फेस्टिवल आयोजकों ने बताया कि यह कार्यक्रम बड़े पैमाने के व्यावसायिक पर्यटन के लिए नहीं था। इसका मकसद स्थानीय निवासियों, कलाकारों और छात्रों को एक साथ लाकर सादगीपूर्ण और आत्मीय माहौल में संस्कृति का अनुभव कराना था। आयोजन में स्थानीय संसाधनों के उपयोग, स्थानीय प्रतिभागियों को प्राथमिकता देने और गांवों व समुदायों के नजदीक स्थान चुनने पर विशेष ध्यान दिया गया।

DBUU ने कहा कि काफल फेस्टिवल 2026 से जुड़ाव स्थानीय समुदायों के सहयोग, सांस्कृतिक संरक्षण और क्षेत्र-आधारित शिक्षण अनुभवों को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए कई कदमों में से एक है। यह फेस्टिवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में आयोजित किया गया, न कि मीडिया-केन्द्रित या व्यावसायिक आयोजन के रूप में। इसका उद्देश्य लंबे समय तक पारंपरिक विरासत और सामुदायिक भागीदारी को बनाए रखना है।

Asmita Sarkar

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