
भोपाल: जगरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी (JLU) ने स्वदेशी ज्ञान परंपराओं के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और प्रसार के उद्देश्य से ‘नोमैडिक लिविंग लैब’ (Nomadic Living Lab) की शुरुआत की है। यह एक सहयोगात्मक मंच है, जो शोध, दस्तावेजीकरण, डिजाइन और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को संरक्षित करने और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करेगा।
विश्वविद्यालय के अनुसार, यह पहल समुदायों, विद्यार्थियों, विशेषज्ञों और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं को एक साथ लाकर आपसी सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देगी। साथ ही यह समझने का अवसर भी प्रदान करेगी कि डिजाइन और रचनात्मक सोच किस प्रकार समाज में सकारात्मक और सार्थक बदलाव ला सकती है।
विश्वविद्यालय ने बताया कि इस मंच का उद्देश्य केवल समुदायों के बारे में सीखना नहीं, बल्कि समुदायों के साथ मिलकर सीखने की संस्कृति विकसित करना है। इस प्रक्रिया में समुदायों के अनुभवों, परंपराओं और ज्ञान को शोध और रचनात्मक गतिविधियों के केंद्र में रखा जाएगा, ताकि उनकी वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
नोमैडिक लिविंग लैब के शुभारंभ कार्यक्रम में विश्वविद्यालय नेतृत्व, भाषा रिसर्च एंड पब्लिकेशन सेंटर, मुस्कान संस्था के प्रतिनिधि, विभिन्न समुदायों के सदस्य और अन्य सहयोगी भागीदार उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान नोमैडिक लिविंग लैब की अवधारणा और इसके उद्देश्यों को प्रस्तुत किया गया। साथ ही परियोजना से जुड़े सहयोगियों ने अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर छात्रों और समुदायों के बीच एक वर्ष तक चली साझेदारी और सहयोग की प्रक्रिया को भी प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम में आयोजित प्रदर्शनी में उन शोध कार्यों, साझा अनुभवों और रचनात्मक परियोजनाओं को प्रदर्शित किया गया, जो विभिन्न समुदायों के साथ मिलकर किए गए कार्यों के दौरान विकसित हुईं। प्रदर्शनी ने यह दिखाया कि सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से किस प्रकार ज्ञान और रचनात्मकता का आदान-प्रदान संभव है।
विश्वविद्यालय का मानना है कि नोमैडिक लिविंग लैब स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण और अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा। इसके माध्यम से पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक डिजाइन प्रक्रियाओं के साथ जोड़कर नई संभावनाओं की खोज की जाएगी और इसे भविष्य की पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
यह पहल इस बात को भी रेखांकित करती है कि विश्वविद्यालय आज केवल अकादमिक शिक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समुदायों और शिक्षा जगत के बीच सेतु की भूमिका भी निभा रहे हैं। इससे छात्रों को समाज की वास्तविक परिस्थितियों, स्थानीय चुनौतियों और समुदायों के जीवन अनुभवों को करीब से समझने का अवसर मिलेगा।
जगरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी ने कहा कि नोमैडिक लिविंग लैब छात्रों, विशेषज्ञों और समुदायों को एक साझा सीखने के मंच पर जोड़ने का काम करेगा। इसका उद्देश्य डिजाइन आधारित समाधानों के माध्यम से सकारात्मक सामाजिक प्रभाव पैदा करना और भारत की समृद्ध स्वदेशी ज्ञान परंपराओं को संरक्षित तथा प्रोत्साहित करना है।




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